अंतरिक्ष में खगोलविदों को एक बेहद रहस्यमयी वस्तु मिली है, जिसे संभावित ‘ब्लैक होल स्टार’ कहा जा रहा है। JWST से देखी गई यह वस्तु बिग बैंग के करीब 66 करोड़ साल बाद की है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसके केंद्र में तेजी से पदार्थ निगल रहा ब्लैक होल हो सकता है, जिसके चारों ओर बेहद घनी गैस की परत मौजूद है।
ब्रह्मांड के शुरुआती दौर को लेकर वैज्ञानिकों के सामने आज भी कई बड़े सवाल हैं। इनमें सबसे अहम सवाल यह है कि ब्रह्मांड के जन्म के कुछ ही करोड़ों वर्षों के भीतर इतने विशाल ब्लैक होल आखिर इतनी तेजी से कैसे बन गए। अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से मिली एक बेहद असामान्य वस्तु इस रहस्य की एक नई कड़ी पेश कर रही है।
वैज्ञानिकों ने इस वस्तु को MoM-BH-1* नाम दिया है। इसे संभावित ‘ब्लैक होल स्टार’ (Black Hole Star) के रूप में देखा जा रहा है। यह नाम सुनने में किसी ऐसे तारे जैसा लगता है, जिसके अंदर ब्लैक होल मौजूद हो, लेकिन वैज्ञानिकों के मॉडल के मुताबिक इसकी असली प्रकृति इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है। संभावना है कि इसके केंद्र में एक भारी ब्लैक होल हो और उसके चारों ओर अत्यधिक घनी गैस का ऐसा आवरण हो, जो बाहर से इसे किसी चमकीले तारे जैसा बना देता है।
करीब 66 करोड़ साल पुराने ब्रह्मांड की तस्वीर
NEWS 🚨: Astronomers have discovered an entirely new type of cosmic object called a "black hole star"
It's the size of our solar system, emits 100 billion times more energy than any star, and may finally explain JWST's mysterious "little red dots" pic.twitter.com/uBILVcoGdF
— Latest in space (@latestinspace) August 13, 2026 MoM-BH*-1 को हम उस समय का देख रहे हैं जब ब्रह्मांड की उम्र बिग बैंग के बाद करीब 660 मिलियन साल यानी 66 करोड़ साल थी। इसकी स्पेक्ट्रोस्कोपिक रेडशिफ्ट लगभग z=7.76 मापी गई है। इसका मतलब है कि JWST वास्तव में हमें ब्रह्मांड के बेहद शुरुआती दौर की झलक दे रहा है।
इस वस्तु की खासियत सिर्फ इसकी उम्र नहीं है। इसका प्रकाश और स्पेक्ट्रम सामान्य तारों या सामान्य सक्रिय आकाशगंगीय नाभिक (AGN) से अलग दिखाई देता है। इसके स्पेक्ट्रम में बेहद मजबूत Balmer break, चौड़ी हाइड्रोजन रेखाएं और कई असामान्य विशेषताएं देखी गई हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसके लिए एक अलग तरह का मॉडल तलाश रहे हैं।
क्या है ‘ब्लैक होल स्टार’?
‘ब्लैक होल स्टार’ को फिलहाल किसी सामान्य तारे की तरह नहीं समझना चाहिए। वैज्ञानिकों के एक प्रमुख मॉडल के अनुसार, इसके केंद्र में एक ब्लैक होल हो सकता है जो आसपास की गैस को तेजी से अपनी ओर खींच रहा है। इस ब्लैक होल के चारों ओर घनी और गर्म गैस की परत मौजूद हो सकती है।
जब गैस ब्लैक होल की ओर गिरती है, तो वह अत्यधिक ऊर्जा छोड़ सकती है। यही ऊर्जा उस घने गैसीय आवरण को गर्म कर सकती है और पूरी वस्तु को बाहर से किसी विशाल चमकीले तारे जैसा दिखा सकती है।
यानी इसकी चमक का स्रोत सामान्य तारों की तरह न्यूक्लियर फ्यूजन होना जरूरी नहीं है। इसके बजाय ब्लैक होल पर गिरने वाला पदार्थ इसकी ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हो सकता है। इसी ‘तारे जैसी बाहरी शक्ल लेकिन ब्लैक होल से संचालित ऊर्जा’ वाली विशेषता के कारण इसे Black Hole Star कहा गया है।
करीब 1 लाख सूर्यों जितना ब्लैक होल?
इस खोज से जुड़ी लोकप्रिय रिपोर्टों में MoM-BH*-1 के अंदर मौजूद ब्लैक होल का अनुमान करीब 1 लाख सौर द्रव्यमान यानी 100,000 सूर्यों के बराबर बताया गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई सीधे तौला गया पक्का आंकड़ा नहीं है। ब्लैक होल के वास्तविक द्रव्यमान और इस पूरे सिस्टम की संरचना को लेकर अभी वैज्ञानिक मॉडल और अनुमान ही मौजूद हैं।
कुछ अन्य अध्ययनों में BH* जैसी वस्तुओं के लिए लगभग 10 लाख सौर द्रव्यमान तक के मॉडल भी इस्तेमाल किए गए हैं। इसलिए इस वस्तु के द्रव्यमान को एक निश्चित संख्या के बजाय संभावित मॉडल के रूप में समझना ज्यादा सही है।
100 अरब गुना चमक की बात कितनी सही?
