UGC NET June 2026 Paper Cancel: UGC-NET जून 2026 के अभ्यर्थियों को NTA के फैसले से बड़ा झटका लगा है। 22 से 30 जून के बीच आयोजित परीक्षा के करीब डेढ़ महीने बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने English, Commerce और Sociology के पेपर दोबारा कराने का फैसला किया है। NTA के मुताबिक इन विषयों के प्रश्नपत्रों में गंभीर स्तर की त्रुटियां और अनियमितताएं सामने आने के बाद दोबारा परीक्षा कराना जरूरी हो गया। एजेंसी ने इसके लिए सितंबर में नई तारीखें भी घोषित कर दी हैं।
45 दिन बाद क्यों रद्द हुए UGC-NET के तीन पेपर?
Modi ji, look at what your NTA has just done.
UGC-NET exams for Sociology, English and Commerce were held between 22 and 30 June. Nearly two months later, NTA has cancelled all three because it set faulty papers and repeated old questions.
Thousands of candidates who prepared… https://t.co/TUMhhMhjvL
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 17, 2026 UGC-NET जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 30 जून के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा पूरी होने के बाद अभ्यर्थी रिजल्ट और JRF को लेकर इंतजार कर रहे थे। इसी बीच English, Commerce और Sociology के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से कई शिकायतें सामने आईं।
शिकायतों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई। जांच में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आने के बाद NTA ने इन तीन विषयों के पेपर दोबारा कराने का फैसला किया।
NTA के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, केवल कुछ विवादित प्रश्नों को हटाकर रिजल्ट जारी करना उचित नहीं था। इसलिए इन तीनों विषयों की पूरी परीक्षा दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
प्रश्नपत्र में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?
NTA की ओर से बताई गई कमियों ने परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जांच में प्रश्नपत्रों में कई तरह की त्रुटियां सामने आईं।
विचारकों और विद्वानों के नाम में गलतियां
Sociology जैसे विषय में जिन विद्वानों और विचारकों के नाम छात्रों को वर्षों तक पढ़ने पड़ते हैं, उनके नामों की स्पेलिंग तक प्रश्नपत्र में गलत पाए जाने की शिकायत सामने आई।
किताबों के नाम में भी त्रुटियां
प्रसिद्ध पुस्तकों के शीर्षकों को लेकर भी प्रश्नपत्र में गलतियां पाई गईं। परीक्षा के स्तर को देखते हुए ऐसी त्रुटियां अभ्यर्थियों के लिए स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय हैं।
पुराने सवालों के दोहराए जाने का आरोप
सबसे गंभीर आरोपों में पुराने प्रश्नों को दोहराया जाना शामिल है। अभ्यर्थियों और कुछ कोचिंग संस्थानों की ओर से दावा किया गया कि बड़ी संख्या में प्रश्न पुराने पेपरों से मिलते-जुलते या सीधे दोहराए गए थे।
हालांकि, किसी भी परीक्षा में प्रश्नों के दोहराव को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं। इसलिए 65-70 सवालों के सीधे कॉपी-पेस्ट होने जैसे आंकड़ों को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
भाषा और व्याकरण की गलतियां
प्रश्नों की भाषा, व्याकरण और वाक्य संरचना को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। अभ्यर्थियों का सवाल है कि राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा में प्रश्नपत्र अंतिम रूप देने से पहले पर्याप्त स्तर की विशेषज्ञ समीक्षा क्यों नहीं हुई।
NTA ने क्यों कहा कि दोबारा परीक्षा जरूरी है?
