भारत ने नारियल उत्पादन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। देश वैश्विक नारियल उत्पादन में 31.24 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दुनिया में नंबर 1 बनकर उभरा है। हालांकि, नारियल की खेती के कुल क्षेत्रफल के मामले में भारत 17.90 फीसदी हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, देश में नारियल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने और निर्यात का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
HighLights
- भारत वैश्विक नारियल उत्पादन में 31.24 फीसदी हिस्सेदारी के साथ नंबर 1 है।
- 2024-25 में देश में 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन हुआ।
- तमिलनाडु नारियल उत्पादन में सबसे आगे है, जबकि आंध्र प्रदेश उत्पादकता के मामले में नंबर 1 है।
- केरल में देश में नारियल की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र है।
- सरकार नारियल क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योजनाओं के साथ मूल्यवर्धित उत्पादों और निर्यात को बढ़ावा दे रही है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश
नारियल भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका इस्तेमाल केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि तेल, दूध, कॉयर, एक्टिवेटेड कार्बन और कई अन्य उत्पादों में भी किया जाता है। इसी वजह से नारियल क्षेत्र किसानों के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और छोटे उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, वैश्विक नारियल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 31.24 फीसदी है। खेती के क्षेत्रफल की बात करें तो भारत की हिस्सेदारी 17.90 फीसदी है और इस आधार पर देश दुनिया में तीसरे स्थान पर है। यानी भारत अपेक्षाकृत कम क्षेत्र में भी बड़ी मात्रा में नारियल का उत्पादन करने में सक्षम है।
2024-25 में 20,301 मिलियन से ज्यादा नारियल का उत्पादन
भारत में 2024-25 के दौरान करीब 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती की गई। इस क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन हुआ। इस दौरान देश की औसत उत्पादकता करीब 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही।
ये आंकड़े बताते हैं कि नारियल उत्पादन में भारत की स्थिति केवल बड़े खेती क्षेत्र की वजह से मजबूत नहीं है, बल्कि उत्पादकता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। अलग-अलग राज्यों में जलवायु, मिट्टी, सिंचाई और खेती के तरीकों के आधार पर उत्पादकता में अंतर देखने को मिलता है।
किस राज्य में सबसे ज्यादा नारियल की खेती?
अगर नारियल की खेती के क्षेत्रफल की बात करें तो केरल सबसे आगे है। राज्य में करीब 7.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती होती है। यहां लगभग 5,149.87 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है।
केरल लंबे समय से देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है। राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में नारियल का महत्वपूर्ण योगदान है और बड़ी संख्या में किसान इस फसल पर निर्भर हैं।
नारियल उत्पादन में तमिलनाडु नंबर 1
क्षेत्रफल के मामले में केरल सबसे आगे है, लेकिन कुल नारियल उत्पादन के मामले में तमिलनाडु देश में नंबर 1 है। राज्य में नारियल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और आधुनिक कृषि तकनीकों तथा बेहतर उत्पादकता के कारण इसका उत्पादन काफी अधिक है।
तमिलनाडु के बाद अन्य प्रमुख राज्यों का भी देश के कुल नारियल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। इससे साफ है कि भारत में नारियल उत्पादन कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्य इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उत्पादकता में आंध्र प्रदेश सबसे आगे
नारियल उत्पादन और खेती के क्षेत्रफल से अलग अगर प्रति हेक्टेयर उत्पादकता की बात करें तो आंध्र प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का स्थान आता है।
इससे यह भी पता चलता है कि बड़े क्षेत्र में खेती करना ही ज्यादा उत्पादन की गारंटी नहीं है। बेहतर किस्म के पौधे, सिंचाई, वैज्ञानिक खेती, पोषक तत्वों का सही इस्तेमाल और बागानों का बेहतर रखरखाव उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नए इलाकों में भी बढ़ाई जा रही नारियल की खेती
सरकार नारियल की खेती के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है। 2024-25 के दौरान देश में करीब 2,979 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को नई नारियल खेती के तहत लाने के लिए लगभग 209.24 लाख रुपये का इस्तेमाल किया गया।
