Independence Day 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रध्वज फहराया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके 12 स्वतंत्रता दिवस समारोहों को जोड़ें तो शासन प्रमुख के तौर पर तिरंगा फहराने का उनका सिलसिला 25 बार तक पहुंच गया है। इसी के साथ नरेंद्र मोदी ने लगातार 25 बार झंडोत्तोलन का नया रिकॉर्ड बनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनका 13वां स्वतंत्रता दिवस समारोह था। इससे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी मोदी 12 बार राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रध्वज फहरा चुके हैं। इस तरह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक शासन के शीर्ष पद पर रहते हुए उनके लगातार झंडोत्तोलन की संख्या 25 हो गई है।
मोदी के नाम यह उपलब्धि ऐसे समय दर्ज हुई है, जब वह अपने प्रशासनिक जीवन के भी 25 वर्ष पूरे करने के करीब हैं। 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने वाले नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2026 में शासन के शीर्ष पर अपनी 25 साल की यात्रा पूरी करेंगे।
24 बार के रिकॉर्ड से आगे निकले मोदी

लंबे समय तक किसी राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु, सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नाम रहा। इन नेताओं ने लगातार 24 बार झंडोत्तोलन किया।
ज्योति बसु ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर जून 1977 से नवंबर 2000 के बीच यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके बाद सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी लगातार 24 बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया।
अब नरेंद्र मोदी इनसे आगे निकल गए हैं। हालांकि उनके मामले में यह गणना मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पदों पर रहते हुए किए गए झंडोत्तोलन को जोड़कर होती है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 बार और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर 13 बार तिरंगा फहराने के साथ यह संख्या 25 तक पहुंच गई है।
25 साल की प्रशासनिक यात्रा भी पूरी होने वाली
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा के लिहाज से भी 2026 खास साल है। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर पहली बार शपथ ली थी। इसके बाद लगातार चुनावी सफलताओं के जरिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर लंबा कार्यकाल पूरा किया और मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने।
मोदी से पहले किसी मुख्यमंत्री के लगातार सबसे लंबे समय तक शासन प्रमुख बने रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था। चामलिंग करीब 24 साल 165 दिन तक सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे। नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर कुल प्रशासनिक कार्यकाल के मामले में यह रिकॉर्ड पहले ही पीछे छोड़ दिया है।
अब 2026 में उनके सामने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है—शासन के शीर्ष पर 25 वर्ष।
स्वतंत्रता दिवस को ‘जन उत्सव’ बनाने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की एक खास पहचान बड़े लक्ष्यों और भविष्य की योजनाओं का ऐलान रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने स्वतंत्रता दिवस को केवल सरकारी औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय जनता से संवाद और विकास के संकल्प का अवसर बनाने की कोशिश की।
2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्हें पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज फहराने का अवसर मिला, तब राज्य गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा था। इसके बावजूद मोदी ने अपने संबोधन में शिक्षा, सुशासन और विकास जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
उस समय उन्होंने ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों तक आधुनिक शिक्षा पहुंचाने के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल की बात कही थी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, मदरसों के आधुनिकीकरण और सीमावर्ती इलाकों में सैनिक स्कूलों को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी उठाए थे।
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या बढ़ाने और गुजराती, हिंदी के साथ अंग्रेजी भाषा के ज्ञान पर जोर देने की उनकी सोच भी उस समय चर्चा में रही थी। उनका जोर था कि गुजरात के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में खुद को मजबूत स्थिति में ला सकें।
2002 में ही ‘सुशासन’ को बनाया था मूल मंत्र
2002 के अपने शुरुआती स्वतंत्रता दिवस संबोधन में नरेंद्र मोदी ने विकास के साथ-साथ सुशासन पर भी जोर दिया था। उनका तर्क था कि राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद देश और राज्यों के लिए बेहतर प्रशासन और सुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आगे चलकर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके शासन की पहचान विकास और सुशासन से जुड़ी। इसी दौरान ‘गुजरात मॉडल’ को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री पद संभाला।
प्रधानमंत्री बनने के बाद लाल किले से उनके स्वतंत्रता दिवस संबोधन में भी बड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दे लगातार केंद्र में रहे हैं।
