Kids Focus Tips: आज के समय में बच्चों का पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकना माता-पिता के लिए एक आम चिंता बन गया है। टीवी, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, वीडियो गेम और लगातार मिलने वाले नोटिफिकेशन बच्चों के ध्यान को आसानी से दूसरी तरफ ले जाते हैं। इसके अलावा, अगर कोई विषय बच्चे को कठिन या उबाऊ लगता है तो लंबे समय तक किताब के सामने बैठना भी उसके लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में केवल बच्चे को बार-बार पढ़ने के लिए कहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी रोजमर्रा की आदतों में कुछ छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव करना भी जरूरी है।
बच्चे की पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए फोकस, एकाग्रता और याददाश्त तीनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। फोकस का अर्थ किसी खास काम या विचार पर ध्यान लगाना है, जबकि एकाग्रता का मतलब उस ध्यान को कुछ समय तक बनाए रखने की क्षमता है। वहीं याददाश्त किसी जानकारी को समझने, सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उसे दोबारा याद करने में मदद करती है। ये तीनों क्षमताएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं और नियमित अभ्यास के साथ बेहतर की जा सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में ध्यान और एकाग्रता विकसित करना कोई एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि, सही खान-पान और माता-पिता का सहयोग जरूरी है। संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल्स के शिक्षक और ट्रस्टी प्रणीत मुंगाली ने बच्चों की याददाश्त और फोकस को बेहतर बनाने के लिए कुछ ऐसी आदतों पर जोर दिया है, जिन्हें उनकी रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
1. बच्चे को रोज शारीरिक गतिविधि के लिए प्रेरित करें
पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने के लिए सिर्फ किताब और कॉपी के सामने बैठे रहना जरूरी नहीं है। बच्चे के दिमाग को सक्रिय रखने में शारीरिक गतिविधियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। खेलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या हल्की एक्सरसाइज जैसी गतिविधियों को रोज की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
योग और गहरी सांस लेने की आदत भी बच्चों के लिए उपयोगी हो सकती है। वृक्षासन और वीरभद्रासन जैसे योग अभ्यास शरीर का संतुलन और नियंत्रण बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। वहीं गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज बच्चे को शांत करने और पढ़ाई से पहले अपना ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती है।
बच्चों के साथ क्रॉस-लेटरल मूवमेंट भी कराया जा सकता है। इसमें शरीर के एक हिस्से को दूसरे हिस्से के साथ क्रॉस करके गतिविधि की जाती है, जैसे दाएं हाथ या कोहनी को बाएं घुटने की ओर ले जाना। ऐसी गतिविधियों को खेल के रूप में कराया जाए तो बच्चे इसे आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
2. दिमाग को एक्टिव रखने वाले गेम्स कराएं
बच्चे का फोकस बढ़ाने के लिए हर गतिविधि का पढ़ाई से जुड़ा होना जरूरी नहीं है। कुछ मजेदार ब्रेन गेम्स भी ध्यान, याददाश्त और तर्क क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
मसलन, बच्चे को ‘अंतर पहचानो’ या किसी तस्वीर में छिपी वस्तु खोजने जैसी गतिविधियां दी जा सकती हैं। इससे उसे छोटी-छोटी चीजों को ध्यान से देखने और लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान बनाए रखने का अभ्यास मिलेगा।
