SEBI Action on CAS Manipulation: मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सेंसेक्स के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में कथित गड़बड़ी के मामले में दो एंटिटीज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। सेबी ने Copthall Mauritius Investment Limited और Mansi Share and Stock Broking Private Limited को सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित करने के साथ गलत तरीके से कमाए गए कुल करीब 3.68 करोड़ रुपये जब्त करने का आदेश दिया है। यह मामला 13 अगस्त 2026 को सेंसेक्स की एक्सपायरी के दिन CAS के दौरान इंडेक्स में असामान्य उतार-चढ़ाव से जुड़ा है।
सेबी के 19 अगस्त के अंतरिम आदेश के मुताबिक, कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड से 2.96 करोड़ रुपये, जबकि मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड से 71.65 लाख रुपये जब्त करने का निर्देश दिया गया है। रेगुलेटर की शुरुआती जांच में दोनों संस्थाओं की डेरिवेटिव्स पोजीशन और CAS के दौरान लगाए गए बड़े ऑर्डरों के बीच संबंध सामने आया।
CAS में क्या हुआ था?
SEBI के सर्विलांस सिस्टम ने 13 अगस्त को दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे के बीच क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में सेंसेक्स की इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) में तीन बड़े उतार-चढ़ाव दर्ज किए।
इनमें करीब 362.02 अंक, 132.67 अंक और 405.08 अंक के बदलाव शामिल थे। खास बात यह थी कि ये हलचल महज कुछ सेकंड से लेकर 28 सेकंड के भीतर हुई।
सेंसेक्स उस दिन करीब 78,080 के स्तर पर बंद हुआ। सेबी के शुरुआती आकलन में यह क्लोजिंग लेवल उस स्तर से करीब 240 अंक ज्यादा था, जिसकी उम्मीद निफ्टी में हुई समान गतिविधियों के आधार पर की गई थी। असामान्य गतिविधि ने रेगुलेटर का ध्यान खींचा और इसके बाद जांच शुरू की गई।
कॉप्थॉल ने कैसे किया कथित खेल?
SEBI की शुरुआती जांच के अनुसार, Copthall Mauritius Investment Limited ने सेंसेक्स में शामिल शेयरों में बड़े पैमाने पर आक्रामक खरीदारी के ऑर्डर लगाए।
कॉप्थॉल ने सेंसेक्स के शेयरों में करीब 126 करोड़ रुपये के BUY ऑर्डर लगाए। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से लगभग 3 फीसदी ऊपर थे। CAS के दौरान कुल Buy Order Value में इन ऑर्डरों की हिस्सेदारी करीब 99.91 फीसदी थी।
इसके बाद इन खरीद ऑर्डरों का बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया गया। सेबी के मुताबिक, इसी गतिविधि के दौरान सेंसेक्स में ऊपर की ओर दबाव बना और कॉप्थॉल की डेरिवेटिव्स पोजीशन को फायदा मिला।
रेगुलेटर के शुरुआती आकलन के अनुसार, कॉप्थॉल ने इस तरीके से करीब 2.96 करोड़ रुपये का लाभ कमाया।
कॉप्थॉल की ऑप्शंस पोजीशन क्या थी?
जांच में कॉप्थॉल की सेंसेक्स ऑप्शंस पोजीशन भी सामने आई। इसमें इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर बंद होने से फायदा पहुंचाने वाली पोजीशन शामिल थीं।
जांच वाले दिन से एक दिन पहले कॉप्थॉल ने 26,560 सेंसेक्स 77,500 कॉल खरीदे और इतनी ही संख्या में 77,500 पुट बेचे। इसके अलावा उसी दिन इंट्राडे में 84,200 सेंसेक्स 78,000 कॉल खरीदे गए और 84,200 सेंसेक्स 78,000 पुट बेचे गए।
इसी तरह जांच वाले दिन से एक दिन पहले 12,640 सेंसेक्स 78,500 कॉल खरीदने के साथ इतनी ही संख्या में 78,500 पुट बेचने की बात सामने आई।
SEBI के अनुसार, इंडेक्स की कीमत में बदलाव आने के बाद कॉप्थॉल ने अपने बड़े Buy Orders का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रद्द कर दिया।
मानसी शेयर ने कैसे किया कथित खेल?
