Shanghai Cost of Living: चीन को अक्सर भारत की तुलना में कम खर्च वाला देश माना जाता है, लेकिन शंघाई जैसे बड़े और ग्लोबल शहर में रहने का खर्च इस धारणा को काफी हद तक बदल सकता है। शंघाई में रहने वाली एक भारतीय महिला ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार के एक महीने के खर्च का पूरा हिसाब साझा किया है। चार सदस्यों वाले इस परिवार का कुल मासिक खर्च करीब ₹9.82 लाख है। सबसे ज्यादा रकम घर के किराए और बच्चों की पढ़ाई पर खर्च होती है।
महिला के मुताबिक, परिवार के दोनों बच्चों की पढ़ाई और घर के किराए पर ही हर महीने करीब ₹7 लाख खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा राशन, घरेलू मदद, बिजली-पानी, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, बच्चों की एक्स्ट्रा एक्टिविटीज, बाहर खाना और शॉपिंग जैसे खर्च भी बजट का हिस्सा हैं।
हालांकि, इस खर्च को शंघाई में रहने वाले हर परिवार का औसत खर्च नहीं माना जा सकता। यह परिवार की जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, रहने की जगह और लाइफस्टाइल पर आधारित व्यक्तिगत बजट है।
शंघाई में घर के किराए पर ₹3.5 लाख हर महीने
अदिति शर्मा के मुताबिक, उनका परिवार शंघाई के डाउनटाउन इलाके में रहता है। शहर के इस प्रमुख इलाके में घर लेने के लिए परिवार को हर महीने करीब 25,000 युआन, यानी लगभग ₹3.5 लाख किराया देना पड़ता है।
शंघाई चीन का एक प्रमुख आर्थिक और कारोबारी केंद्र है। शहर के केंद्रीय और प्रीमियम इलाकों में अच्छी लोकेशन वाले घरों का किराया सामान्य इलाकों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में इस परिवार के कुल मासिक बजट में मकान का किराया सबसे बड़ा खर्च बन जाता है।
यानी परिवार के करीब साढ़े तीन लाख रुपये सिर्फ इस बात पर खर्च हो रहे हैं कि उन्हें शहर के डाउनटाउन इलाके में रहने के लिए घर उपलब्ध हो।
दो बच्चों की पढ़ाई पर भी ₹3.5 लाख खर्च
परिवार के दो बच्चे इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों बच्चों की स्कूल फीस पर हर महीने करीब 25,000 युआन यानी ₹3.5 लाख खर्च होते हैं।
यहीं से इस परिवार के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा सामने आता है। घर का किराया करीब ₹3.5 लाख और बच्चों की स्कूल फीस करीब ₹3.5 लाख है। दोनों को जोड़ने पर यह रकम लगभग ₹7 लाख प्रति माह हो जाती है।
इसका मतलब है कि परिवार के करीब ₹9.82 लाख के कुल मासिक बजट का अधिकांश हिस्सा सिर्फ दो मदों में चला जाता है—रहने की जगह और बच्चों की शिक्षा।
राशन पर हर महीने करीब ₹70,750
घर चलाने के लिए रोजमर्रा के सामान का खर्च भी कम नहीं है। अदिति ने बताया कि उनके परिवार का ग्रॉसरी यानी राशन का खर्च करीब 5,000 युआन, यानी लगभग ₹70,750 प्रति माह है।
चार सदस्यों वाले परिवार के लिए इसमें खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी खरीदारी शामिल है। शंघाई जैसे बड़े महानगर में स्थानीय सामान और सामान्य जरूरतों की कीमतें अलग हो सकती हैं, जबकि विदेशी या प्रीमियम उत्पादों पर खर्च और बढ़ सकता है।
घरेलू मदद पर ₹1 लाख से ज्यादा
परिवार घरेलू मदद के लिए भी हर महीने करीब ₹1 लाख से ज्यादा खर्च करता है। यह खर्च भी कुल बजट में एक बड़ा हिस्सा जोड़ देता है।
बड़े शहरों में घरेलू सेवाओं की लागत काम के प्रकार, समय और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। अदिति के परिवार के मामले में घरेलू मदद पर होने वाला मासिक खर्च भारत के कई शहरों में इसी तरह की सेवाओं की तुलना में लोगों को काफी ज्यादा लगा।
बिजली-पानी और दूसरी सुविधाओं पर ₹21 हजार से ज्यादा
घर के किराए के अलावा घर से जुड़े दूसरे बिल भी हर महीने आते हैं। अदिति के मुताबिक, बिजली-पानी और दूसरी सुविधाओं पर करीब ₹21,230 खर्च होते हैं।
यह खर्च किराए की तुलना में छोटा दिखाई देता है, लेकिन जब राशन, स्कूल, घरेलू मदद और अन्य मदों के साथ जोड़ा जाता है तो कुल मासिक बजट काफी बड़ा हो जाता है।
आने-जाने के लिए करीब ₹10 हजार
परिवार पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी इस्तेमाल करता है। इसके लिए हर महीने करीब ₹10,000 का बजट बताया गया है।
शंघाई में मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ते हैं। ऐसे में कार रखने और उससे जुड़े खर्चों की तुलना में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प कुछ परिवारों के लिए सुविधाजनक हो सकता है।
बच्चों की एक्टिविटीज और मनोरंजन का भी बजट
परिवार सिर्फ जरूरी खर्चों तक सीमित नहीं है। बच्चों के मनोरंजन और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज के लिए भी हर महीने करीब ₹21,230 अलग रखे जाते हैं।
बच्चों की पढ़ाई के अलावा उनकी हॉबी, स्पोर्ट्स, क्लास, मनोरंजन और दूसरी गतिविधियों पर होने वाला खर्च भी परिवार के बजट को प्रभावित करता है। इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के मामले में ऐसी अतिरिक्त गतिविधियां भी कुल लाइफस्टाइल खर्च का हिस्सा बन सकती हैं।
