Zaggle Prepaid Share Price: करीब तीन साल पहले शेयर बाजार में लिस्ट हुई Zaggle Prepaid Services के शेयरों में सोमवार, 17 अगस्त 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के कमजोर जून तिमाही नतीजों और मार्जिन में गिरावट के बाद शेयर 20 फीसदी के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। इसके साथ ही शेयर का भाव कंपनी के IPO प्राइस से भी नीचे चला गया है। IPO में निवेश करने वाले शेयरहोल्डर्स के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि एक समय यही स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से कई गुना ऊपर पहुंच चुका था।
सोमवार को BSE पर Zaggle Prepaid का शेयर 20 फीसदी टूटकर ₹160.45 के स्तर पर आ गया। 20 फीसदी का लोअर सर्किट लगने का मतलब है कि उस समय इस भाव पर शेयर में कोई खरीदार उपलब्ध नहीं था। कंपनी के ₹563 करोड़ के IPO में शेयर ₹164 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए गए थे। यानी मौजूदा भाव IPO प्राइस से भी नीचे है।
जून तिमाही में बढ़ा रेवेन्यू, लेकिन मुनाफा 33% घटा
Zaggle Prepaid के लिए जून 2026 तिमाही में सबसे बड़ी चिंता कंपनी की कमाई की गुणवत्ता और मार्जिन में गिरावट रही। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 27.5 फीसदी बढ़कर ₹423 करोड़ हो गया। पहली नजर में रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत दिखाई देती है, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर तस्वीर इसके उलट रही।
जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 33 फीसदी घटकर ₹17.5 करोड़ रह गया। यानी कंपनी की बिक्री बढ़ी, लेकिन उस बिक्री से होने वाला मुनाफा काफी कम हो गया।
ऑपरेटिंग स्तर पर भी दबाव देखने को मिला। तिमाही में EBITDA करीब ₹31 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर लगभग स्थिर रहा। इसके चलते EBITDA मार्जिन 9.2 फीसदी से घटकर 7.3 फीसदी पर आ गया।
यही मार्जिन में गिरावट बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी और नतीजे सामने आने के बाद शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली।
मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?
कंपनी के मुताबिक जून तिमाही में मार्जिन पर कई तरह के खर्चों का असर पड़ा। इनमें खास तौर पर Dice के अधिग्रहण से जुड़े खर्च महत्वपूर्ण रहे।
Dice से जुड़े ट्रांजैक्शन कॉस्ट, वेंडर्स को किए गए एकमुश्त भुगतान और 100 से ज्यादा प्रोफेशनल्स के रिलोकेशन पर हुए खर्च ने तिमाही के मार्जिन को प्रभावित किया। कंपनी का कहना है कि Dice कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाला रेवेन्यू जून 2026 तिमाही में शामिल नहीं किया गया है और इसके सितंबर 2026 तिमाही से दिखाई देने की उम्मीद है।
इसके अलावा कुछ ऐसे खर्च भी इस दौरान प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में आए, जिन्हें पहले कैपिटलाइज किया गया था। इनका भी कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ा।
कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी और Zagg.Money के अधिग्रहण के बाद कर्मचारियों तथा अन्य गतिविधियों पर बढ़े खर्च ने भी मार्जिन को प्रभावित किया।
इस तरह कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत रहने के बावजूद खर्चों का दबाव मुनाफे पर साफ दिखाई दिया।
इंसेंटिव और कैशबैक खर्च में आई थोड़ी राहत
कंपनी के रेवेन्यू स्ट्रक्चर में इंसेंटिव और कैशबैक का खर्च भी महत्वपूर्ण है। जून तिमाही में रेवेन्यू के मुकाबले इंसेंटिव और कैशबैक पर खर्च करीब 66.3 फीसदी रहा। हालांकि यह अभी भी बड़ा खर्च है, लेकिन मार्च 2026 तिमाही में यह अनुपात करीब 69 फीसदी था।
इस लिहाज से कंपनी को यहां कुछ राहत जरूर मिली है। वहीं कंपनी ने बताया कि Greenedge के बेहतर प्रदर्शन और जून तिमाही में overriding commission की वजह से Propel के मार्जिन में सुधार हुआ।
फिर भी इन सकारात्मक पहलुओं के बावजूद अधिग्रहण से जुड़े खर्च, कर्मचारियों की लागत और अन्य ऑपरेशनल खर्चों ने कुल EBITDA मार्जिन को नीचे खींच दिया।
सितंबर तिमाही पर निवेशकों की नजर
Zaggle Prepaid के निवेशकों के लिए अब अगली बड़ी उम्मीद सितंबर 2026 तिमाही से जुड़ी है। कंपनी के मुताबिक Dice कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी कमाई जून तिमाही में शामिल नहीं की गई और इसके सितंबर तिमाही से रेवेन्यू में दिखाई देने की उम्मीद है।
