Lakshmi Mittal ArcelorMittal Ukraine Steel Plant Attack: रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं। इसी कड़ी में यूक्रेन के क्रिवी रिह स्थित आर्सेलरमित्तल स्टील प्लांट पर रूसी मिसाइल हमले में 2 लोगों की मौत और 14 लोगों के घायल होने की खबर है। हमले से प्लांट की पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचा है।
Russian Attack on ArcelorMittal Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर बड़ा औद्योगिक प्रतिष्ठान हमले की चपेट में आ गया है। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी निवास मित्तल की कंपनी ArcelorMittal के यूक्रेन स्थित विशाल स्टील प्लांट पर रूसी मिसाइल हमला हुआ है। यह प्लांट यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) में स्थित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रात में हुए इस हमले में 2 लोगों की मौत हुई, जबकि 14 कर्मचारी घायल बताए जा रहे हैं। हमले का असर प्लांट के महत्वपूर्ण औद्योगिक ढांचे पर पड़ा है। पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने के बाद उत्पादन गतिविधियों को अस्थायी रूप से प्रभावित होना पड़ा है।
ब्लास्ट-फर्नेस और पावर यूनिट को भारी नुकसान
आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह की ओर से मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर जारी बयान में हमले की जानकारी दी गई। कंपनी के मुताबिक, रूसी हमले में प्लांट के मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। खास तौर पर पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।
स्टील उत्पादन में ब्लास्ट-फर्नेस बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें लौह अयस्क से पिघला हुआ लोहा तैयार किया जाता है, जिसके बाद आगे की प्रक्रियाओं के जरिए स्टील बनाया जाता है। ऐसे में ब्लास्ट-फर्नेस और बिजली आपूर्ति से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने का सीधा असर उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है।
कंपनी ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ विनिर्माण प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है। प्लांट के सामान्य संचालन को दोबारा शुरू करने के लिए क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति का आकलन करना जरूरी होगा।
यूक्रेन के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल है प्लांट
क्रिवी रिह स्थित आर्सेलरमित्तल प्लांट यूक्रेन के प्रमुख औद्योगिक परिसरों में गिना जाता है। यह सिर्फ एक स्टील फैक्ट्री नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी इसका काफी महत्व है।
युद्ध के दौरान यूक्रेन के औद्योगिक ढांचे को पहले भी कई बार नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा आपूर्ति, परिवहन नेटवर्क और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों पर हमलों का असर देश की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों पर पड़ सकता है।
ऐसे में आर्सेलरमित्तल जैसे बड़े स्टील प्लांट पर हमला यूक्रेन के लिए सैन्य नुकसान के साथ-साथ आर्थिक चुनौती भी माना जा रहा है।
जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह पर बड़ा हमला
क्रिवी रिह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का गृहनगर है और युद्ध के दौरान यह क्षेत्र कई बार रूसी हमलों का निशाना बन चुका है।
जेलेंस्की ने हमले की आलोचना करते हुए दावा किया कि रूस लगातार यूक्रेन के नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। उनके मुताबिक, महज एक सप्ताह के दौरान रूस की ओर से यूक्रेन के शहरों पर बड़ी संख्या में ड्रोन, गाइडेड एरियल बम और मिसाइलें दागी गई हैं।
जेलेंस्की के अनुसार, इस अवधि में रूस ने 1,550 से अधिक अटैक ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागीं। इन हमलों में कई इलाकों में इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
रूस का दावा- सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना
रूसी रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि की है। मॉस्को का कहना है कि उसके हमलों का निशाना यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक परिसर और महत्वपूर्ण औद्योगिक सुविधाएं थीं।
रूस ने क्रिवी रिह के मेटलर्जिकल प्लांट और राजधानी कीव में सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा रूस की ओर से बड़ी संख्या में यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया गया है।
युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अक्सर एक-दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की बात कहते रहे हैं। हालांकि, ऐसे हमलों में नागरिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को होने वाले नुकसान को लेकर दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं।
जवाब में यूक्रेन ने रूस के अंदर किया बड़ा ड्रोन हमला
रूस की ओर से यूक्रेन पर हमलों के बीच यूक्रेन ने भी रूस के अंदर लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन से हमला किया। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक, यह युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र में यूक्रेन की ओर से किए गए सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक था।
इस हमले में एक बुजुर्ग की मौत होने की खबर सामने आई है। इसके अलावा पोडॉल्स्क में ऑनलाइन रिटेल कंपनी Wildberries के एक बड़े गोदाम को भी ड्रोन हमले से नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई। हमले के बाद इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने की बात कही गई।
बेलगोरोड क्षेत्र के पास एक बस को भी ड्रोन हमले में निशाना बनाए जाने की खबर है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं रूस के रोस्तोव क्षेत्र में यूक्रेन ने मिसाइल ईंधन उत्पादन से जुड़े एक प्रतिष्ठान को निशाना बनाने का दावा किया है।
नाटो क्षेत्र तक पहुंचा युद्ध का असर
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब नाटो सदस्य देशों की सीमाओं पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मोलदोवा की दिशा से आया एक ड्रोन रोमानियाई हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ।
नाटो के एयर-पुलिसिंग मिशन में तैनात स्पेनिश वायुसेना के F-18 लड़ाकू विमान ने कार्रवाई करते हुए उस ड्रोन को मार गिराया। नाटो की ओर से इसे संदिग्ध रूसी ड्रोन बताया गया है।
रोमानिया पहले भी यूक्रेन युद्ध से जुड़े ड्रोन और हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की घटनाओं को लेकर चिंता जाहिर करता रहा है। यूक्रेन की सीमा से नजदीकी के कारण रोमानिया के लिए इस तरह की घटनाएं खास तौर पर संवेदनशील हैं।
स्टील प्लांट पर हमला क्यों है बड़ी चिंता?
आर्सेलरमित्तल के क्रिवी रिह प्लांट पर हुआ हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूक्रेन के औद्योगिक ढांचे का एक प्रमुख हिस्सा है। युद्ध के दौरान किसी बड़े स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने से केवल कंपनी के कारोबार पर असर नहीं पड़ता, बल्कि इससे रोजगार, सप्लाई चेन, ऊर्जा खपत, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
स्टील उद्योग कई दूसरे क्षेत्रों के लिए आधार का काम करता है। निर्माण, मशीनरी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में स्टील की मांग रहती है। इसलिए किसी बड़े उत्पादन केंद्र पर लंबे समय तक असर रहने से इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है।
इसके अलावा, युद्ध के दौरान औद्योगिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचने से निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए जोखिम भी बढ़ता है। यही वजह है कि क्रिवी रिह में आर्सेलरमित्तल प्लांट पर हुआ हमला यूक्रेन के लिए एक गंभीर आर्थिक झटका माना जा रहा है।
शांति वार्ता के बीच बढ़ते हमले
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए समय-समय पर बातचीत और शांति प्रयासों की चर्चा होती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर संघर्ष अब भी जारी है। फ्रंटलाइन पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आने के बीच दोनों पक्ष दूर तक मार करने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब हमलों का दायरा सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर ऊर्जा संयंत्रों, औद्योगिक इकाइयों, परिवहन नेटवर्क और आर्थिक परिसंपत्तियों तक पहुंच चुका है।
लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल के स्टील प्लांट पर हमला इसी बदलती रणनीति का एक बड़ा उदाहरण है। अगर इस तरह के हमले लगातार जारी रहते हैं, तो युद्ध का आर्थिक नुकसान आने वाले समय में और बढ़ सकता है।
डिस्क्लेमर: रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी घटनाओं में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हो सकते हैं। हमले से जुड़ी मृतकों, घायलों और नुकसान की जानकारी समय के साथ बदल सकती है।