बाहर खाना और शॉपिंग पर करीब ₹56,650
परिवार के बजट में बाहर खाना और शॉपिंग भी शामिल है। इस मद पर हर महीने करीब ₹56,650 खर्च होते हैं।
यानी परिवार का करीब ₹9.82 लाख का मासिक खर्च सिर्फ जरूरी बिलों तक सीमित नहीं है। इसमें बच्चों की गतिविधियां, बाहर खाना और खरीदारी जैसे लाइफस्टाइल खर्च भी शामिल हैं।
कुल मासिक खर्च करीब ₹9.82 लाख
अदिति द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, परिवार का पूरा मासिक बजट करीब ₹9,81,860 है। मोटे तौर पर खर्च का बड़ा हिस्सा इस तरह समझा जा सकता है—
| खर्च की मद | अनुमानित मासिक खर्च |
|---|---|
| घर का किराया | ₹3.5 लाख |
| बच्चों की स्कूल फीस | ₹3.5 लाख |
| राशन/ग्रॉसरी | ₹70,750 |
| घरेलू मदद | ₹1 लाख से अधिक |
| बिजली-पानी और सुविधाएं | ₹21,230 |
| पब्लिक ट्रांसपोर्ट | ₹10,000 |
| बच्चों की एक्टिविटीज/मनोरंजन | ₹21,230 |
| बाहर खाना और शॉपिंग | ₹56,650 |
| कुल | करीब ₹9.82 लाख |
इन आंकड़ों से साफ है कि इस परिवार के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा हाउसिंग और एजुकेशन पर जा रहा है।
अदिति ने कहा- इसे चीन का सामान्य खर्च न समझें
अदिति ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके द्वारा साझा किया गया बजट शंघाई में रहने वाले हर परिवार का सामान्य मासिक खर्च नहीं है। यह उनके परिवार की जरूरतों और लाइफस्टाइल पर आधारित व्यक्तिगत खर्च है।
उनके मुताबिक, उन्हें और उनके पति को किसी तरह का एक्सपैट अलाउंस नहीं मिलता। हालांकि, उनका मेडिकल इंश्योरेंस इलाज का 100 फीसदी खर्च कवर करता है।
अदिति खुद को एक होममेकर बताती हैं और साथ ही कंटेंट क्रिएटर के तौर पर अपना करियर बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए उनके परिवार की परिस्थितियां दूसरे भारतीय परिवारों से अलग हो सकती हैं।
क्या चीन वाकई भारत से महंगा है?
अदिति की कहानी के बाद सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर हुई कि आखिर चीन भारत की तुलना में सस्ता है या महंगा।
इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि किसी देश में रहने की लागत शहर, इलाके, घर के आकार, बच्चों की शिक्षा, स्थानीय या इंटरनेशनल स्कूल, खाने की आदतों और लाइफस्टाइल पर काफी निर्भर करती है।
चीन के कुछ शहरों और क्षेत्रों में रोजमर्रा की कई चीजें किफायती हो सकती हैं। लेकिन शंघाई, बीजिंग और शेनझेन जैसे बड़े और अंतरराष्ट्रीय शहरों में प्रीमियम आवास, इंटरनेशनल स्कूल और खास लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च काफी ज्यादा हो सकते हैं।
यही वजह है कि किसी एक परिवार के ₹9.82 लाख के मासिक खर्च के आधार पर पूरे चीन को महंगा या सस्ता कहना सही नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
अदिति के खर्च का हिसाब सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने कहा कि शंघाई जैसे शहर में इंटरनेशनल स्कूल और महंगे इलाके में रहने पर इतना खर्च होना असामान्य नहीं है।
एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह रकम उसके पूरे साल के खर्च और बच्चों की फीस के बराबर है। वहीं, कुछ लोगों ने चीन को सस्ता मानने की धारणा पर सवाल उठाया।
एक अन्य यूजर ने कहा कि चीन कई जगहों पर किफायती हो सकता है, लेकिन शंघाई, बीजिंग और शेनझेन जैसे बड़े शहरों की तस्वीर अलग है। बीजिंग में रहने का अनुभव साझा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि चीन को सस्ता समझकर आने के बाद उसे महसूस हुआ कि वहां कई चीजें उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा महंगी हैं।
असली तस्वीर लाइफस्टाइल पर निर्भर
अदिति की कहानी से एक अहम बात सामने आती है कि किसी शहर की कॉस्ट ऑफ लिविंग सिर्फ खाने-पीने या स्थानीय सामान की कीमत से तय नहीं होती। अगर कोई परिवार प्रीमियम इलाके में घर लेता है, बच्चों को इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाता है, घरेलू मदद रखता है और मनोरंजन व शॉपिंग पर भी खर्च करता है तो उसका मासिक बजट काफी तेजी से बढ़ सकता है।
इस मामले में करीब ₹9.82 लाख के खर्च को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि शंघाई में हर परिवार को इतना ही पैसा चाहिए। बल्कि यह एक ऐसे परिवार का उदाहरण है जिसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं डाउनटाउन में रहना और बच्चों की इंटरनेशनल शिक्षा हैं।
इसलिए अगर कोई भारतीय शंघाई में रहने की योजना बना रहा है, तो उसे सिर्फ किराए या खाने के खर्च को देखकर बजट नहीं बनाना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्ट, घरेलू सेवाओं और अपनी लाइफस्टाइल को शामिल करके ही वास्तविक मासिक खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है।


