EMS Stocks: इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के पांचवें चरण को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस चरण में कुल 7,877 करोड़ रुपये के 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। खबर सामने आने के बाद Syrma SGS Technology और PCBL Chemical समेत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के शेयर फोकस में आ गए हैं।
सरकार के मुताबिक, ECMS के तहत अब तक पांच चरणों में कुल 106 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। पांचवें चरण के प्रस्तावों के जरिए देश में करीब 82,243 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार का जोर भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने पर है।
ECMS के पांचवें चरण में 31 प्रस्ताव मंजूर
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के पांचवें चरण में सरकार ने 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों के तहत अलग-अलग कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और संबंधित उत्पादों के निर्माण में निवेश करेंगी।
मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्तावों में Wipro Global Engineering को 1,401 करोड़ रुपये, Micromax Precision Molding को 565 करोड़ रुपये, PCBL Chemical को 329 करोड़ रुपये और Minda Instrument को 270 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी शामिल है।
इसके अलावा Centum Electronics को 106 करोड़ रुपये के दो निवेश प्रस्तावों की मंजूरी मिली है। VVDN Technologies को 100 करोड़ रुपये और Mitsubishi Electric को 99 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी मिली है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कंपनियों को मंजूरी के प्रमाण पत्र दिए। उन्होंने कहा कि ECMS ने निजी निवेश को आकर्षित किया है और योजना के शुरुआती लक्ष्यों को पार किया है।
पहले चार चरणों में क्या हुआ?
ECMS के पहले चार चरणों में अब तक 75 कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन चरणों में भारत में 23 अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उत्पादन को मंजूरी मिली है।
इनमें PCB, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैमरा मॉड्यूल और ट्रांजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं। पहले चार चरणों के तहत कंपनियों को करीब 61,671 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की मंजूरी मिली है।
सरकार ने ECMS के लिए शुरुआत में 59,350 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 4.56 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य रखा था। सरकार के अनुसार, योजना इन निर्धारित लक्ष्यों को पार कर चुकी है।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए क्यों अहम है ECMS?
भारत में स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य हाई-टेक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए देश अभी भी आयात पर निर्भर है।
ECMS का उद्देश्य इसी निर्भरता को कम करना है। सरकार घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहन देकर PCB, कैमरा मॉड्यूल, सेमीकंडक्टर से जुड़े कंपोनेंट्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना चाहती है।
इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन बढ़ सकती है और एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कारोबार और कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
Syrma SGS Technology के शेयर में तेजी
ECMS के पांचवें चरण में मंजूरी मिलने की खबर का असर Syrma SGS Technology के शेयर पर भी देखने को मिला। कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS सेक्टर में काम करती है।
मंगलवार के कारोबार में शेयर में तेजी रही। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, स्टॉक करीब 2.08% की बढ़त के साथ 1,498 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर ने 1,521 रुपये का हाई और 1,488.90 रुपये का लो बनाया।
कंपनी के शेयर का 52-वीक हाई करीब 1,543 रुपये है। ECMS जैसी सरकारी योजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने की उम्मीद के कारण Syrma SGS Technology जैसे EMS स्टॉक्स पर बाजार की नजर बनी हुई है।
PCBL Chemical के शेयर भी चढ़े
PCBL Chemical के शेयर में भी ECMS से जुड़ी खबर के बाद मजबूती देखने को मिली। कंपनी को पांचवें चरण में 329 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की मंजूरी मिली है।
मंगलवार को PCBL Chemical का शेयर करीब 1.03% की तेजी के साथ 319 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान स्टॉक ने 325.85 रुपये का इंट्राडे हाई बनाया।
PCBL Chemical के शेयर का 52-वीक हाई 425.95 रुपये और 52-वीक लो 226.50 रुपये रहा है।
EMS Stocks में आगे भी रह सकता है फोकस
ECMS के विस्तार से भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार जिस तरह घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और इलेक्ट्रॉनिक्स में आयात निर्भरता घटाने पर जोर दे रही है, उससे EMS और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट सेक्टर की कंपनियां बाजार के रडार पर रह सकती हैं।
हालांकि, किसी भी शेयर में तेजी को केवल सरकारी मंजूरी के आधार पर निवेश का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की ऑर्डर बुक, आय, मार्जिन, कर्ज, वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