इस पहल से देश के अलग-अलग राज्यों के करीब 13,068 किसानों को फायदा मिला। इसका उद्देश्य खेती का क्षेत्र बढ़ाने के साथ आने वाले वर्षों में नारियल के उत्पादन की क्षमता को मजबूत करना है।
वहीं, 2025-26 में नारियल के बागानों की स्थापना और उनके रखरखाव के लिए 632.77 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इससे नए बागान तैयार करने के साथ मौजूदा बागानों की उत्पादकता और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब सिर्फ नारियल बेचने पर नहीं, वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर जोर
भारत का नारियल कारोबार अब केवल कच्चे या पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह गया है। देश के निर्यात पोर्टफोलियो में वर्जिन नारियल तेल, नारियल दूध और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
मूल्यवर्धित उत्पादों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों और उद्योगों को कच्चे नारियल की तुलना में तैयार उत्पाद से ज्यादा आर्थिक मूल्य हासिल करने का अवसर मिलता है। इससे प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े रोजगार भी बढ़ सकते हैं।
सरकार का फोकस इसी पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर है, ताकि नारियल उत्पादक किसानों को केवल खेती से ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग और बाजार से भी ज्यादा फायदा मिल सके।
नारियल विकास बोर्ड के जरिए सरकार की कई योजनाएं
नारियल क्षेत्र को मजबूत करने में नारियल विकास बोर्ड (CDB) की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार की ओर से बोर्ड के माध्यम से नारियल की खेती, बागानों के विकास, उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को सहायता देने से जुड़ी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
2025-26 में नारियल विकास बोर्ड की गतिविधियों के लिए 147.21 करोड़ रुपये जारी किए गए। इन पहलों का उद्देश्य देश में नारियल उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर बाजार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।
बजट में भी नारियल क्षेत्र पर खास फोकस
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में नारियल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नारियल संवर्धन योजना शुरू की है। इसका फोकस स्थिरता, निर्यात और किसानों की आय को मजबूत करने पर है।
सरकार की रणनीति में नारियल की खेती के विस्तार के अलावा पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना शामिल है। इसके तहत किसानों के लिए उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, कौशल विकास, उद्यमिता और निर्यात तक के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
कोपरा पर किसानों को MSP का सहारा
नारियल क्षेत्र के लिए सरकार की नीति में कोपरा यानी सूखी हुई नारियल की गिरी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP भी शामिल है। कोपरा उन 22 अनिवार्य कृषि फसलों में शामिल है, जिन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत कवर किया जाता है।
MSP व्यवस्था किसानों को बाजार में कीमतों में गिरावट के दौरान एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। इसके अलावा लक्षित विकास योजनाओं और कौशल विकास के जरिए किसानों तथा इस क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है नारियल क्षेत्र
भारत का दुनिया में सबसे बड़ा नारियल उत्पादक बनना केवल कृषि उत्पादन का आंकड़ा नहीं है। इसका सीधा संबंध लाखों किसानों, ग्रामीण रोजगार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से है।
अगर देश में नारियल की उत्पादकता बढ़ती है और मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन एवं निर्यात और मजबूत होता है, तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। साथ ही नारियल आधारित उद्योगों में रोजगार और छोटे कारोबार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, भारत ने नारियल उत्पादन में दुनिया में नंबर 1 स्थान हासिल कर अपनी कृषि क्षमता का प्रदर्शन किया है। केरल खेती के क्षेत्रफल में सबसे आगे है, तमिलनाडु कुल उत्पादन में नंबर 1 है और आंध्र प्रदेश उत्पादकता के मामले में शीर्ष पर है। अब सरकार की कोशिश उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ नारियल को मूल्यवर्धित उत्पादों और निर्यात के जरिए किसानों के लिए ज्यादा कमाई वाला क्षेत्र बनाने की है।


