Mobile Manufacturing Scheme 2.0: केंद्र सरकार की नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट ₹62,500 करोड़ है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल चलेगी। इसमें मोबाइल उत्पादन के साथ घरेलू कंपोनेंट सोर्सिंग, डिजाइन और R&D को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
Mobile Manufacturing Scheme 2.0: मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सरकार की नई योजना की डिटेल आज सामने आ सकती है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए स्कीम के प्रावधानों और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दे सकते हैं। ऐसे में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी बाजार की नजर रहेगी।
केंद्र सरकार ने जुलाई में ₹62,500 करोड़ के बजटीय परिव्यय वाली Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को मंजूरी दी थी। यह योजना पुरानी Large Scale Electronics Manufacturing PLI स्कीम के बाद लाई गई है, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। नई योजना का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने के साथ घरेलू वैल्यू एडिशन, कंपोनेंट सोर्सिंग और भारतीय ब्रांड्स को मजबूत करना है।
5 साल तक चलेगी ₹62,500 करोड़ की स्कीम
सरकार की नई Mobile Phone Manufacturing Scheme पांच साल के लिए लागू होगी। इसका कार्यकाल वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक रहेगा। सरकार को उम्मीद है कि योजना की अवधि में देश में करीब ₹39 लाख करोड़ का मोबाइल फोन उत्पादन हो सकता है। इसके अलावा लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
इस योजना का फोकस केवल मोबाइल असेंबली बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, प्रमुख कंपोनेंट्स की स्थानीय सोर्सिंग बढ़ाने और भारत में डिजाइन एवं रिसर्च को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दे रही है।
कंपनियों को मिलेगा 2.25% से 5% तक इंसेंटिव
नई स्कीम में भारत में निर्मित मोबाइल फोन की पात्र बिक्री पर कंपनियों को अलग-अलग दरों से इंसेंटिव दिया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसकी बेस इंसेंटिव दर 2.25% से 5% के बीच होगी। इसके अलावा प्रमुख कंपोनेंट और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग बढ़ाने पर 1.5% तक अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान है।
भारतीय ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्ट डिजाइन और R&D पर भी अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए पात्र बिक्री पर 3% अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान रखा है। यानी नई योजना का उद्देश्य उत्पादन के साथ-साथ भारत में मोबाइल की टेक्नोलॉजी और डिजाइन क्षमता को भी विकसित करना है।
क्यों खास है Mobile Manufacturing Scheme 2.0?
भारत पिछले एक दशक में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। सरकार के मुताबिक भारत अब वॉल्यूम के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2% मोबाइल फोन भारत में ही बनाए जाते हैं।
नई योजना के जरिए सरकार इस ग्रोथ को अगले स्तर पर ले जाना चाहती है। खासतौर पर घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम तैयार करना और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना इसका अहम लक्ष्य है।
PLI के बाद नई स्कीम से क्या बदलेगा?
मोबाइल फोन के लिए लागू Production Linked Incentive (PLI-LSEM) स्कीम ने भारत में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। इसकी अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो गई। अब MPMS को उसका अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई योजना में सिर्फ उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया गया है। सरकार घरेलू कंपोनेंट सोर्सिंग और भारतीय कंपनियों की डिजाइन एवं R&D क्षमता को भी इंसेंटिव से जोड़ रही है। इससे मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े शेयरों पर नजर
नई स्कीम की डिटेल सामने आने के बाद मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। बाजार में Dixon Technologies समेत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों पर नजर रह सकती है।
हालांकि, किसी शेयर पर योजना का असर उसके पात्रता मानदंड, इंसेंटिव की वास्तविक राशि, कंपनी के उत्पादन और घरेलू सोर्सिंग की क्षमता पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल सरकारी स्कीम की घोषणा के आधार पर शेयर खरीदने का फैसला करना उचित नहीं होगा।
भारत में मोबाइल उत्पादन और एक्सपोर्ट में बड़ा उछाल
सरकार के अनुसार पिछले वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेज विस्तार हुआ है। मोबाइल फोन अब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और एक्सपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। जुलाई में कैबिनेट ने नई योजना को मंजूरी देते हुए कहा था कि इसका लक्ष्य मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और मजबूत करना है।
नई योजना के तहत आने वाले पांच वर्षों में उत्पादन और एक्सपोर्ट में और तेजी लाने की उम्मीद है। साथ ही घरेलू कंपोनेंट इंडस्ट्री के विस्तार से भारत की आयात पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर रहेगी नजर
अब सबसे अहम बात यह है कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार योजना की गाइडलाइंस, आवेदन प्रक्रिया, पात्र कंपनियों और इंसेंटिव से जुड़े नियमों पर क्या जानकारी देती है। इन विवरणों से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियों को योजना का लाभ किस तरह मिलेगा और इसका वास्तविक असर मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर कितना बड़ा हो सकता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ₹62,500 करोड़ की यह योजना भारत को मोबाइल असेंबली से आगे बढ़ाकर कंपोनेंट, डिजाइन, R&D और घरेलू वैल्यू एडिशन के क्षेत्र में मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