इस खोज को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह वस्तु सूर्य से करीब 100 अरब गुना ज्यादा चमकदार हो सकती है। यहां भी ‘चमक’ को सामान्य दृश्य चमक के अर्थ में नहीं लेना चाहिए। खगोल विज्ञान में किसी दूरस्थ वस्तु की कुल luminosity और किसी खास wavelength पर उसकी brightness अलग-अलग तरीके से मापी जाती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों में MoM-BH*-1 को अत्यधिक luminous स्रोत बताया गया है और इसके लिए करीब 10^6 सौर द्रव्यमान के सुपरमैसिव स्टार मॉडल ने इसके देखे गए luminosity को समझाने की क्षमता दिखाई है। वहीं BH* मॉडलों में ब्लैक होल की accretion से निकलने वाली ऊर्जा को मुख्य स्रोत माना जाता है।
इसलिए ‘100 अरब गुना शक्तिशाली’ जैसी हेडलाइन आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से अत्यधिक चमकीली और ऊर्जावान वस्तु के तौर पर समझना ज्यादा उचित होगा।
JWST के ‘Little Red Dots’ से क्या संबंध है?
James Webb Space Telescope ने शुरुआती ब्रह्मांड में कई छोटे, लाल और बेहद चमकीले स्रोत देखे हैं। इन्हें वैज्ञानिकों ने अनौपचारिक रूप से ‘Little Red Dots’ (LRDs) कहा है। इन वस्तुओं की प्रकृति पिछले कुछ वर्षों से खगोलविदों के लिए बड़ी पहेली बनी हुई है।
MoM-BH*-1 की खासियत यह है कि इसके स्पेक्ट्रम में तारे जैसी और ब्लैक होल जैसी दोनों विशेषताएं दिखाई देती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि कुछ Little Red Dots के केंद्र में इसी तरह के गैस से घिरे ब्लैक होल मौजूद हो सकते हैं।
2026 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में भी ऐसे BH*-dominated स्रोतों की पहचान अलग-अलग redshifts पर की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ऐसे उम्मीदवार केवल शुरुआती ब्रह्मांड तक सीमित नहीं हो सकते और लगभग z=1.7 से z=9.3 तक देखे जा सकते हैं। हालांकि, हर Little Red Dot को Black Hole Star मान लेना अभी जल्दबाजी होगी।
वैज्ञानिकों के सामने अभी भी कई सवाल
इस खोज को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि ‘Black Hole Star’ अभी कोई अंतिम रूप से प्रमाणित नई श्रेणी नहीं है। यह एक ऐसा मॉडल या व्याख्या है जो MoM-BH*-1 जैसी असामान्य वस्तुओं के अवलोकनों को समझाने की कोशिश करती है।
कुछ अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसी तरह के स्पेक्ट्रम को supermassive stars के मॉडल से भी समझाने की कोशिश की है। एक अध्ययन में करीब 10^6 सौर द्रव्यमान वाले supermassive star मॉडल ने MoM-BH*-1 के luminosity और कुछ spectral features को अच्छी तरह reproduce किया।
यानी अभी वैज्ञानिकों के सामने कम से कम दो दिलचस्प संभावनाएं हैं—एक तरफ घनी गैस में छिपा तेजी से बढ़ता ब्लैक होल और दूसरी तरफ अत्यधिक विशाल तारे का मॉडल। आने वाले अधिक संवेदनशील अवलोकन यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि इनमें से कौन-सी व्याख्या वास्तविकता के ज्यादा करीब है।
शुरुआती ब्रह्मांड के ब्लैक होल का रहस्य हो सकता है हल
अगर Black Hole Star की व्याख्या सही साबित होती है, तो इसका महत्व केवल एक नई अंतरिक्षीय वस्तु खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड में ब्लैक होल इतनी तेजी से कैसे बढ़े।
आज आकाशगंगाओं के केंद्र में अरबों सूर्यों के बराबर द्रव्यमान वाले सुपरमैसिव ब्लैक होल पाए जाते हैं। समस्या यह है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में इनके लिए इतना बड़ा बनने का समय बेहद कम था। इसलिए वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसे ‘बीज’ की तलाश कर रहे हैं, जो बहुत कम समय में विशाल ब्लैक होल में बदल सके।
MoM-BH*-1 जैसी वस्तुएं संभवतः इसी विकास की किसी शुरुआती अवस्था की ओर इशारा कर सकती हैं। घनी गैस से घिरे ब्लैक होल को अगर लगातार भारी मात्रा में पदार्थ मिलता रहा हो, तो वह तेजी से बढ़ सकता है।
फिलहाल वैज्ञानिक इस खोज को लेकर उत्साहित जरूर हैं, लेकिन इसे अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। MoM-BH-1 एक बेहद मजबूत उम्मीदवार और महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है, लेकिन ‘ब्लैक होल स्टार’ की वास्तविक प्रकृति को समझने के लिए और अवलोकनों की जरूरत है।* JWST से मिली यह खोज इतना जरूर दिखाती है कि शुरुआती ब्रह्मांड हमारी मौजूदा कल्पना से कहीं ज्यादा विचित्र और जटिल था।


