Taxation & Other Laws Amendment Act 2026: केंद्र सरकार ने टैक्स और बिजनेस से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करते हुए Taxation & Other Laws (Amendment) Act, 2026 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में 4 अगस्त को पेश किए गए इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी 17 अगस्त 2026 को मिल गई। इसके साथ ही यह कानून बन गया है।
इस नए कानून में Payment and Settlement Systems Act, Income Tax Act और Finance Act से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसका असर खास तौर पर UPI पेमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डायमंड कारोबार और विदेशी निवेश से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ने वाला है।
सबसे ज्यादा चर्चा UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर है। नए कानून ने UPI पर MDR लगाने का कानूनी रास्ता जरूर खोल दिया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अब UPI पेमेंट पर तत्काल कोई चार्ज लगने जा रहा है। सरकार ने फिलहाल UPI को मुफ्त ही रखा है।
नए टैक्स कानून में क्या-क्या बदला?
नए कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका असर आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों और विदेशी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। आइए एक-एक करके समझते हैं कि इस कानून में क्या बदलाव किए गए हैं।
1. UPI पर MDR का रास्ता खुला, लेकिन अभी पेमेंट फ्री
UPI को लेकर सबसे बड़ा बदलाव Merchant Discount Rate (MDR) से जुड़ा है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि सरकार UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की अनुमति दे सकती है।
नए कानून में Payment and Settlement Systems Act में संशोधन किया गया है। इससे भविष्य में UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का कानूनी रास्ता खुल गया है।
हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी UPI पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है और न ही इसकी कोई दर तय की गई है।
यानी आम ग्राहक जिस तरह अभी UPI के जरिए दुकानदार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसी अन्य कारोबारी को भुगतान कर रहा है, फिलहाल उसके लिए व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है। UPI पेमेंट अभी भी मुफ्त है।
सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि अगर भविष्य में MDR लागू करने का फैसला लिया जाता है तो आम लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। इसलिए नए कानून को UPI पर तत्काल चार्ज लगाने वाला कानून समझना सही नहीं होगा।
कारोबारियों पर क्या असर होगा?
MDR का मुद्दा मुख्य रूप से व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो इसके तहत डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों पर शुल्क का असर पड़ सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में MDR लागू किया जाएगा या नहीं, और यदि किया गया तो इसकी दर कितनी होगी। इसलिए फिलहाल कारोबारियों के लिए UPI पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल बदलाव नहीं है।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 10 साल तक टैक्स इंसेंटिव
नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी बड़ा प्रावधान किया गया है। सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक सामानों के उत्पादन को बढ़ावा देने और Make in India को मजबूत करने के लिए टैक्स इंसेंटिव की अवधि बढ़ा दी है।
पहले यह प्रोत्साहन FY2030-31 तक उपलब्ध था। अब इसकी अवधि बढ़ाकर FY2040-41 तक कर दी गई है।
इसका मतलब है कि पात्र इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कारोबारियों को लंबे समय तक टैक्स से जुड़े प्रोत्साहनों का लाभ मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य देश में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन को भारत में मजबूत करना है।
इस दायरे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल्स और हियरएबल्स जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं।
भारत पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। ऐसे में लंबी अवधि के टैक्स इंसेंटिव से कंपनियों को भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई निवेश योजनाएं बनाने में मदद मिल सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी राहत
नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन से जुड़ी पात्र विदेशी कंपनियों के लिए भी टैक्स राहत का प्रावधान किया गया है।
इन कंपनियों को कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउसिंग से जुड़े कुछ टैक्स लाभ मिलेंगे। इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को अधिक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाना है।
3. डायमंड कारोबारियों को बड़ी राहत, 2040-41 तक टैक्स छूट
