Success Story of Aakash Maan and Karunesh Maan: दिल्ली के दो भाइयों आकाश मान और करुणेश मान ने अपने अनूठे आइडिया को एक सफल बिजनेस वेंचर में बदल दिया। डीटीसी बस कंडक्टर के बेटों ने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया, जो शहरों के हुनरमंद प्रोफेशनल्स को ग्रामीण भारत से जोड़ता है। आज उनका स्टार्टअप करीब 1 करोड़ रुपये का सालाना रेवेन्यू कमा रहा है।
नई दिल्ली: अगर सही आइडिया और उसे जमीन पर उतारने का हौसला हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है। दिल्ली के रहने वाले दो भाइयों आकाश मान और करुणेश मान की कहानी इसका शानदार उदाहरण है। दोनों ने मिलकर ‘वॉलेंटियर यात्रा’ नाम का ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया, जो शहरों के हुनरमंद प्रोफेशनल्स को गांवों के होमस्टे, स्कूलों और सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स से जोड़ता है।
इस मॉडल में प्रोफेशनल्स यानी यात्रियों को गांवों में मुफ्त रहने और खाने की सुविधा मिलती है। इसके बदले वे ग्रामीण इलाकों में अपनी प्रोफेशनल सेवाएं देते हैं। आज यह पहल करीब 1 करोड़ रुपये के सालाना रेवेन्यू वाले बिजनेस में बदल चुकी है। इसके जरिए यात्रियों ने ग्रामीण भारत में 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की प्रोफेशनल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं।
कोरोना महामारी में आया बिजनेस आइडिया

आकाश और करुणेश का बचपन दिल्ली के एक लोअर-मिडिल-क्लास परिवार में बीता। उनके पिता दिल्ली परिवहन निगम यानी DTC में बस कंडक्टर थे। कॉलेज के दिनों में दोनों भाइयों ने छोटे-मोटे बिजनेस से शुरुआत की और इसी दौरान फोटोग्राफी तथा मार्केटिंग का अनुभव हासिल किया। बाद में दोनों ने अपनी एजेंसी भी शुरू की।
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान जब कारोबार लगभग ठप हो गया, तब उन्हें अपने बिजनेस आइडिया की नई दिशा मिली। दोनों ने हिमाचल प्रदेश के एक होमस्टे मालिक की मुफ्त ऑनलाइन मार्केटिंग में मदद की। इसके बदले होमस्टे मालिक ने उन्हें जिंदगीभर मुफ्त रहने और खाने का न्योता दिया।
यही अनुभव दोनों भाइयों के लिए टर्निंग प्वाइंट बन गया। उन्होंने सोचा कि अगर शहरों के हुनरमंद लोग गांवों में जाकर अपनी सेवाएं दें और बदले में उन्हें रहने-खाने की सुविधा मिले, तो इससे दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है। इसी सोच से वॉलेंटियर यात्रा का आइडिया सामने आया।
2021 में शुरू किया स्टार्टअप
जनवरी 2021 में दोनों भाइयों ने अपने स्टार्टअप की शुरुआत की। हालांकि, शुरुआती सफर आसान नहीं था। पहले दो वर्षों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा और साल 2023 तक बिजनेस की ग्रोथ लगभग रुक गई थी।
लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी। मई 2023 में उन्होंने बिजनेस को एक डेडिकेटेड वेब प्लेटफॉर्म के तौर पर नए सिरे से लॉन्च किया। री-लॉन्च के बाद कंपनी ने तेजी से ग्रोथ दर्ज की और हर साल करीब 3.5 गुना की दर से बढ़ने लगी।
कैसे काम करता है ‘वॉलेंटियर यात्रा’ मॉडल?

वॉलेंटियर यात्रा एक मेंबरशिप मॉडल पर काम करता है। इसके तहत सदस्य करीब 2,240 रुपये प्लस GST की सालाना फीस देकर एक साल तक असीमित वॉलेंटियर ट्रिप्स कर सकते हैं।
प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को ग्रामीण इलाकों में होमस्टे और अन्य जगहों पर रहने-खाने की सुविधा मिलती है। बदले में वे अपने कौशल के अनुसार स्थानीय लोगों, स्कूलों, होमस्टे या छोटे कारोबारों की मदद करते हैं।
इसमें मार्केटिंग, कंटेंट, ब्रांडिंग, फोटोग्राफी और फिल्ममेकिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। कंपनी वॉलेंटियर्स और होस्ट्स दोनों के लिए सुरक्षा तथा सांस्कृतिक ट्रेनिंग पर भी जोर देती है।
शुरुआत में पिता बिजनेस से खुश नहीं थे
दोनों भाइयों के लिए बिजनेस शुरू करना सिर्फ आर्थिक चुनौती नहीं था। परिवार को भी उनके फैसले पर भरोसा दिलाना पड़ा। आकाश ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उनके माता-पिता को उनके बिजनेस के बारे में पता चला तो उनके पिता शुरुआत में थोड़े अप्रसन्न थे।
हालांकि, समय के साथ जब बिजनेस का मॉडल काम करने लगा और दोनों भाइयों ने सफलता हासिल की तो परिवार ने उनका पूरा समर्थन किया।
1 करोड़ रुपये तक पहुंचा सालाना रेवेन्यू

आज वॉलेंटियर यात्रा का नेटवर्क काफी बड़ा हो चुका है। स्टार्टअप 45 से अधिक डेस्टिनेशन तक पहुंच गया है। प्लेटफॉर्म से 11,000 से ज्यादा वॉलेंटियर्स और 2,000 से अधिक ग्रामीण होस्ट्स जुड़े हैं।
कंपनी के मुताबिक, इसके जरिए 73 कैटेगरी में 9,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा चुके हैं। यात्रियों ने रहने और खाने पर करीब 8 करोड़ रुपये की बचत की है।
दूसरी ओर ग्रामीण होमस्टे, स्कूलों और छोटे कारोबारों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग, कंटेंट और फिल्ममेकिंग जैसी सेवाओं के रूप में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की वैल्यू मिली है।
री-लॉन्च के समय कंपनी का सालाना रेवेन्यू करीब 18-20 लाख रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1 करोड़ रुपये हो गया है।
अब कॉर्पोरेट कर्मचारियों को भी जोड़ने की तैयारी
कंपनी अब अपने मॉडल का विस्तार करने की तैयारी में है। हाल ही में कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए ‘वीकेंड वॉलेंटियरिंग प्रोग्राम’ शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ना है, जो लंबी छुट्टी लिए बिना सामाजिक बदलाव में योगदान देना चाहते हैं।
अगले 18 महीनों में कंपनी का लक्ष्य प्लेटफॉर्म पर 10,000 ग्रामीण होस्ट्स और 1 लाख वॉलेंटियर्स जोड़ना है। इसके साथ कंपनी करीब 22 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य लेकर चल रही है।
कमाई से बड़ा है बदलाव का मकसद

आकाश और करुणेश की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप के सफल होने की कहानी नहीं है। उन्होंने ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया है, जिसमें एक तरफ शहरों के प्रोफेशनल्स को यात्रा का नया अनुभव मिलता है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों को जरूरी प्रोफेशनल सेवाएं मिलती हैं।
दोनों भाइयों का मानना है कि उनका असली उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। वे शहरों के ज्ञान और ग्रामीण भारत की जरूरतों के बीच की दूरी कम करके गांवों में नए अवसर पैदा करना चाहते हैं। यही सोच उनके बिजनेस को पारंपरिक ट्रैवल प्लेटफॉर्म से अलग बनाती है।


