Income Tax Notice: इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) सूरत बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि बैंक खाते में जमा हर रकम को सीधे टैक्स योग्य आय नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग की उस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जिसमें एक फल कारोबारी की घोषित आय से कई गुना ज्यादा आय का आकलन कर दिया गया था।
सूरत के फल व्यापारी ने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में 14.57 लाख रुपये की व्यावसायिक आय घोषित की थी। हालांकि, आयकर विभाग ने बैंक खातों में जमा रकम के आधार पर उसकी कुल आय करीब 5.09 करोड़ रुपये मान ली। यह घोषित आय से 34 गुना से भी ज्यादा थी।
मामला जब ITAT सूरत बेंच पहुंचा तो ट्रिब्यूनल ने पाया कि टैक्स अधिकारी (Assessing Officer) द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी थी और वे बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सूरत के फल कारोबारी जाकिर याकूबभाई पटेल से जुड़ा है। कारोबारी ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय आयकर कानून की धारा 44AD के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का विकल्प चुना था।
इस स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को अनुमानित आधार पर आय घोषित करने की सुविधा मिलती है और उन्हें नियमित बही-खाते रखने की जरूरत नहीं होती।
मामले में आयकर विभाग ने नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में हुए कैश डिपॉजिट के आधार पर जांच शुरू की।
टैक्स अधिकारी ने आकलन करते हुए:
- करीब 2.43 करोड़ रुपये बैंक डिपॉजिट और क्रेडिट के रूप में जोड़े।
- करीब 71.87 लाख रुपये अनसिक्योर्ड लोन के रूप में शामिल किए।
- लगभग 1.79 करोड़ रुपये लोन और एडवांस के तौर पर जोड़ दिए।
इन सभी को मिलाकर कारोबारी की कुल आकलित आय करीब 5.09 करोड़ रुपये कर दी गई।
जबकि कारोबारी ने अपने ITR में सिर्फ 14.57 लाख रुपये की आय घोषित की थी।
ITAT ने पकड़ी टैक्स अधिकारी की गलती
कारोबारी ने ITAT के सामने दलील दी कि आयकर अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए आंकड़े गलत हैं। उनके अनुसार बैंक खाते में वास्तविक कैश डिपॉजिट 2.43 करोड़ रुपये नहीं बल्कि केवल 89.16 लाख रुपये था।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन अनसिक्योर्ड लोन को आय माना गया है, वे पुराने वर्षों से जुड़े हुए थे और उन्हें वर्तमान वर्ष की आय नहीं माना जा सकता।
ITAT ने जांच में पाया कि टैक्स अधिकारी के आंकड़े बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। ट्रिब्यूनल ने माना कि केवल बैंक खाते में रकम जमा होने के आधार पर उसे टैक्स योग्य आय नहीं बनाया जा सकता।
धारा 44AD लेने वालों के लिए अहम संदेश
ITAT ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि धारा 44AD के तहत रिटर्न दाखिल करने का मतलब यह नहीं है कि बैंक खाते में आने वाली हर रकम को व्यवसायिक आय मान लिया जाए।
हर जमा राशि की प्रकृति और स्रोत की जांच जरूरी है। यदि कोई रकम लोन, पुराने बैलेंस, पूंजी या किसी अन्य स्रोत से आई है तो उसे बिना जांच के टैक्स योग्य आय नहीं माना जा सकता।
मामला दोबारा जांच के लिए भेजा गया
ITAT ने आयकर विभाग के आकलन को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और मामले को दोबारा जांच के लिए Assessing Officer के पास भेज दिया।
ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि बैंक रिकॉर्ड, जमा राशि के स्रोत और कारोबारी की वास्तविक आय की सही तरीके से जांच की जाए।
यह फैसला छोटे कारोबारियों और उन टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके बैंक खातों में बड़ी रकम का लेन-देन होता है लेकिन हर जमा राशि उनकी आय नहीं होती।