पाटण से शुरू हुई एक अलग परंपरा
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर एक और परंपरा को बढ़ावा दिया। 2003 में गुजरात का राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह अहमदाबाद या गांधीनगर के बजाय पाटण में आयोजित किया गया।
पाटण गुजरात की ऐतिहासिक और प्राचीन राजधानी रहा है। वहां राज्य स्तरीय समारोह आयोजित होने से स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को राजधानी या सबसे बड़े शहर तक सीमित रखने की परंपरा से अलग संदेश गया।
शहर में बड़े स्तर पर सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में लोग समारोह में पहुंचे। इसके बाद गुजरात के अलग-अलग शहरों और जिलों में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने की परंपरा आगे बढ़ी।
2026 में भी गुजरात में राज्य स्तरीय 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अहमदाबाद या गांधीनगर के बजाय अमरेली में आयोजित किया जा रहा है।
भुज में 2013 में दिया था लाल किले तक पहुंचने का संकेत

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने आखिरी बार 15 अगस्त 2013 को कच्छ के भुज में तिरंगा फहराया था। उस कार्यक्रम के दौरान उनके भाषण और कार्यक्रम स्थल पर लगे पोस्टरों में राष्ट्रीय राजनीति को लेकर भी संकेत दिखाई दिए।
इसके ठीक एक साल बाद तस्वीर बदल चुकी थी। 15 अगस्त 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया।
उस समय लाल किले से उनके भाषण में स्वच्छ भारत अभियान, खुले में शौच की समस्या और देश में स्वच्छता को लेकर बड़ा अभियान चलाने की बात प्रमुखता से सामने आई। लाल किले से शौचालय निर्माण और स्वच्छता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दिए जाने पर उस समय राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी।
लेकिन यही मोदी की स्वतंत्रता दिवस भाषण शैली की पहचान भी बन गई—बड़े मंच से ऐसे मुद्दों को उठाना, जिन्हें वे आम लोगों के दैनिक जीवन से जोड़कर देखते हैं।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
2026 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को एक बार फिर प्रमुखता दी। उन्होंने देश की सामूहिक शक्ति को विकास की दिशा में लगाने की बात कही।
मोदी ने युवाओं, किसानों और महिलाओं के साथ-साथ Gen-Z को भी भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण ताकत के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने युवाओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में घोषणाएं कीं। इनमें फ्री ऑनलाइन कोचिंग और एआई ट्रेनिंग जैसे विषय भी शामिल रहे।
यह संकेत साफ है कि सरकार आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल शिक्षा और नई तकनीक को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहती है।
‘सप्तधारा’ के सहारे विकसित भारत की राह
इस बार के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘सप्तधारा’ के जरिए विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का विजन सामने रखा। इसका मूल उद्देश्य देश की अलग-अलग शक्तियों को एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ना है।
मोदी के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल आबादी ही नहीं, बल्कि युवाओं की ऊर्जा, किसानों की क्षमता, महिलाओं की भागीदारी, तकनीकी कौशल और देश की सामूहिक शक्ति है।
यही कारण है कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों के लिए युवाओं और Gen-Z को विशेष रूप से जोड़ने की कोशिश की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीक में भारत के युवाओं को आगे बढ़ाने पर जोर इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
25वीं बार का झंडोत्तोलन बना खास
15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह नरेंद्र मोदी के लिए कई मायनों में खास रहा। एक तरफ प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने लाल किले से 13वीं बार तिरंगा फहराया, तो दूसरी तरफ गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में किए गए 12 झंडोत्तोलनों को जोड़ने पर उनकी संख्या 25 तक पहुंच गई।
इस तरह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक शासन प्रमुख के रूप में लगातार 25 स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का एक नया आंकड़ा उनके नाम जुड़ गया।
नरेंद्र मोदी की प्रशासनिक यात्रा भी अब 25 साल पूरे करने के करीब है। 7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुई यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री से होते हुए देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची और 2026 में अपने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ी है।
मोदी के लिए स्वतंत्रता दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं रहा है। उनके भाषणों में लगातार भविष्य के लक्ष्य, नई योजनाएं और विकास का रोडमैप दिखाई देता है। 2026 में भी यही सिलसिला जारी रहा—2047 के विकसित भारत के लक्ष्य, युवाओं और Gen-Z की भागीदारी, किसानों और महिलाओं की शक्ति तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों को विकास की धारा से जोड़ने पर जोर दिया गया।
अब देखना यह होगा कि स्वतंत्रता दिवस के मंच से घोषित ये लक्ष्य आने वाले वर्षों में जमीन पर किस तरह आकार लेते हैं और भारत की विकास यात्रा को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं।


