Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयरों में 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 8% तक चढ़ गया। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी कम हुई और सुबह 11 बजे तक शेयर 5.26% की बढ़त के साथ ₹150.78 पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले 19 अगस्त को कंपनी के शेयर करीब 35% प्रीमियम के साथ स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुए थे और कारोबार खत्म होने तक करीब 48% की तेजी दर्ज की थी।
शिपरॉकेट के शेयरों में इस तेजी के पीछे एक बड़ी ब्लॉक डील की खबर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, Goldman Sachs India Equity Portfolio ने कंपनी के 40,24,040 शेयर खरीदे हैं। यह सौदा ₹131 प्रति शेयर की कीमत पर हुआ है। इस खबर के बाद शेयरों में खरीदारी का रुझान और मजबूत हुआ।
Goldman Sachs की खरीदारी से शेयरों में तेजी
शिपरॉकेट के शेयरों में 20 अगस्त की तेजी का एक प्रमुख कारण Goldman Sachs से जुड़ी खरीदारी बताई जा रही है। Goldman Sachs India Equity Portfolio ने करीब 40.24 लाख शेयर ₹131 प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे हैं।
बड़ी संस्थागत खरीदारी को बाजार में अक्सर सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, केवल किसी बड़े निवेशक की खरीदारी के आधार पर शेयर में निवेश का फैसला करना उचित नहीं होता। कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन और आगे की ग्रोथ को भी देखना जरूरी है।
IPO में मिला था जबर्दस्त रिस्पॉन्स
शिपरॉकेट के IPO को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 12 से 14 अगस्त के बीच खुला था और करीब 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था।
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में भी शेयर को लेकर मजबूत सेंटीमेंट था। GMP करीब 36-37% के आसपास बताया जा रहा था। इसी वजह से लिस्टिंग के दिन निवेशकों की नजरें शेयर पर टिकी थीं।
जिन निवेशकों को IPO में शेयर अलॉट हुए, उनके लिए लिस्टिंग के बाद तेजी ने शानदार मुनाफे का मौका दिया है। लेकिन मौजूदा स्तर पर नए निवेशकों के लिए सवाल यह है कि क्या शेयर में तुरंत एंट्री करनी चाहिए?
IPO में निवेश का मौका चूक गए तो क्या करें?
विशेषज्ञों की राय के मुताबिक, जिन निवेशकों को IPO में शेयर नहीं मिले या जिन्होंने IPO में आवेदन ही नहीं किया था, उन्हें मौजूदा तेजी में जल्दबाजी से खरीदारी करने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनानी चाहिए।
कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट महेश एम. ओझा के मुताबिक, नए निवेशकों को कम से कम अगली 1-2 तिमाहियों के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी का रेवेन्यू किस रफ्तार से बढ़ रहा है, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में क्या सुधार हो रहा है और बिजनेस की ग्रोथ कितनी टिकाऊ है, इन बातों का आकलन करने के बाद ही निवेश का फैसला लेना बेहतर होगा।
यानी सिर्फ लिस्टिंग के बाद शेयर में आई तेजी देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है।
IPO में शेयर मिले हैं तो क्या करें?
जिन निवेशकों को IPO में शिपरॉकेट के शेयर अलॉट हुए हैं, उनके लिए रणनीति थोड़ी अलग हो सकती है। आनंद राठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी के मुताबिक, शिपरॉकेट को भारत में ई-कॉमर्स इकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है।
हालांकि, इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी काफी है। ऐसे में IPO निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के हिसाब से कुछ हिस्से में मुनाफावसूली कर सकते हैं और बाकी शेयरों को लंबी अवधि के लिए होल्ड करने पर विचार कर सकते हैं।
इस रणनीति से निवेशक शुरुआती तेजी में कुछ मुनाफा सुरक्षित कर सकते हैं, जबकि कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ में हिस्सेदारी बनाए रख सकते हैं।
Shiprocket का बिजनेस क्या है?
शिपरॉकेट की शुरुआत एक शिपिंग सर्विस कंपनी के तौर पर हुई थी। समय के साथ कंपनी ने अपने बिजनेस का विस्तार किया और अब यह फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है।
कंपनी डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स से लेकर MSME कारोबारियों तक को लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
कंपनी के बिजनेस को मुख्य तौर पर कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस में बांटा गया है।
कंपनी किन सेवाओं से कमाती है?
Shiprocket के कोर बिजनेस में मुख्य रूप से डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग एप्लिकेशन शामिल हैं। वहीं, इमर्जिंग बिजनेस के तहत कंपनी कई नए क्षेत्रों में काम कर रही है।
इनमें शामिल हैं:
- कार्गो और फुलफिलमेंट
- क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग
- एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग सॉल्यूशंस
- कैपिटल सॉल्यूशंस
- हाइपरलोकल डिलीवरी
भारत में ई-कॉमर्स, D2C ब्रांड्स और MSME कारोबार के विस्तार से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लंबे समय में फायदा मिल सकता है। यही Shiprocket के लिए भी ग्रोथ का एक बड़ा अवसर हो सकता है।
Temasek और Zomato का भी है निवेश
Shiprocket में Temasek और Zomato जैसे बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी रही है। इससे कंपनी को लेकर संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी का भी संकेत मिलता है।
हालांकि, बड़े निवेशकों का समर्थन किसी शेयर में रिटर्न की गारंटी नहीं है। लिस्टिंग के तुरंत बाद आई तेज उछाल के कारण शेयर का वैल्यूएशन भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए नए निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और वैल्यूएशन का विश्लेषण किए बिना केवल तेजी के पीछे भागने से बचना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
Shiprocket के शेयरों में लिस्टिंग के बाद जबर्दस्त तेजी देखने को मिली है। ऐसे में IPO निवेशकों के पास आंशिक मुनाफावसूली और बाकी हिस्से को लंबी अवधि के लिए होल्ड करने का विकल्प हो सकता है।
वहीं, जिन निवेशकों के पास शेयर नहीं हैं, उनके लिए मौजूदा तेजी में जल्दबाजी से एंट्री लेने के बजाय कंपनी के अगले कुछ तिमाही नतीजों पर नजर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।
ध्यान रखें: शेयर बाजार में किसी भी शेयर की पिछली तेजी भविष्य में उसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं देती। निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, बिजनेस ग्रोथ और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करें।
डिस्क्लेमर: NewsJagran पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं हैं। निवेशकों को सलाह है कि किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।


