बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान से बलूचिस्तान से सेना और सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील भी की है।
Pakistan-Balochistan Conflict: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बलूच अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान को नया अल्टीमेटम जारी करते हुए क्षेत्र से सेना और सुरक्षा बलों की वापसी की मांग की है। उन्होंने पाकिस्तान से सैन्य उपकरण भी बलूचिस्तान में छोड़कर जाने को कहा है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की है।
पाकिस्तानी सेना को बताया कब्जा करने वाली ताकत
मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में पाकिस्तान की सेना पर बलूचिस्तान में अवैध रूप से तैनात होने और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों तथा खनिजों का दोहन करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, सैन्य मौजूदगी से बलूचिस्तान के लोगों की जान, संपत्ति और कारोबार को खतरा पैदा हो रहा है।
बयान में पाकिस्तानी सेना को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाली ताकत बताया गया। मीर यार बलूच ने दावा किया कि क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी स्थानीय लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है और पाकिस्तान को अपनी सेनाएं वापस बुलानी चाहिए।
‘हथियार और सैन्य उपकरण भी यहीं छोड़कर जाएं’
बलूच नेता की मांग केवल सेना की वापसी तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना जब बलूचिस्तान से वापस जाए तो अपने सैन्य संसाधन भी वहीं छोड़कर जाए।
मांग में युद्धक विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, भारी तोपखाने, नौसैनिक पोत और दूसरे सैन्य उपकरण शामिल हैं। मीर यार बलूच का दावा है कि इन सैन्य संसाधनों की खरीद में बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से हासिल धन का इस्तेमाल हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने पाकिस्तान से इन उपकरणों को बलूच पक्ष को सौंपने की मांग की है।
1947 और 1971 का दिया उदाहरण
अपने बयान में मीर यार बलूच ने 1947 में ब्रिटिश शासन के भारत से जाने और 1971 के बांग्लादेश युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने इन ऐतिहासिक घटनाओं का उदाहरण देते हुए बलूचिस्तान से पाकिस्तानी सेना की वापसी की मांग को उचित ठहराने की कोशिश की।
उन्होंने पाकिस्तान से सेना की वापसी के लिए एक निश्चित तारीख और डेडलाइन घोषित करने को कहा। बयान में यह दावा भी किया गया कि पाकिस्तानी सेना को बलूचिस्तान छोड़ते समय सैन्य संसाधन अपने साथ नहीं ले जाने चाहिए।
हालांकि, बलूच नेता का यह दावा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में जमीनी युद्ध हार चुका है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया गया है।
1971 के बांग्लादेश संघर्ष से की तुलना
मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति की तुलना 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से की। उन्होंने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या और कथित अत्याचार करने के आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोग कथित घटनाओं को नहीं भूलेंगे। उनके मुताबिक, पाकिस्तान को संघर्ष जारी रखने के बजाय अपनी सेनाओं को वापस बुलाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र देश की मान्यता की अपील
मीर यार बलूच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य वापसी सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की।
उनकी मांग में पाकिस्तान की सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ-साथ सुरक्षा तथा सीमा निगरानी से जुड़े बलों की मौजूदगी खत्म करना शामिल है। उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात गैर-बलूच पाकिस्तानी नागरिकों से भी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों को छोड़ने का अल्टीमेटम दिया।
‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के ऐलान का दावा
यह बयान ऐसे समय आया है जब 11 अगस्त को बलूच अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के गठन की घोषणा किए जाने का दावा किया गया था। इन नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की पाकिस्तान से स्वतंत्रता को मान्यता देने की अपील की थी।
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। अलगाववादी संगठन पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं और इस्लामाबाद पर राजनीतिक उपेक्षा तथा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का आरोप लगाते हैं।
वहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) समेत अलगाववादी संगठन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमलों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में अभियान तेज किए हैं।
महत्वपूर्ण बात: बलूचिस्तान की स्वतंत्रता से जुड़े ये दावे अलगाववादी नेताओं के बयान हैं। इन्हें पाकिस्तान सरकार या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र बलूचिस्तान के गठन के रूप में नहीं देखा जा सकता।


