धनिया की कीमतों में भारी उछाल, 220 रुपये किलो के पार पहुंचा भाव; अदरक-लहसुन भी हुए महंगे
Coriander Price Hike: भारतीय रसोई में धनिया सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली चीज नहीं, बल्कि सब्जी खरीदते समय मिलने वाली एक छोटी सी खुशी भी रही है। अक्सर ग्राहक सब्जी वाले से कहते हैं- “भैया थोड़ा धनिया और डाल देना।” लेकिन अब यही बात दुकानदार को परेशान कर सकती है, क्योंकि धनिया के भाव तेजी से बढ़ गए हैं।
भारी बारिश और सप्लाई चेन में आई रुकावट के कारण कई शहरों में धनिया की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। कुछ बाजारों में इसका खुदरा भाव 220 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर चला गया है। वहीं, अदरक, लहसुन और प्याज जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में भी पिछले साल के मुकाबले बड़ा उछाल देखने को मिला है।
बारिश ने बिगाड़ी धनिया की सप्लाई
धनिया की कीमतों में अचानक तेजी का सबसे बड़ा कारण भारी बारिश को माना जा रहा है। महाराष्ट्र के नासिक समेत कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश के कारण खेतों से मंडियों तक सप्लाई प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, थोक बाजार में धनिया की कीमत करीब 175 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि खुदरा बाजार में इसका भाव 220-230 रुपये किलो के आसपास पहुंच गया है।
धनिया एक जल्दी खराब होने वाली फसल है। इसे खेत से मंडी और फिर ग्राहकों तक कम समय में पहुंचाना जरूरी होता है। बारिश के कारण सड़क, परिवहन और फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ने से इसकी उपलब्धता कम हो गई है।
अदरक-लहसुन की कीमतों में भी तेजी
सिर्फ धनिया ही नहीं, बल्कि रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली कई दूसरी चीजें भी महंगी हो गई हैं।
- अदरक की महंगाई दर जून में 50.41% थी, जो जुलाई में बढ़कर 83.62% हो गई।
- लहसुन की महंगाई दर 17.93% से बढ़कर 35.36% पहुंच गई।
- प्याज की महंगाई दर 4.73% से बढ़कर 22.54% हो गई।
इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
खाने-पीने की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी
रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब खाद्य महंगाई दर भी ऊपर जा रही है।
जून में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 5.32% थी, जो जुलाई में बढ़कर 5.52% हो गई।
हालांकि सभी सब्जियों के दाम नहीं बढ़े हैं। उदाहरण के लिए:
- आलू की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 16.56% की गिरावट आई है।
- टमाटर और मटर के दाम भी कुछ नरम हुए हैं।
यानी महंगाई का दबाव हर सब्जी पर समान नहीं है, बल्कि अलग-अलग फसलों की सप्लाई स्थिति के आधार पर कीमतें बदल रही हैं।
मॉनसून के बदलते पैटर्न का असर
इस साल मॉनसून का व्यवहार काफी असामान्य रहा है। शुरुआती दौर में जून महीने में बारिश सामान्य से काफी कम रही। इसके बाद जुलाई में कुछ क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश हुई, जबकि कई इलाकों में बारिश की कमी बनी रही।
भारत की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर है। ऐसे में लंबे सूखे और अचानक भारी बारिश दोनों ही फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
धनिया, हरी मिर्च और दूसरी हरी सब्जियां ऐसी फसलें हैं जिन पर मौसम में बदलाव का असर सबसे जल्दी दिखाई देता है।
अल नीनो बढ़ा सकता है चिंता
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति मॉनसून के दूसरे हिस्से में अनिश्चितता बढ़ा सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी सामान्य से कम या असमान बारिश को खाद्य महंगाई के लिए बड़ा जोखिम मान चुका है। खाद्य पदार्थों का हिस्सा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधा है।
अगर बारिश का पैटर्न आगे भी अनिश्चित रहा, तो सब्जियों के साथ-साथ दालों और अनाज की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
दालों और चावल पर भी असर
मौसम की मार सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है। दालों की बुवाई पर भी इसका असर पड़ा है।
कम बारिश और बुवाई में देरी के कारण दालों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। सरकार ने भी दालों की कीमतों पर नजर बढ़ाई है।
वहीं, चावल की कीमतों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में चावल की औसत खुदरा कीमत मई में 42.92 रुपये प्रति किलो से बढ़कर जुलाई में 44.35 रुपये प्रति किलो हो गई।
आगे क्या होगा धनिया का भाव?
मौसम की स्थिति और सप्लाई में सुधार पर धनिया समेत हरी सब्जियों की कीमतें निर्भर करेंगी। अगर बारिश कम होती है और मंडियों में आवक सामान्य होती है तो कीमतों में राहत मिल सकती है।
लेकिन अगर भारी बारिश और सप्लाई बाधाएं जारी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में धनिया, अदरक, लहसुन जैसी रसोई की जरूरी चीजें महंगी बनी रह सकती हैं।


