Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था को 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य अब सिर्फ एक महत्वाकांक्षी सपना नहीं, बल्कि सही नीतियों और तेज आर्थिक विकास के साथ हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य माना जा रहा है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म Equirus की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि, इसके लिए आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ रुपये को मजबूत करना और कई बड़े संरचनात्मक सुधार लागू करना जरूरी होगा।
2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य
भारत वर्तमान में करीब 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। इसे 2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को मौजूदा आकार से करीब 5.5 गुना बढ़ाना होगा। Equirus के अनुमान के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डॉलर के लिहाज से करीब 18% सालाना ग्रोथ की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये की विनिमय दर भी इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए रुपये की अंडरलाइंग ग्रोथ करीब 14.2% और हर साल रुपये में लगभग 3 से 3.6% की मजबूती जरूरी हो सकती है।
भारत को आजादी के बाद पहली बार 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में करीब 67 साल लगे थे। हालांकि, 2014 के बाद अगले करीब एक दशक में अर्थव्यवस्था का आकार लगभग दोगुना हुआ है। ऐसे में आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार और आर्थिक सुधार दोनों निर्णायक होंगे।
Equirus ने सुझाए 20 बड़े सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सिर्फ GDP बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। टैक्स सिस्टम, सरकारी पूंजीगत खर्च, शिक्षा, रिसर्च, रेलवे, विदेशी मुद्रा और निजी निवेश जैसे क्षेत्रों में भी बड़े सुधार करने होंगे।
रिपोर्ट में सुझाए गए प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
- ईंधन को GST के दायरे में लाना।
- राज्यों के लिए न्यूनतम पूंजीगत खर्च की व्यवस्था करना।
- भारतीय रेलवे को शेयर बाजार में लिस्ट करना।
- भारत का अपना Sovereign Wealth Fund बनाना।
- निजी शिक्षा की क्षमता बढ़ाना।
- निजी क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D को बढ़ावा देना।
- एडवांस टैक्स की व्यवस्था में बदलाव करना।
- TDS की दर को 5% तक लाने पर विचार करना।
Equirus के अनुमान के अनुसार, एडवांस टैक्स खत्म करने से करीब 10 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध हो सकती है। वहीं TDS की दर 5% करने से करीब 13.4 लाख करोड़ रुपये का वर्किंग कैपिटल रिलीज हो सकता है।
सर्विस सेक्टर बनेगा ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन
भारत की 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने की राह में सर्विस सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल GDP में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 54% है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे बढ़ाकर 65% से अधिक करना होगा।
इसके साथ ही सर्विस सेक्टर का आर्थिक योगदान मौजूदा करीब 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 11 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा करने की जरूरत होगी। IT, डिजिटल सर्विसेज, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्रोफेशनल सर्विसेज और अन्य हाई-वैल्यू सेवाएं इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
GCC की संख्या बढ़ाने पर मिलेगा बड़ा फायदा
भारत में Global Capability Centres यानी GCC तेजी से बढ़ रहे हैं। ये केंद्र वैश्विक कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी, रिसर्च, फाइनेंस और अन्य हाई-स्किल सेवाओं का काम करते हैं।
Equirus ने नेशनल GCC पॉलिसी के जरिए देश में GCC की संख्या मौजूदा करीब 1,800 से बढ़ाकर 5,000 करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे करीब 470 से 600 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पैदा हो सकता है।
इसके अलावा इससे करीब 2 से 2.5 करोड़ नए रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है। इससे भारत को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
टूरिज्म से बढ़ सकती है विदेशी मुद्रा की कमाई
20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए भारत को अपनी विदेशी मुद्रा आय भी बढ़ानी होगी। इसके लिए पर्यटन क्षेत्र को बड़ा अवसर माना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यटन को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और नीतिगत समर्थन देने से भारत को हर साल करीब 21 अरब डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सकती है।
भारत की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक पर्यटन, समुद्र तट, वन्यजीव और मेडिकल टूरिज्म को बेहतर तरीके से विकसित करने पर इस क्षेत्र की क्षमता और बढ़ सकती है।
सुधारों से हर साल 4.5 लाख करोड़ रुपये का नेट फायदा
Equirus के मुताबिक, सुझाए गए सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर हर साल करीब 7.9 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हो सकता है। वहीं इन सुधारों को लागू करने की अनुमानित लागत करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये होगी।
इस तरह संभावित शुद्ध लाभ करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये सालाना रह सकता है।
सिर्फ तेज GDP ग्रोथ से नहीं पूरा होगा लक्ष्य
भारत के लिए 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना एक लंबी अवधि का लक्ष्य है। इसके लिए सिर्फ तेज GDP ग्रोथ ही पर्याप्त नहीं होगी। रुपये की स्थिरता और मजबूती, सर्विस सेक्टर का विस्तार, निजी निवेश, R&D, शिक्षा, पर्यटन और GCC जैसे क्षेत्रों में एक साथ सुधार करना होगा।
Equirus की रिपोर्ट का संकेत साफ है कि 2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। अगर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज रहती है और प्रस्तावित संरचनात्मक सुधार प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत और बढ़ सकती है।


