Indian Railway Ministers: भारतीय रेलवे के पूर्व और मौजूदा रेल मंत्रियों की चार्टर्ड विमान यात्राओं को लेकर RTI से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2007 से अब तक रेल मंत्रालय से जुड़े मंत्रियों ने 33 मौकों पर चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल किया। इन यात्राओं पर रेलवे के करीब ₹8.90 करोड़ खर्च हुए। सबसे ज्यादा 12 बार चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया, जबकि कुल खर्च के मामले में सुरेश प्रभु सबसे आगे रहे।
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क है और रेल मंत्री को अक्सर देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्घटनाओं, बाढ़, रेलवे परियोजनाओं और दूसरे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए तुरंत पहुंचना पड़ता है। ऐसे मौकों पर सड़क या नियमित विमान सेवा की तुलना में चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल समय बचाने के लिए किया जाता रहा है। अब RTI के जरिए सामने आई जानकारी ने पिछले करीब 19 वर्षों में रेल मंत्रियों की ऐसी हवाई यात्राओं और उन पर हुए खर्च का पूरा हिसाब सामने रखा है।
इंडिया टुडे की ओर से RTI के तहत हासिल जानकारी के मुताबिक, 2007 से अब तक रेलवे ने 33 मौकों पर चार्टर्ड विमान यात्राओं के लिए करीब ₹8.90 करोड़ खर्च किए। इन यात्राओं में रेल मंत्री और रेल राज्य मंत्री स्तर के कुल 11 मंत्री शामिल रहे। रिकॉर्ड के अनुसार, इन चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल कुल 48 दिनों तक किया गया।
इन उड़ानों का इस्तेमाल सामान्य तौर पर ट्रेन दुर्घटनाओं, बाढ़ जैसी आपदाओं, रेलवे परियोजनाओं के निरीक्षण, उद्घाटन, शिलान्यास और अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए किया गया। हालांकि, अलग-अलग रेल मंत्रियों के बीच चार्टर्ड विमान के इस्तेमाल की संख्या और उस पर हुए खर्च में काफी अंतर दिखाई देता है।
चार्टर्ड विमान के इस्तेमाल में लालू प्रसाद यादव सबसे आगे
RTI से मिले रिकॉर्ड के मुताबिक, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सबसे ज्यादा बार चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल किया। उन्होंने कुल 12 मौकों पर चार्टर्ड विमान से यात्रा की।
यह संख्या दर्ज की गई कुल 33 चार्टर्ड यात्राओं के एक-तिहाई से भी अधिक है। लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान कई यात्राएं आपदा और रेलवे से जुड़ी घटनाओं के निरीक्षण के लिए की गई थीं।
खास तौर पर 2008 में बिहार में आई भीषण कोसी बाढ़ के दौरान उन्होंने तीन बार चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल कर प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। उस समय बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया था। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों तक जल्द पहुंचना सरकारी स्तर पर बड़ी चुनौती थी।
हालांकि, सबसे ज्यादा बार चार्टर्ड विमान इस्तेमाल करने के बावजूद लालू प्रसाद यादव सबसे ज्यादा खर्च करने वाले रेल मंत्री नहीं रहे।
खर्च के मामले में सुरेश प्रभु सबसे आगे
चार्टर्ड विमान पर कुल खर्च के मामले में पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु सबसे ऊपर रहे। RTI रिकॉर्ड के अनुसार, सुरेश प्रभु ने केवल 4 मौकों पर चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल किया, लेकिन इन यात्राओं पर कुल करीब ₹3.01 करोड़ खर्च हुए।
यह राशि लालू प्रसाद यादव की 12 यात्राओं पर हुए कुल खर्च से करीब ₹1.03 करोड़ ज्यादा बताई गई है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि चार्टर्ड विमान की यात्रा का खर्च केवल उड़ानों की संख्या पर निर्भर नहीं करता। विमान का प्रकार, दूरी, यात्रा की अवधि, ऑपरेटर और अन्य व्यवस्थाएं भी कुल लागत को प्रभावित कर सकती हैं।
अश्विनी वैष्णव ने सिर्फ एक बार लिया चार्टर्ड प्लेन
मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल काफी सीमित रहा है। RTI रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2021 से अब तक उन्होंने केवल एक बार चार्टर्ड फ्लाइट का इस्तेमाल किया।
यह यात्रा 2023 के बालासोर ट्रेन हादसे के बाद भुवनेश्वर जाने के लिए की गई थी। इस उड़ान पर करीब ₹25 लाख खर्च हुए।
बालासोर में हुए रेल हादसे के बाद राहत, बचाव और जांच से जुड़ी गतिविधियों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों को घटनास्थल तक तेजी से पहुंचना था। ऐसे में चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल तत्काल यात्रा के उद्देश्य से किया गया।
ट्रेन हादसों के बाद भी चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल
रेल मंत्रियों की चार्टर्ड यात्राओं का एक बड़ा कारण रेलवे दुर्घटनाएं भी रही हैं। किसी बड़े ट्रेन हादसे के बाद रेल मंत्री या मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का घटनास्थल पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