NTA के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या केवल कुछ गलत प्रश्नों को हटाकर परिणाम तैयार किया जा सकता है। एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्रों में सामने आई समस्याओं का दायरा इतना व्यापक था कि केवल विवादित प्रश्नों को हटाकर निष्पक्ष परिणाम तैयार करना संभव नहीं था।
इसी वजह से English, Commerce और Sociology के अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया।
NTA के नोटिस बोर्ड पर इन तीन विषयों की दोबारा परीक्षा से संबंधित सार्वजनिक सूचना भी जारी की गई है।
UGC NET 2026 Re-Exam Date: सितंबर में फिर परीक्षा
NTA ने तीनों विषयों के लिए दोबारा परीक्षा का शेड्यूल जारी किया है।
| विषय | दोबारा परीक्षा की तारीख | शिफ्ट |
|---|---|---|
| English | 9 सितंबर 2026 | शिफ्ट 1, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक |
| Commerce | 9 सितंबर 2026 | शिफ्ट 2, दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक |
| Sociology | 10 सितंबर 2026 | शिफ्ट 1, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक |
सबसे बड़ी राहत यह है कि दोबारा परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी जिन छात्रों ने पहले ही परीक्षा दी थी, उन्हें नई परीक्षा के लिए फिर से फीस जमा नहीं करनी होगी।
वहीं, बाकी विषयों की परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम को निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
छात्रों की परेशानी सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं
अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला सिर्फ एक दोबारा परीक्षा देने का मामला नहीं है। UGC-NET की तैयारी में महीनों और कई बार वर्षों की मेहनत लगती है। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा, रहने का खर्च और काम या पढ़ाई से छुट्टी लेने जैसी परेशानियां भी जुड़ी होती हैं।
इसके अलावा, NET और JRF का परिणाम आगे की अकादमिक योजना पर भी असर डालता है। जिन उम्मीदवारों का लक्ष्य असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता हासिल करना या JRF के जरिए रिसर्च में जाना है, उनके लिए परिणाम में देरी का मतलब आगे की योजनाओं में भी बदलाव हो सकता है।
यही वजह है कि अभ्यर्थियों की नाराजगी केवल दोबारा परीक्षा कराने को लेकर नहीं, बल्कि इस सवाल को लेकर भी है कि प्रश्नपत्र में ऐसी गंभीर गलतियां पहले ही क्यों नहीं पकड़ी गईं।
राहुल गांधी ने NTA और सरकार पर साधा निशाना
UGC-NET के तीन पेपर दोबारा कराने के फैसले पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार और परीक्षा व्यवस्था पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जून में परीक्षा देने के बाद अब छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी, जबकि गलती प्रश्नपत्र तैयार करने वाली व्यवस्था की थी। राहुल गांधी ने छात्रों की फीस, यात्रा, समय और मानसिक दबाव का मुद्दा उठाते हुए परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर सवाल किया।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को ‘Extraction Machine’ बताते हुए आरोप लगाया कि यह छात्रों का पैसा, समय, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास तक निचोड़ रही है।
राहुल गांधी ने यह सवाल भी उठाया कि क्या Sociology समेत कुछ विषयों के पेपर परीक्षा से पहले लीक हुए थे और इस मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी। हालांकि, पेपर लीक के आरोपों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।
क्या बाकी 84 विषयों का रिजल्ट प्रभावित होगा?
NTA ने संकेत दिया है कि English, Commerce और Sociology के अलावा बाकी विषयों की प्रक्रिया को अलग तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इन तीन विषयों के अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा का फैसला लिया गया है, जबकि अन्य विषयों के परिणाम और JRF आवंटन को तय कार्यक्रम के अनुसार जारी करने की बात कही गई है।
इसका मतलब है कि बाकी विषयों के उम्मीदवारों को इन तीन पेपरों की वजह से अनिवार्य रूप से दोबारा परीक्षा नहीं देनी होगी।
बड़ा सवाल: गलती की जिम्मेदारी कौन लेगा?
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी समीक्षा और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक छोटी गलती भी हजारों उम्मीदवारों के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
इस मामले में NTA ने गलतियों को स्वीकार करते हुए दोबारा परीक्षा का रास्ता चुना है। लेकिन छात्रों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। असली सवाल अब यह है कि गलती हुई कैसे, उसकी जिम्मेदारी किसकी थी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए क्या व्यवस्था बदली जाएगी?
अभ्यर्थियों के लिए सितंबर की दोबारा परीक्षा एक और चुनौती होगी। उन्होंने जिस परीक्षा को जून में पूरा समझ लिया था, उसके लिए उन्हें फिर से तैयारी करनी होगी। ऐसे में NTA के सामने सिर्फ परीक्षा दोबारा कराने की नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा दोबारा हासिल करने की भी बड़ी चुनौती है।
स्रोत: NTA की ओर से जारी UGC-NET जून 2026 से संबंधित सार्वजनिक सूचना और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी।


