Closing Auction Session: भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में लागू किए गए Closing Auction Session (CAS) को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। हालांकि, सेबी नए सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों और बाजार सहभागियों की चिंताओं की समीक्षा कर रही है। समीक्षा के बाद जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जा सकते हैं।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि CAS एक महत्वपूर्ण सुधार है और इसे खत्म करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। शुरुआती दौर में सिस्टम के Indicative Price को लेकर कुछ दिक्कतें सामने आई थीं। इन समस्याओं को पहले समझना जरूरी है, ताकि उनके सही समाधान पर काम किया जा सके।
CAS इंडिकेटिव प्राइस में आई थी दिक्कत
तुहिन कांता पांडे के मुताबिक, CAS की शुरुआत में Indicative Price को लेकर समस्या सामने आई थी। इसके अलावा पुराने सिस्टम को नए ढांचे के मुताबिक अपडेट करने और सिस्टम से जुड़ी कुछ तकनीकी चिंताओं पर भी काम किया जा रहा है।
SEBI का मानना है कि जैसे-जैसे नए सिस्टम में बाजार सहभागिता बढ़ेगी, कई पहलुओं में सुधार देखने को मिल सकता है। पुराने सिस्टम को अपडेट करने का काम भी जारी है।
सेबी CAS से जुड़े डेटा और एक्सपायरी डेट की भी जांच कर रही है। हालांकि, CAS में होने वाली त्रुटियों को ट्रैक करने को लेकर किसी बड़ी चिंता से इनकार किया गया है। जरूरत पड़ने पर सिस्टम में डेटा से संबंधित बदलाव भी किए जा सकते हैं।
पहले समीक्षा, फिर बदलाव पर फैसला
SEBI चेयरमैन ने संकेत दिया कि CAS में तुरंत कोई बड़ा बदलाव करने के बजाय पहले इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद बाजार से जुड़े अलग-अलग पक्षों से मिले फीडबैक का आकलन किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के आधार पर यदि किसी बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो नियम या सिस्टम में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं। यानी सेबी का फिलहाल फोकस CAS को वापस लेने के बजाय इसे बेहतर और अधिक प्रभावी बनाने पर है।
Bloomberg ने भी SEBI की सक्रियता की पुष्टि की
CAS को लेकर बाजार में चल रही चर्चाओं के बीच Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक भी SEBI इस नए सिस्टम से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए अलग-अलग बाजार सहभागियों से बातचीत कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, SEBI ने HFTs, मार्केट मेकर्स, म्यूचुअल फंड्स और शेयर ब्रोकर्स समेत बाजार के विभिन्न प्रतिभागियों के साथ निजी स्तर पर बैठकें की हैं। इन चर्चाओं का उद्देश्य यह समझना है कि नए क्लोजिंग सिस्टम के इस्तेमाल में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
SEBI चेयरमैन पहले भी कह चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर नियमों में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने CAS को बाजार के स्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण सुधार बताया है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
SEBI बाजार के अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं पर भी नजर रख रही है। इससे मिलने वाले फीडबैक के आधार पर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।
क्या है Closing Auction Session?
Closing Auction Session यानी CAS शेयर बाजार में नियमित कारोबार खत्म होने के बाद आयोजित होने वाला एक अलग ऑक्शन सेशन है। इसके तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद करीब 20 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन आयोजित किया जाता है।
इस दौरान एक्सचेंज खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा करते हैं और उस कीमत का निर्धारण करते हैं जिस पर अधिकतम संभव मात्रा में सौदे किए जा सकें। इस प्रक्रिया से क्लोजिंग प्राइस तय होता है।
यह व्यवस्था पुराने 30 मिनट के औसत मूल्य आधारित क्लोजिंग सिस्टम की जगह लाई गई है। इसका उद्देश्य शेयरों के क्लोजिंग प्राइस को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से निर्धारित करना है।
निवेशकों की क्या चिंता है?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद बाजार के कुछ हिस्सों से इसमें कम भागीदारी और संभावित नुकसान को लेकर सवाल उठे हैं। खासकर ऐसे निवेशकों और ट्रेडर्स की चिंता है जो दिन के अंतिम चरण में ऑर्डर प्लेस करते हैं।
इस पर SEBI का कहना है कि CAS की प्रक्रिया पारदर्शी है। इसमें Indicative Price लगातार प्रदर्शित किया जाता है, जिससे बाजार सहभागियों को संभावित क्लोजिंग प्राइस की जानकारी मिलती रहती है।
इसके अलावा Random Close व्यवस्था भी लागू है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आखिरी क्षणों में आने वाले ऑर्डर क्लोजिंग प्राइस को मनमाने तरीके से प्रभावित न कर सकें।
CAS से पीछे नहीं हटेगा SEBI
SEBI चेयरमैन के बयान से साफ है कि मौजूदा चिंताओं के बावजूद नियामक Closing Auction Session को वापस लेने के पक्ष में नहीं है। फिलहाल व्यवस्था की खामियों, तकनीकी पहलुओं और बाजार सहभागियों से मिले फीडबैक की समीक्षा की जा रही है।
आगे यदि समीक्षा में कोई कमी सामने आती है तो उसमें बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन CAS को पूरी तरह खत्म करने का सवाल फिलहाल नहीं है। सेबी का जोर इस नई व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर है।