नए टैक्स कानून में डायमंड सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। खास तौर पर भारत में रफ डायमंड के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए योग्य विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत देने की व्यवस्था की गई है।
1 अक्टूबर 2026 से नोटिफाइड स्पेशल जोन्स में काम करने वाली पात्र विदेशी कंपनियों को रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स छूट दी जाएगी।
यह लाभ FY2040-41 तक जारी रहने का प्रावधान है।
भारत का डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग दुनियाभर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। खास तौर पर सूरत डायमंड प्रोसेसिंग और ट्रेडिंग का बड़ा केंद्र है। ऐसे में रफ डायमंड कारोबार से जुड़ी विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत मिलने से भारत में इस कारोबार को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड के लिए और मजबूत केंद्र बनाना है। लंबे समय की टैक्स छूट विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार स्थापित करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
4. विदेशी निवेशकों के लिए नियम होंगे आसान
नए कानून में विदेशी निवेश से जुड़े कुछ प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है। इसका उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी और निवेश को आकर्षित करना है।
योग्य फंड्स के लिए इंडियन पार्टिसिपेशन की 5 फीसदी सीमा से जुड़ी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही नए फंड्स के लिए ₹25 करोड़ तक की विशेष राहत का प्रावधान भी किया गया है।
सरकार की कोशिश है कि विदेशी फंड्स के लिए भारत में निवेश और कारोबार से जुड़े टैक्स नियम अधिक स्पष्ट और आसान हों।
इसके अलावा Foreign Institutional Investors (FIIs) और Bank for International Settlements (BIS) से जुड़े ब्याज और कैपिटल गेन्स पर भी टैक्स से संबंधित राहत के प्रावधान किए गए हैं।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
नए कानून के ज्यादातर प्रावधान सीधे आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करते। UPI को लेकर जरूर बड़ी चर्चा है, लेकिन फिलहाल आम लोगों के लिए इसमें कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।
UPI पेमेंट अभी भी मुफ्त है। केवल कानून में भविष्य में MDR लागू किए जाने की संभावना के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।
वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में लंबी अवधि के टैक्स इंसेंटिव का अप्रत्यक्ष फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है। यदि भारत में उत्पादन और कंपोनेंट सप्लाई चेन बढ़ती है तो लंबे समय में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और उपलब्धता मजबूत हो सकती है।
कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून?
कारोबारियों के नजरिए से देखें तो यह कानून कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। UPI के मामले में भविष्य में MDR से जुड़े बदलावों की संभावना खुली है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और डायमंड सेक्टर को लंबे समय के लिए टैक्स प्रोत्साहन दिया गया है।
इससे कंपनियों को निवेश और विस्तार की लंबी अवधि की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 2040-41 तक इंसेंटिव जारी रहने से भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनियों को ज्यादा स्पष्टता मिलती है।
UPI पर अभी कोई चार्ज नहीं, यह बात समझना जरूरी
Taxation & Other Laws Amendment Act, 2026 को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम UPI MDR को लेकर हो सकता है। इसलिए इसे साफ तौर पर समझना जरूरी है।
नए कानून ने MDR लगाने का रास्ता खोला है, लेकिन MDR लगाया नहीं है।
न तो अभी कोई MDR दर घोषित हुई है और न ही आम लोगों से UPI भुगतान के लिए कोई नया शुल्क लिया जा रहा है। इसलिए UPI यूजर्स के लिए फिलहाल पहले जैसी ही व्यवस्था जारी है।
भविष्य में यदि सरकार MDR लागू करने का फैसला करती है तो उसकी दर, भुगतान का तरीका और इसका बोझ किस पर पड़ेगा, इन सबकी जानकारी उस समय सामने आएगी।
निष्कर्ष
Taxation & Other Laws (Amendment) Act, 2026 भारत के टैक्स और बिजनेस नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस कानून के जरिए सरकार ने एक तरफ UPI पर MDR लागू करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया है, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल डिजिटल भुगतान को मुफ्त रखा है।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स इंसेंटिव को FY2040-41 तक बढ़ाना, रफ डायमंड कारोबार से जुड़ी पात्र विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत देना और विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।
आम UPI यूजर के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि UPI पेमेंट पर अभी कोई नया चार्ज नहीं लगा है। वहीं कारोबारियों और कंपनियों के लिए यह कानून आने वाले वर्षों में निवेश, टैक्स प्लानिंग और कारोबार के विस्तार को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।


