Electronics Manufacturing: भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए देश में करीब ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होने के साथ-साथ कई कंपनियों के कारोबार को भी फायदा मिलने की संभावना है।
इस घोषणा के बाद Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS समेत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के फोकस में रह सकती हैं। हालांकि, किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना जरूरी है।
ECMS के तहत 31 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
केंद्र सरकार ने ECMS के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इन निवेशों से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
MeitY के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, नए प्रोजेक्ट्स देश के 10 राज्यों में लगाए जाएंगे। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए जरूरी कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट और मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद शामिल हैं।
सरकार का फोकस केवल अंतिम इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट का घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने पर भी है। इससे मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सेक्टर के लिए स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करने में मदद मिल सकती है।
ECMS का कुल निवेश लक्ष्य भी पार
नए प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद ECMS के तहत मंजूर कुल निवेश बढ़कर ₹69,548 करोड़ हो गया है। खास बात यह है कि यह रकम स्कीम के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के निवेश लक्ष्य से ज्यादा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, अब तक ECMS के तहत 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 38 प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि 16 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण कार्य चल रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि स्कीम के तहत मंजूर परियोजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई प्रोजेक्ट्स में वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं।
Wipro समेत इन कंपनियों को मिला प्रोजेक्ट
सरकार की मंजूरी पाने वाली प्रमुख कंपनियों में कई नाम ऐसे हैं जो शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। इनके प्रोजेक्ट्स से संबंधित निवेश बाजार की नजर में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार से इनके कारोबार के नए अवसर खुल सकते हैं।
| कंपनी | मंजूर निवेश |
|---|---|
| Wipro Global Engineering | ₹1,401 करोड़ |
| Micromax Precision Moulding | ₹565 करोड़ |
| PCBL Chemical | ₹329 करोड़ |
| Minda Instrument | ₹270 करोड़ |
| Centum Electronics (दो प्रोजेक्ट) | ₹106 करोड़ |
| VVDN Technologies | ₹100 करोड़ |
| Mitsubishi Electric | ₹99 करोड़ |
| Syrma SGS | ₹60 करोड़ |
इनमें Wipro Global Engineering के लिए मंजूर ₹1,401 करोड़ का निवेश सबसे ज्यादा है। इसके अलावा PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसी कंपनियां भी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट इकोसिस्टम से जुड़ी हैं।
हालांकि, किसी कंपनी को सरकारी योजना के तहत प्रोजेक्ट मिलना अपने आप में शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है। निवेशकों को कंपनी के ऑर्डर बुक, मार्जिन, कर्ज, कैश फ्लो और भविष्य की कमाई की संभावनाओं को भी देखना चाहिए।
किन-किन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स का होगा उत्पादन?
ECMS के तहत मंजूर परियोजनाओं का दायरा काफी बड़ा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए जरूरी कई तरह के कंपोनेंट शामिल हैं।
सरकार ने कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल से जुड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा कैपिटल गुड्स और एनोड मटेरियल जैसे उत्पाद भी योजना का हिस्सा हैं।
अन्य मंजूर कैटेगरी में शामिल हैं:
- कनेक्टर्स
- स्पीकर्स
- माइक्रोफोन
- एंटेना
- कैपेसिटर
- फिल्टर
- रेयर अर्थ मैग्नेट
- कॉपर-क्लैड लैमिनेट
- अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट
इन कंपोनेंट्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेलीकॉम उपकरण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और औद्योगिक उपकरणों में होता है।
10 राज्यों में लगाए जाएंगे प्रोजेक्ट
MeitY सचिव एस. कृष्णन के मुताबिक, नए प्रोजेक्ट्स को देश के 10 राज्यों में स्थापित किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहे और अलग-अलग राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित हो।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ सप्लायर, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और दूसरे सहायक उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है।
