Nifty Outlook: लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर नजर आ रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी में आगे भी दबाव बना रह सकता है और गिरावट की स्थिति में इंडेक्स 24,200 से 24,000 के जोन तक फिसल सकता है। वहीं 24,500-24,550 का स्तर पार करना बाजार में मजबूती की वापसी के लिए अहम माना जा रहा है।
शेयर बाजार में शुक्रवार को भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान इंडेक्स सीमित दायरे में रहा और आखिर में 29 अंक गिरकर 24,366 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.83% की गिरावट दर्ज की गई।
अब निवेशकों की नजर सोमवार, 17 अगस्त को बाजार की शुरुआत और निफ्टी के अगले रुझान पर रहेगी। एक्सपर्ट्स ने इस दौरान कुछ अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल बताए हैं, जिन पर नजर रखना जरूरी होगा।
शुक्रवार को किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?
निफ्टी 50 में Apollo Hospitals, Bharti Airtel और Adani Enterprises सबसे बड़े गेनर्स में शामिल रहे। दूसरी ओर Tata Motors Passenger Vehicles, Jio Financial Services और ONGC में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी बनी रही। Nifty Midcap 100 में 0.53% और Nifty Smallcap 100 में 0.69% की गिरावट दर्ज की गई।
BSE पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो घटकर 0.84 पर आ गया। यह बाजार में बढ़ती मुनाफावसूली और कमजोर भागीदारी का संकेत माना जा सकता है।
इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपया भी दबाव में रहा। USD/INR करीब 95.40-95.45 के दायरे में कारोबार करता रहा और रुपया लगभग ₹95.43 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
अगले हफ्ते किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?
पहली तिमाही के नतीजों का सीजन लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में आने वाले सप्ताह में घरेलू कंपनियों के नतीजों के बजाय ग्लोबल संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और मैक्रो इकोनॉमिक आंकड़े बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, आगे स्टॉक्स में खबरों के आधार पर मूवमेंट देखने को मिल सकता है। निवेशक कंपनियों की कमाई के साथ-साथ घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का भी आकलन करेंगे।
पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक जोखिम की धारणा भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। कच्चे तेल में तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए बाजार की चिंता बढ़ा सकती है।
एक्सपर्ट्स ने बताए निफ्टी के अहम स्तर
1. 24,000 तक जा सकता है निफ्टी
HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में फिलहाल कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। अगर बिकवाली बढ़ती है तो इंडेक्स 24,200 से 24,000 के स्तर तक फिसल सकता है।
वहीं ऊपर की तरफ 24,500 पहला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेगा। इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है।
2. 24,500-24,550 पार हुआ तो तेजी संभव
SBI Securities के सुदीप शाह के अनुसार, 24,500-24,550 का जोन निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस है। अगर इंडेक्स इस दायरे को निर्णायक रूप से पार करता है तो आगे 24,700 और 24,850 के स्तर देखने को मिल सकते हैं।
वहीं नीचे की तरफ 24,230-24,200 का क्षेत्र मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। इस जोन के टूटने पर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
3. 24,180 तक गिरावट की आशंका
LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक, बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट अभी कमजोर बना हुआ है। उनके अनुसार निफ्टी 24,180 तक फिसल सकता है।
उन्होंने 24,400 को निकट अवधि का महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बताया है। जब तक इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती नहीं दिखाता, तब तक बाजार में सावधानी बरतने की जरूरत रह सकती है।
24,360-24,385 जोन क्यों है अहम?
HDFC Securities के विनय राजानी के मुताबिक, निफ्टी शुक्रवार को 20-डे DEMA के 24,363 और 200-डे DEMA के 24,385 के आसपास बंद हुआ। ऐसे में 24,360-24,385 का जोन आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
अगर निफ्टी इस जोन के नीचे लगातार कारोबार करता है तो 24,265 और फिर 24,000 अगले सपोर्ट बन सकते हैं।
वहीं तेजी की स्थिति में 24,630 और 24,750 अगले रेजिस्टेंस स्तर हो सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा तकनीकी संकेतों को देखते हुए निफ्टी में फिलहाल स्पष्ट तेजी के बजाय दबाव और कंसोलिडेशन का माहौल नजर आ रहा है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय 24,200-24,000 के सपोर्ट और 24,500-24,550 के रेजिस्टेंस जोन पर नजर रखनी चाहिए।
अगर निफ्टी रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूती से टिकता है तो तेजी का रास्ता खुल सकता है, जबकि सपोर्ट टूटने पर गिरावट और बढ़ सकती है। इसलिए बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक जोखिम प्रबंधन और स्टॉप-लॉस का ध्यान रखना जरूरी है।
Disclaimer: newsjagran.in पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट और ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि कोई भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