RTI रिकॉर्ड में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं। 2011 में हावड़ा-कालका मेल हादसे के बाद तत्कालीन रेल राज्य मंत्री केएच मुनियप्पा कानपुर पहुंचे थे। इसी तरह 2009 में कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे के बाद तत्कालीन रेल राज्य मंत्री आर. वेलु ने जाजपुर-केओंझर रोड क्षेत्र का दौरा किया था।
ऐसी परिस्थितियों में चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से समय बचाने और घटनास्थल तक जल्द पहुंचने के लिए किया गया।
बाढ़ और आपदा के समय भी बनी चार्टर्ड उड़ानों की जरूरत
रेल मंत्रालय के लिए केवल ट्रेन हादसे ही आपात स्थिति नहीं होते। बाढ़, भूस्खलन और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी रेल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
2008 की कोसी बाढ़ इसका एक बड़ा उदाहरण है। बिहार में बाढ़ के दौरान रेलवे की पटरियों और परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा था। ऐसे समय में तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना और रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय करना जरूरी था।
RTI रिकॉर्ड के मुताबिक, इसी दौरान लालू प्रसाद यादव ने तीन बार चार्टर्ड विमान से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।
2018 के बाद बदला चार्टर्ड उड़ानों का तरीका
RTI से मिली जानकारी में समय के साथ चार्टर्ड विमान की बुकिंग और इस्तेमाल के तरीके में बदलाव भी दिखाई देता है।
2000 के दशक और 2010 के शुरुआती वर्षों में ज्यादातर चार्टर्ड यात्राएं भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए की गईं। एक यात्रा में सीमा सुरक्षा बल यानी BSF के विमान के इस्तेमाल का भी रिकॉर्ड सामने आया है।
बाद के वर्षों में व्यवस्था में बदलाव देखने को मिला। 2018 से तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के कार्यकाल में चार्टर्ड उड़ानों के लिए अलग व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ा। इसके बाद कई यात्राओं के लिए IRCTC के जरिए चार्टर सेवाएं ली गईं।
रिकॉर्ड के मुताबिक, 2018 से 2020 के बीच पीयूष गोयल के कार्यकाल में आठ चार्टर्ड यात्राएं दर्ज की गईं।
19 साल में 48 दिनों तक हुआ इस्तेमाल
पूरे आंकड़े को देखें तो 2007 से अब तक कुल 33 मौकों पर चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल हुआ और इन यात्राओं की कुल अवधि करीब 48 दिन रही।
यहां यह समझना जरूरी है कि इन यात्राओं को केवल सामान्य सरकारी यात्रा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई यात्राएं दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं और रेलवे से जुड़े जरूरी निरीक्षणों के दौरान हुईं। इसलिए इनका उद्देश्य मुख्य रूप से तत्काल घटनास्थल तक पहुंचना और प्रशासनिक कामकाज को गति देना था।
फिर भी, करीब ₹8.90 करोड़ का कुल खर्च सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल जरूर खड़े करता है। खासकर तब, जब अलग-अलग कार्यकाल में चार्टर्ड उड़ानों की संख्या और प्रति यात्रा खर्च में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
किस रेल मंत्री ने कितनी बार चार्टर्ड विमान लिया?
RTI में सामने आए प्रमुख आंकड़ों से तस्वीर कुछ इस तरह बनती है:
| रेल मंत्री | चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल | प्रमुख जानकारी |
|---|---|---|
| लालू प्रसाद यादव | 12 बार | सबसे ज्यादा यात्राएं |
| सुरेश प्रभु | 4 बार | करीब ₹3.01 करोड़ खर्च |
| पीयूष गोयल | 8 बार | 2018-2020 के बीच यात्राएं |
| अश्विनी वैष्णव | 1 बार | बालासोर हादसे के बाद भुवनेश्वर यात्रा |
| कुल रिकॉर्ड | 33 मौके | करीब ₹8.90 करोड़ खर्च |
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊपर दिए गए आंकड़े उपलब्ध RTI रिकॉर्ड में प्रमुख रूप से सामने आए मंत्रियों से संबंधित हैं। कुल रिकॉर्ड में रेल मंत्री और राज्य मंत्री स्तर के 11 लोग शामिल रहे।
क्या कहता है पूरा आंकड़ा?
रेल मंत्रियों की चार्टर्ड विमान यात्राओं का यह रिकॉर्ड दो अलग तस्वीरें दिखाता है। एक तरफ बड़े ट्रेन हादसों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में मंत्री का जल्द से जल्द घटनास्थल पर पहुंचना प्रशासनिक रूप से जरूरी हो सकता है। दूसरी तरफ, सार्वजनिक धन से होने वाले ऐसे खर्च की पारदर्शिता और जरूरत पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।
सबसे ज्यादा बार चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल लालू प्रसाद यादव ने किया, जबकि कुल खर्च में सुरेश प्रभु सबसे आगे रहे। वहीं मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में अब तक सिर्फ एक ऐसी यात्रा दर्ज है।
इस तरह RTI से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले करीब दो दशकों में रेलवे ने आपात और आधिकारिक यात्राओं के लिए चार्टर्ड विमानों पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। इन यात्राओं का बड़ा हिस्सा दुर्घटनाओं, आपदाओं और महत्वपूर्ण रेलवे कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है, लेकिन अलग-अलग मंत्रियों के कार्यकाल में खर्च और इस्तेमाल के पैटर्न में काफी अंतर रहा।


