आज के समय में इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। छोटी बीमारी से लेकर गंभीर बीमारी तक, अस्पताल में भर्ती होने पर लाखों रुपये तक का खर्च आ सकता है। यही वजह है कि आर्थिक सुरक्षा के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी माना जाता है। हालांकि, सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं है। अगर पॉलिसी की शर्तों और कवरेज को ठीक से नहीं समझा गया तो जरूरत के समय क्लेम करते वक्त परेशानी हो सकती है और इलाज के खर्च का एक हिस्सा अपनी जेब से देना पड़ सकता है।
कई लोग पॉलिसी लेते समय सिर्फ प्रीमियम और बीमा राशि पर ध्यान देते हैं। लेकिन रूम रेंट की सीमा, कैशलैस नेटवर्क, नॉन-मेडिकल एक्सपेंस, को-पेमेंट, डिडक्टिबल, वेटिंग पीरियड और एक्सक्लूजन जैसी शर्तें भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय होने वाली 3 आम गलतियों के बारे में।
1. कैशलैस का मतलब हर खर्च का भुगतान नहीं
हेल्थ इंश्योरेंस में कैशलैस सुविधा लोगों के लिए काफी सुविधाजनक होती है। इसके तहत नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराने पर बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार अस्पताल के साथ सीधे भुगतान करती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अस्पताल का हर बिल बीमा कंपनी ही चुकाएगी।
इलाज के दौरान कुछ ऐसे खर्च हो सकते हैं जो पॉलिसी के तहत कवर नहीं होते। इनमें कुछ नॉन-मेडिकल आइटम, दस्ताने, कुछ उपभोग्य सामग्री, प्रशासनिक शुल्क या अन्य ऐसे खर्च शामिल हो सकते हैं, जो संबंधित पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बाहर रखे गए हों।
इसके अलावा, पॉलिसी में को-पेमेंट या डिडक्टिबल जैसी शर्तें भी हो सकती हैं। इसलिए कैशलैस सुविधा देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि आपको अस्पताल में कुछ भी भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
क्या करें: पॉलिसी खरीदने से पहले कवरेज, एक्सक्लूजन, को-पेमेंट, डिडक्टिबल और नॉन-मेडिकल खर्चों की जानकारी जरूर पढ़ें।
2. रूम रेंट की लिमिट को नजरअंदाज करना
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय रूम रेंट की सीमा सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक हो सकती है। कुछ पॉलिसियों में अस्पताल के कमरे के किराये पर प्रतिदिन की सीमा निर्धारित होती है।
मान लीजिए आपकी पॉलिसी में एक निश्चित श्रेणी के कमरे का ही कवरेज है, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के दौरान आपने उससे महंगा कमरा चुना। ऐसी स्थिति में केवल कमरे के किराये का अतिरिक्त खर्च ही नहीं, बल्कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कुछ संबंधित अस्पताल खर्चों पर भी असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीदने के बजाय उसकी रूम रेंट लिमिट जरूर जांचनी चाहिए। अगर आपकी जरूरत और बजट अनुमति देता है तो ऐसी पॉलिसी पर विचार किया जा सकता है जिसमें रूम रेंट पर उचित या पर्याप्त सीमा हो।
क्या करें: पॉलिसी खरीदने से पहले देखें कि कमरे के किराये की अधिकतम सीमा क्या है और आपके चुने हुए अस्पताल में उस सीमा के भीतर कमरा उपलब्ध है या नहीं।
3. एजेंट की बात पर पूरी तरह भरोसा करना
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय एजेंट आपको पॉलिसी की कई खूबियां बता सकता है। लेकिन क्लेम के समय वही शर्तें लागू होती हैं जो पॉलिसी के आधिकारिक दस्तावेज में लिखी होती हैं।
कई बार ग्राहक मौखिक रूप से बताई गई जानकारी को पॉलिसी का हिस्सा समझ लेते हैं। बाद में जब क्लेम किया जाता है तो पता चलता है कि संबंधित बीमारी, इलाज या खर्च पर कोई सीमा या एक्सक्लूजन लागू है।
इसलिए सिर्फ एजेंट की बात सुनकर पॉलिसी खरीदना सही तरीका नहीं है। पॉलिसी का दस्तावेज खुद पढ़ें और जरूरत पड़ने पर बीमा कंपनी से लिखित में जानकारी लें।
क्या करें: पॉलिसी खरीदने से पहले कवरेज, एक्सक्लूजन, वेटिंग पीरियड, रूम रेंट, को-पेमेंट, डिडक्टिबल और क्लेम की शर्तों को अच्छी तरह समझें।
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
इन 3 गलतियों के अलावा हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय कुछ अन्य बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
- पॉलिसी में शामिल नेटवर्क अस्पतालों की संख्या और आपके शहर में उनकी उपलब्धता देखें।
- पहले से मौजूद बीमारियों पर लागू वेटिंग पीरियड समझें।
- पॉलिसी में बीमारी और इलाज के लिए कोई सब-लिमिट है या नहीं, इसकी जांच करें।
- को-पेमेंट की शर्त लागू है तो यह जरूर समझें कि आपको कितना खर्च खुद उठाना होगा।
- पॉलिसी का रिन्यूअल, रिस्टोरेशन और नो-क्लेम बोनस जैसे फीचर्स समझें।
- परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर और व्यक्तिगत पॉलिसी में अंतर समझकर फैसला लें।
- केवल कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी न खरीदें। सस्ता प्लान कई बार कम कवरेज या ज्यादा शर्तों के साथ आ सकता है।
पॉलिसी खरीदने से पहले दस्तावेज पढ़ना क्यों जरूरी है?
हेल्थ इंश्योरेंस एक वित्तीय सुरक्षा है और इसे खरीदते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पॉलिसी की शर्तें लंबी और तकनीकी हो सकती हैं, लेकिन कम से कम मुख्य कवरेज, एक्सक्लूजन और लिमिट को समझना बेहद जरूरी है।
खास तौर पर यह पता करें कि किस बीमारी और इलाज का खर्च कवर है, किसका नहीं, कितना खर्च कंपनी देगी और किन परिस्थितियों में आपको अपनी जेब से भुगतान करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
हेल्थ इंश्योरेंस का उद्देश्य मुश्किल समय में आपके मेडिकल खर्च का आर्थिक बोझ कम करना है। लेकिन इसका पूरा फायदा तभी मिलेगा जब आप पॉलिसी की शर्तों को समझकर खरीदेंगे। सिर्फ प्रीमियम और बीमा राशि देखकर फैसला करने के बजाय कैशलैस सुविधा, रूम रेंट लिमिट, एक्सक्लूजन, को-पेमेंट और वेटिंग पीरियड जैसी शर्तों की जांच जरूर करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि एजेंट की मौखिक जानकारी के बजाय पॉलिसी के आधिकारिक दस्तावेज को आधार बनाकर फैसला करें। कोई भी हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले अपनी जरूरत, परिवार के सदस्यों और संभावित मेडिकल खर्च को ध्यान में रखकर अलग-अलग पॉलिसियों की तुलना करना बेहतर रहता है।


