Shiprocket IPO Listing: ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी शिपरॉकेट के शेयरों की आज घरेलू शेयर बाजार में शानदार एंट्री हुई। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त रिस्पांस मिला था और यह ओवरऑल 102.28 गुना सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ में शेयरों का इश्यू प्राइस ₹97 तय किया गया था। वहीं, लिस्टिंग के दिन BSE पर शेयर ₹129.50 और NSE पर ₹131 पर लिस्ट हुए।
इस तरह NSE पर निवेशकों को करीब 35% का लिस्टिंग गेन मिला। लिस्टिंग के बाद भी शेयर में तेजी जारी रही और BSE पर यह ₹135.08 के स्तर तक पहुंच गया। इस भाव पर आईपीओ निवेशकों का मुनाफा करीब 39.26% हो गया। वहीं, एंप्लॉयीज को इश्यू प्राइस पर ₹9 प्रति शेयर की छूट मिली थी, इसलिए उनके लिए शुरुआती रिटर्न और भी बेहतर रहा।
₹1,617 करोड़ का था Shiprocket IPO
शिपरॉकेट का ₹1,617 करोड़ का आईपीओ 12 अगस्त से 14 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। आईपीओ को सभी कैटेगरी के निवेशकों से जोरदार प्रतिक्रिया मिली।
कंपनी के आईपीओ का कुल सब्सक्रिप्शन 102.28 गुना रहा। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB का हिस्सा 125.20 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII का हिस्सा 92.58 गुना, रिटेल निवेशकों का हिस्सा 48.38 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 58.85 गुना सब्सक्राइब हुआ।
आईपीओ में ₹885 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 7,54,62,363 शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए हुई है। OFS से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाती, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरहोल्डर्स को मिलती है।
IPO से मिले पैसों का क्या करेगी कंपनी?
नए शेयरों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल शिपरॉकेट अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने में करेगी। कंपनी ने इसके लिए कई प्रमुख मद तय की हैं।
- ₹365.60 करोड़: उभरते और कोर बिजनेस वाले Shiprocket प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ में निवेश
- ₹205.80 करोड़: मार्केटिंग और ब्रांडिंग गतिविधियों पर खर्च
- ₹159.80 करोड़: टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी क्षमताओं को मजबूत करने में निवेश
- ₹210 करोड़: कंपनी का कर्ज कम करने में इस्तेमाल
- बची हुई रकम का इस्तेमाल इनऑर्गेनिक ग्रोथ और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
इससे साफ है कि कंपनी आईपीओ से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा बिजनेस विस्तार के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और कर्ज घटाने पर खर्च करने की तैयारी में है।
क्या करती है Shiprocket?
शिपरॉकेट एक भारतीय ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी है। यह MSMEs, D2C ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार को मैनेज करने तथा बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित समाधान उपलब्ध कराती है।
कंपनी ने शुरुआत में एक शिपिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम शुरू किया था। इसकी सेवाओं में घरेलू शिपिंग और शिपिंग सॉफ्टवेयर प्रमुख हैं। इनके जरिए कारोबारियों को ऑर्डर पिकअप, ट्रैकिंग, सुरक्षित डिलीवरी, वजन जांच और COD पेमेंट सेटलमेंट जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
समय के साथ कंपनी ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ाया है। अब यह कार्गो और फुलफिलमेंट सर्विसेज, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग सॉल्यूशंस, एडवर्टाइजिंग एवं मार्केटिंग सॉल्यूशंस और मर्चेंट सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराती है।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 146 देशों में ग्राहकों को सेवाएं दीं। इसका प्रमुख रेवेन्यू मॉडल यूजेज-बेस्ड प्राइसिंग पर आधारित है। यानी कारोबारी प्लेटफॉर्म का जितना इस्तेमाल करते हैं, उसी आधार पर भुगतान करते हैं। इसमें शिपमेंट की संख्या, ट्रांजैक्शन या प्रोसेस किए गए ऑर्डर्स की वैल्यू जैसे फैक्टर शामिल हो सकते हैं।
Redseer के मुताबिक मजबूत ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म
Redseer की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू के आधार पर शिपरॉकेट भारत का सबसे बड़ा न्यू-एज एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म था।
ई-कॉमर्स और D2C कारोबार के बढ़ते दायरे के बीच कंपनियों को लॉजिस्टिक्स, ऑर्डर मैनेजमेंट, फुलफिलमेंट और क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग जैसी सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिपरॉकेट का बिजनेस मॉडल इस सेक्टर की ग्रोथ से फायदा उठाने की स्थिति में है।
हालांकि, कंपनी के सामने प्रतिस्पर्धा और लगातार मुनाफे में आने की चुनौती भी बनी हुई है।
तीन साल से घाटे में है कंपनी
शिपरॉकेट की कारोबारी ग्रोथ के बावजूद कंपनी पिछले तीन वित्त वर्षों से लगातार घाटे में रही है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी को ₹595.18 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था।
वित्त वर्ष 2025 में घाटा काफी घटकर ₹74.45 करोड़ रह गया। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में यह थोड़ा बढ़कर ₹79.25 करोड़ हो गया।
दूसरी तरफ, कंपनी की टोटल इनकम में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह करीब 24% की सालाना CAGR से बढ़ते हुए वित्त वर्ष 2026 में ₹2,077.42 करोड़ तक पहुंच गई।
यानी कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी इसे लगातार और टिकाऊ मुनाफे में बदलने की चुनौती बनी हुई है।
कंपनी पर कितना कर्ज है?
मार्च 2026 तिमाही के अंत में शिपरॉकेट पर कुल करीब ₹242.01 करोड़ का कर्ज था। आईपीओ से मिलने वाली रकम में से ₹210 करोड़ कर्ज कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं।
अगर कंपनी कर्ज घटाने के साथ-साथ अपने ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार करती है और घाटे को कम करके मुनाफे की ओर बढ़ती है, तो आने वाले समय में उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर में आई तेजी के कारण निवेशकों के लिए कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन भी एक अहम फैक्टर रहेगा।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
Shiprocket IPO को जिस तरह का सब्सक्रिप्शन मिला, उससे कंपनी को लेकर निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी का पता चलता है। शानदार लिस्टिंग के बाद शेयर में और तेजी ने शुरुआती निवेशकों को अच्छा रिटर्न भी दिया है।
लेकिन केवल मजबूत लिस्टिंग और ज्यादा सब्सक्रिप्शन के आधार पर किसी शेयर के भविष्य का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। कंपनी अभी लगातार तीन वित्त वर्षों से घाटे में है। इसलिए निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में रेवेन्यू ग्रोथ, EBITDA और मुनाफे, कैश फ्लो, कर्ज और नए बिजनेस निवेश पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से अध्ययन करें और जरूरत पड़ने पर अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता।


