Dog Mask Video: मध्य प्रदेश के खंडवा में मंगलवार (18 अगस्त) को साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक मुल्लू राठौर एक ऐसे व्यक्ति को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिसने कुत्ते का मुखौटा पहन रखा था। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उनकी नसबंदी के लिए खर्च की जा रही सरकारी राशि को लेकर सवाल उठाए गए। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
कुत्ते का मास्क पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचा शख्स
मध्य प्रदेश : खंडवा में आवारा कुत्तों के आतंक से त्रस्त एक व्यक्ति कुत्ते का कॉस्ट्यूम पहनकर ही कलक्ट्रेट में पहुंच गया !! pic.twitter.com/5AK2SXkW3e
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 19, 2026 जनसुनवाई के दौरान कुत्ते का मास्क पहने व्यक्ति को देखकर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद अधिकारी और लोग हैरान रह गए। सुरक्षाकर्मियों ने शुरुआत में उसके पहनावे को देखते हुए उसे अंदर जाने से रोक दिया। हालांकि, नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक राठौर और अन्य नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उसे जनसुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी गई।
प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान में कथित अनियमितताओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी मौके पर जमा हो गए।
नसबंदी के नाम पर 40 लाख रुपये खर्च करने का दावा
दीपक राठौर ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उनका दावा है कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।
राठौर ने नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी राशि नसबंदी अभियान पर खर्च हुई है, तो इसका असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
13,225 डॉग बाइट मामलों का भी किया जिक्र
राठौर ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में कुत्तों के काटने के 13,225 मामले सामने आए हैं। उन्होंने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। ऐसे में नसबंदी अभियान पर खर्च होने वाली सरकारी राशि और उसके परिणामों की पारदर्शी तरीके से जांच जरूरी है।
ADM को सौंपा ज्ञापन, इन बिंदुओं पर जांच की मांग
दीपक राठौर ने मामले को लेकर अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) काशीराम बड़ोले को ज्ञापन सौंपा। इसमें आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत में मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच की मांग की गई है:
- नसबंदी अभियान के लिए टेंडर आवंटन की प्रक्रिया।
- संबंधित एजेंसी की पात्रता और चयन प्रक्रिया।
- नगर निगम की ओर से किए गए भुगतान के रिकॉर्ड।
- वास्तव में कितने कुत्तों की नसबंदी की गई, इसका भौतिक सत्यापन।
- नसबंदी अभियान से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच।
- यदि फर्जी बिलिंग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई।
राठौर ने मांग की है कि जांच में अनियमितता साबित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर समेत कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘सरकारी फंड के दुरुपयोग की जांच हो’
राठौर ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि अगर नसबंदी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि कुत्ते का मुखौटा पहनकर किया गया प्रदर्शन केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य आवारा कुत्तों के प्रबंधन और नसबंदी अभियान से जुड़े कथित वित्तीय सवालों को प्रशासन के सामने रखना था।
ADM ने जांच का दिया भरोसा
अपर जिला मजिस्ट्रेट काशीराम बड़ोले ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान कुछ लोग कुत्ते के मुखौटे पहनकर पहुंचे थे और उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए जारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आवेदन दिया।
ADM के मुताबिक, इस मामले में नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी गई है। उन्होंने मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने की बात भी कही। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नसबंदी अभियान में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी राशि का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनोखा प्रदर्शन
खंडवा कलेक्ट्रेट में कुत्ते का मास्क पहनकर किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में नजर आ रहे इस अनोखे तरीके ने लोगों का ध्यान आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान की ओर खींचा है।
फिलहाल प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच का भरोसा दिया है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा कि नसबंदी अभियान में वास्तव में कोई वित्तीय या तकनीकी अनियमितता हुई है या नहीं।