दूसरी एंटिटी Mansi Share and Stock Broking Private Limited ने कथित तौर पर सेंसेक्स में शामिल आठ शेयरों में बड़े Sell Orders लगाए।
SEBI के मुताबिक, मानसी ने कुल करीब 12.65 लाख शेयरों के Sell Orders लगाए। इनमें करीब 7.05 लाख शेयर रेफरेंस प्राइस से लगभग 2.5 फीसदी नीचे के भाव पर लगाए गए थे।
इन ऑर्डरों से सेंसेक्स पर नीचे की तरफ दबाव बनने की स्थिति पैदा हुई। बाद में मानसी ने लगभग सभी Sell Orders कैंसिल कर दिए।
सेबी के शुरुआती निष्कर्ष के अनुसार, मानसी ने इस गतिविधि के जरिए अपनी Put Options पोजीशन से करीब 71.64 लाख रुपये का लाभ कमाया।
मानसी शेयर की ऑप्शंस पोजीशन
जांच में मानसी की सेंसेक्स ऑप्शंस ट्रेडिंग भी सामने आई। कंपनी ने इंट्राडे में 5,000 सेंसेक्स 77,800 कॉल खरीदे।
इसके अलावा उसने 42,020 सेंसेक्स 77,800 पुट खरीदे। इसके बाद दूसरी किस्त में 83,320 सेंसेक्स 77,900 पुट और तीसरी किस्त में 44,000 सेंसेक्स 78,000 पुट खरीदे गए।
SEBI के अनुसार, इन पुट ऑप्शंस से सेंसेक्स के निचले स्तर पर बंद होने की स्थिति में लाभ मिल सकता था।
रेगुलेटर ने कहा कि मानसी द्वारा रेफरेंस प्राइस से काफी नीचे लगाए गए बड़े Sell Orders ने करीब पांच मिनट तक इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा। इसके बाद लगभग सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए।
क्या दोनों एंटिटीज ने मिलकर किया था काम?
SEBI के अंतरिम आदेश में यह नहीं कहा गया है कि Copthall और Mansi Share ने आपस में मिलीभगत करके सेंसेक्स को प्रभावित किया।
रेगुलेटर का शुरुआती आकलन है कि दोनों संस्थाओं ने स्वतंत्र रूप से अपनी-अपनी डेरिवेटिव्स पोजीशन से फायदा उठाने के लिए इंडेक्स को प्रभावित करने वाली गतिविधियां कीं।
हालांकि, यह अभी शुरुआती जांच का निष्कर्ष है। मामले की विस्तृत जांच आगे भी जारी रहेगी।
SEBI ने क्या-क्या पाबंदियां लगाईं?
SEBI ने आगे की जांच पूरी होने तक दोनों एंटिटीज को सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रेडिंग करने से रोक दिया है। साथ ही उन्हें क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेने से भी प्रतिबंधित किया गया है।
Mansi Share and Stock Broking के मामले में यह रोक उसके प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग अकाउंट पर लागू होगी।
इसके अलावा दोनों संस्थाओं के बैंक और डीमैट अकाउंट से रकम निकालने पर भी रोक लगाई गई है। SEBI की मंजूरी के बिना उनकी संपत्तियों को बेचने या ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं होगी।
रेगुलेटर ने दोनों एंटिटीज को 15 दिनों के भीतर अपनी संपत्तियों, बैंक अकाउंट, डीमैट अकाउंट, सिक्योरिटीज और निवेश की पूरी जानकारी जमा करने का निर्देश दिया है।
आगे क्या होगा?
SEBI ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अंतरिम जांच के आधार पर की गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी रहेगी। इसलिए फिलहाल सामने आए निष्कर्षों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
इस मामले से एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बड़े पैमाने पर ऑर्डर लगाने और उन्हें बाद में कैंसिल करने जैसी गतिविधियों पर बाजार निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब ऐसी गतिविधियों का असर इंडेक्स के क्लोजिंग लेवल और उससे जुड़े डेरिवेटिव्स पर पड़ सकता है।
SEBI की कार्रवाई से यह संकेत भी मिलता है कि रेगुलेटर CAS के दौरान असामान्य ऑर्डर गतिविधियों और डेरिवेटिव्स पोजीशन के बीच संबंधों पर कड़ी नजर रख रहा है।