अगर Dice से आने वाला रेवेन्यू उम्मीद के मुताबिक जुड़ता है और अधिग्रहण से संबंधित एकमुश्त खर्चों का दबाव कम होता है, तो आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि निवेशकों को यह भी देखना होगा कि अधिग्रहण के बाद कंपनी की लागत कितनी तेजी से बढ़ती है और अतिरिक्त रेवेन्यू का मुनाफे में कितना फायदा मिलता है। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि बाजार अब कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और EBITDA मार्जिन पर भी करीब से नजर रख रहा है।
एक साल में 61% से ज्यादा टूटा शेयर
Zaggle Prepaid के शेयरों की पिछले एक साल की चाल निवेशकों के लिए काफी निराशाजनक रही है। 19 अगस्त 2025 को शेयर BSE पर ₹417.40 के एक साल के हाई पर था। इसके बाद स्टॉक में लगातार कमजोरी देखने को मिली।
अब 17 अगस्त 2026 को शेयर ₹160.45 के स्तर तक पहुंच गया है। यानी करीब एक साल के हाई से शेयर लगभग 61.56 फीसदी टूट चुका है।
इतना ही नहीं, शेयर अपने IPO प्राइस से भी नीचे आ गया है। कंपनी के IPO में निवेशकों को शेयर ₹164 के भाव पर मिले थे। इसके बाद 22 सितंबर 2023 को शेयर बाजार में इसकी एंट्री करीब 1 फीसदी डिस्काउंट पर ₹162 के आसपास हुई थी।
लिस्टिंग के बाद हालांकि Zaggle Prepaid ने जोरदार रिकवरी की थी और निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था।
एक समय ₹597 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था शेयर
Zaggle Prepaid के शेयर ने लिस्टिंग के बाद एक समय निवेशकों को कई गुना रिटर्न दिया। 17 दिसंबर 2024 को शेयर ₹597 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था।
IPO प्राइस ₹164 की तुलना में ₹597 का स्तर काफी ज्यादा था। यानी उस समय IPO निवेशकों का निवेश लगभग साढ़े तीन गुना से ज्यादा हो चुका था।
लेकिन रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद स्टॉक की कहानी पूरी तरह बदल गई। ऊंचे स्तरों से लगातार गिरावट के बाद शेयर अब ₹160.45 तक आ चुका है। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड हाई से मौजूदा स्तर तक स्टॉक में करीब 73 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
इस गिरावट ने उन निवेशकों को भी झटका दिया है, जिन्होंने कंपनी के मजबूत ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ऊंचे स्तरों पर शेयर खरीदा था।
IPO निवेशकों का पोर्टफोलियो भी लाल
₹164 के IPO प्राइस के मुकाबले ₹160.45 का मौजूदा भाव देखें तो IPO में पैसा लगाने वाले निवेशक भी फिलहाल नुकसान की स्थिति में हैं। हालांकि यह नुकसान प्रतिशत के लिहाज से बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि लिस्टिंग के बाद शेयर ने जिस तेजी से लंबी दूरी तय की थी, उसका बड़ा हिस्सा अब खत्म हो चुका है।
एक समय IPO प्राइस से तीन गुना से ज्यादा ऊपर पहुंचने वाला यह स्टॉक अब इश्यू प्राइस से भी नीचे आ गया है। यही वजह है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
Zaggle Prepaid के शेयर में आगे की दिशा तय करने में कुछ प्रमुख फैक्टर अहम रहेंगे।
पहला, सितंबर 2026 तिमाही में Dice से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट का रेवेन्यू कितना जुड़ता है और उसका मुनाफे पर क्या असर पड़ता है।
दूसरा, कंपनी का EBITDA मार्जिन 7.3 फीसदी से कितना सुधरता है। निवेशक यह देखेंगे कि जून तिमाही में आए खर्च अस्थायी थे या आने वाली तिमाहियों में भी लागत का दबाव बना रहेगा।
तीसरा, Zagg.Money और Dice जैसे अधिग्रहणों से कंपनी को लंबे समय में कितनी अतिरिक्त ग्रोथ मिलती है। अगर अधिग्रहण से रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में सुधार होता है, तो यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
इसके अलावा कर्मचारियों की लागत, इंसेंटिव और कैशबैक खर्च तथा कंपनी की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
Zaggle Prepaid में मौजूदा गिरावट सिर्फ शेयर की कीमत में कमजोरी नहीं दिखाती, बल्कि बाजार की उस चिंता को भी दर्शाती है जिसमें बढ़ते रेवेन्यू के बावजूद मुनाफे और मार्जिन पर दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कंपनी के पास ग्रोथ की संभावनाएं हैं और प्रबंधन को उम्मीद है कि अधिग्रहण तथा नए कॉन्ट्रैक्ट आने वाली तिमाहियों में कारोबार को मजबूत कर सकते हैं। लेकिन मौजूदा स्तर पर निवेशकों के लिए कंपनी की अगली कुछ तिमाहियों की कमाई, कैश फ्लो और मार्जिन को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
ऐसे में सिर्फ इस आधार पर फैसला लेना उचित नहीं होगा कि शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ चुका है। गिरा हुआ शेयर हमेशा सस्ता हो, यह जरूरी नहीं है। निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वैल्यूएशन, भविष्य की कमाई और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। यह लेख किसी भी तरह से शेयर खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है।