भारत पहले से ही मोबाइल फोन असेंबली और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देकर सरकार वैल्यू चेन के अगले चरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हर हफ्ते या 10 दिन में हो रही मंजूरी बैठकें
MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि इंडस्ट्री की तरफ से ECMS को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी वजह से सरकार लगभग हर हफ्ते या 10 दिन में मंजूरी बैठकें कर रही है।
जिन कैटेगरी के लिए आवेदन खुले हैं, उनमें कंपनियां जुलाई 2027 तक आवेदन कर सकती हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में इस स्कीम के तहत और भी नए निवेश प्रस्ताव सामने आ सकते हैं।
सरकार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश कर रही हैं। भारत इस अवसर का फायदा उठाकर घरेलू कंपोनेंट निर्माण को बढ़ाना चाहता है।
Tata Electronics, Dixon और Kaynes के प्रोजेक्ट्स भी आगे बढ़े
ECMS के तहत पहले मंजूर किए गए कई प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। कुछ परियोजनाएं जल्द ही कमर्शियल प्रोडक्शन के चरण तक पहुंच सकती हैं।
इनमें Tata Electronics का होसुर प्लांट, Dixon Technologies का नोएडा प्रोजेक्ट और Kaynes का चेन्नई के पास PCB प्लांट शामिल हैं।
इसके अलावा Motherson का कांचीपुरम प्लांट और Wipro का लैमिनेट प्लांट भी प्रगति पर बताए गए हैं।
इन परियोजनाओं के चालू होने से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट की घरेलू उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को स्थानीय स्तर पर इनपुट मिलने और सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस सिर्फ निवेश पर नहीं, गुणवत्ता पर भी
अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ECMS के तहत निवेश का लक्ष्य पार हो चुका है, लेकिन भारत को अभी घरेलू डिजाइन क्षमता और स्वदेशी सप्लाई चेन के क्षेत्र में और काम करने की जरूरत है।
सरकार मैन्युफैक्चरिंग में उच्च गुणवत्ता मानकों को अपनाने पर भी जोर दे रही है। इसी संदर्भ में Six Sigma जैसे क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम का उल्लेख किया गया है।
Six Sigma एक ऐसी गुणवत्ता प्रबंधन पद्धति है जिसका उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया में गलतियों और दोषों को बेहद कम करना होता है। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारतीय कंपनियों के लिए उत्पादन की गुणवत्ता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होगी।
ECMS का बजट बढ़कर ₹40,000 करोड़
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ECMS के लिए आवंटन को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है। इससे सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर लंबे समय के फोकस का पता चलता है।
इस स्कीम को मार्च 2025 में मंजूरी दी गई थी। सरकार का बड़ा लक्ष्य है कि 2030 तक भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
अगर यह लक्ष्य हासिल होता है तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी को काफी बढ़ा सकता है।
शेयर बाजार के लिए क्या है मायने?
ECMS के तहत लगातार नए निवेश आने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए लंबी अवधि में नए कारोबार के अवसर बन सकते हैं। सरकारी प्रोत्साहन से उत्पादन क्षमता बढ़ने, नए ऑर्डर मिलने और घरेलू सप्लाई चेन विकसित होने की संभावना है।
Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसे नाम इसलिए बाजार की नजर में रह सकते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि किसी सरकारी योजना की घोषणा या मंजूरी का असर हर कंपनी पर समान नहीं होता।
किसी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, प्रोजेक्ट की टाइमलाइन, संभावित रेवेन्यू और मार्जिन पर असर जैसे पहलुओं की जांच करना जरूरी है।
निष्कर्ष
ECMS के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण कदम है। कुल मंजूर निवेश ₹69,548 करोड़ तक पहुंचने और शुरुआती लक्ष्य पार करने से स्कीम की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकार का फोकस अब इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतिम उत्पादों के साथ-साथ कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, PCB से जुड़े कंपोनेंट, कनेक्टर्स, एंटेना, कैपेसिटर और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन पर है। अगर प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर उत्पादन शुरू करती हैं, तो इससे भारत की घरेलू सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट क्षमता को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और जोखिमों का स्वतंत्र विश्लेषण करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in की ओर से किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं दी जाती है।


