उत्तर प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने साफ किया है कि दुग्ध उत्पादों में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा पाए जाने पर संबंधित डेयरी इकाई का लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जा सकता है और आगे कार्रवाई के बाद इसे निरस्त भी किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मिलावटी दूध में खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दुग्ध उत्पादों के निरीक्षण के दौरान लिए गए नमूनों में मिलावट की शिकायतें और पुष्टि सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ उत्पादों में रिफाइंड तेल व वसा, सोयाबीन, टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाईऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपाल, टीनोपाल और हाइड्रोजन पैराक्साइड जैसे पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
ऐसे पदार्थों का खाद्य उत्पादों में अनधिकृत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। खास तौर पर दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में मिलावट पाए जाने पर उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
एनालॉग पनीर पर भी प्रतिबंध
प्रशासन ने एनालॉग पनीर के इस्तेमाल और बिक्री को लेकर भी सख्ती दिखाई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से 15 अगस्त को जारी संशोधित आदेश में अधिकारियों को मिलावट की पुष्टि होने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मिलावट मिलने पर जब्त होंगे सभी उत्पाद
निर्देशों के अनुसार यदि किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई में विजातीय वसा या हानिकारक रसायन पाए जाते हैं तो परिसर में मौजूद सभी संबंधित दुग्ध उत्पादों को जब्त किया जाएगा। जांच के बाद ऐसे विषाक्त उत्पादों को नष्ट कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
इसके अलावा संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। कानून की धारा 34 के तहत आकस्मिक प्रतिबंध आदेश जारी कर निर्माण गतिविधियों को तत्काल बंद कराया जा सकता है।
दर्ज होगी प्राथमिकी, ब्रांड पर लगेगा प्रदेशव्यापी बैन
मिलावट की पुष्टि होने पर केवल उत्पाद जब्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही जिस ब्रांड के उत्पाद में हानिकारक पदार्थ पाए जाएंगे, उसकी बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
ऐसे प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस भी तत्काल निलंबित किया जाएगा। मामले की गंभीरता और नियमानुसार आगे की कार्रवाई के आधार पर लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
दूसरे राज्यों से आने वाले डेयरी उत्पाद भी जांच के दायरे में
उत्तर प्रदेश के बाहर निर्मित दूध और दुग्ध उत्पादों को भी इन निर्देशों से बाहर नहीं रखा गया है। यदि दूसरे राज्य में निर्मित किसी ब्रांड के दूध या डेयरी उत्पाद में हानिकारक रसायन अथवा विजातीय वसा की पुष्टि होती है तो उस ब्रांड की बिक्री पर भी पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रदेश में बिकने वाले दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा उपभोक्ताओं को मिलावटी और संभावित रूप से हानिकारक उत्पादों से बचाना है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी?
दूध, पनीर, खोया, घी और अन्य डेयरी उत्पाद खरीदते समय उपभोक्ताओं को पैकेट की सील, लेबल, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा निर्माता की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। संदिग्ध उत्पाद मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध प्रशासनिक आदेश और दिए गए विवरण पर आधारित है। किसी खास उत्पाद या ब्रांड को लेकर कार्रवाई की स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी।