इसी तरह रंगीन ब्लॉक्स, मोतियों या अलग-अलग आकार की वस्तुओं से कोई पैटर्न बनाकर बच्चे से उसे दोहराने या आगे बढ़ाने के लिए कहा जा सकता है। इस तरह की गतिविधियों में बच्चे को पहले से मौजूद क्रम याद रखना होता है और उसके आधार पर अगला पैटर्न तैयार करना होता है। इससे उसकी अनुक्रम समझने, तार्किक सोच और फोकस की क्षमता का अभ्यास होता है।
एक और दिलचस्प तरीका स्टोरी चेन एक्टिविटी है। इसमें परिवार के लोग मिलकर कहानी बनाते हैं और हर व्यक्ति उसमें एक नया वाक्य जोड़ता है। बच्चे को पहले कही गई बातों को याद रखते हुए कहानी आगे बढ़ानी होती है। इससे सुनने की क्षमता, मौखिक याददाश्त और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिल सकता है।
3. बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें
कई बार बच्चे का ध्यान इसलिए नहीं लग रहा होता क्योंकि उसके सामने रखा गया काम उसे बहुत बड़ा या मुश्किल नजर आता है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे को एक साथ पूरा अध्याय पढ़ने और उसके सवाल हल करने के लिए कहा जाए तो वह शुरुआत करने से पहले ही परेशान हो सकता है।
ऐसे में बड़े काम को छोटे और स्पष्ट चरणों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है। जैसे पहले दो पेज पढ़ने का लक्ष्य रखें, फिर उन पेजों से जुड़े कुछ सवाल हल कराएं और उसके बाद छोटा ब्रेक दें।
इस तरीके से बच्चे को हर चरण पूरा करने पर उपलब्धि का एहसास होता है। धीरे-धीरे वह बड़े काम को भी छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना सीख सकता है। इससे पढ़ाई का दबाव कम करने और काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिल सकती है।
4. पोमोडोरो तकनीक का इस्तेमाल करें
बच्चों से लगातार लंबे समय तक पढ़ने की उम्मीद करना हमेशा प्रभावी नहीं होता। खासकर छोटे बच्चों के लिए लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पोमोडोरो तकनीक को उम्र और बच्चे की क्षमता के अनुसार अपनाया जा सकता है।
इस तकनीक में एक तय समय तक बिना किसी बड़े व्यवधान के पढ़ाई या काम किया जाता है और उसके बाद छोटा ब्रेक लिया जाता है। बच्चों के लिए शुरुआत में करीब 20 से 25 मिनट पढ़ाई और फिर 5 मिनट का ब्रेक रखा जा सकता है।
ब्रेक के दौरान बच्चे को मोबाइल या वीडियो देखने देने के बजाय थोड़ा चलने, पानी पीने, स्ट्रेचिंग करने या आंखों को आराम देने के लिए कहा जा सकता है। इससे पढ़ाई के बीच मानसिक थकान कम करने और दोबारा काम पर लौटने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। इसलिए समय को बच्चे की उम्र, पढ़ाई की कठिनाई और उसकी एकाग्रता के अनुसार बदला जा सकता है।
5. पढ़ाई के लिए शांत और व्यवस्थित जगह बनाएं
बच्चे की पढ़ाई की जगह भी उसके फोकस को प्रभावित कर सकती है। अगर पढ़ाई की टेबल के आसपास टीवी चल रहा हो, मोबाइल रखा हो, लगातार लोगों की आवाजाही हो या टेबल पर बहुत सारी चीजें बिखरी हों तो बच्चे का ध्यान बार-बार टूट सकता है।
इसलिए कोशिश करें कि बच्चे के लिए शांत, साफ और व्यवस्थित स्टडी स्पेस बनाया जाए। पढ़ाई के समय मोबाइल फोन, टैबलेट और दूसरे गैर-जरूरी गैजेट्स को बच्चे से दूर रखना बेहतर हो सकता है। अगर पढ़ाई के लिए कंप्यूटर या इंटरनेट जरूरी है तो गैर-जरूरी नोटिफिकेशन और वेबसाइट्स को बंद किया जा सकता है।
माता-पिता को भी इस दौरान बच्चे को बार-बार टोकने या छोटे-छोटे कामों के लिए बुलाने से बचना चाहिए। एक निश्चित समय तक उसे बिना व्यवधान के पढ़ने का मौका देने से वह धीरे-धीरे खुद भी अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी लेना सीख सकता है।
सिर्फ पढ़ाई नहीं, नींद और खान-पान पर भी दें ध्यान
बच्चे की याददाश्त और एकाग्रता को बेहतर बनाने की कोशिश में उसकी पूरी लाइफस्टाइल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान और पर्याप्त पानी बच्चे की रोजमर्रा की ऊर्जा और मानसिक सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अगर बच्चा देर रात तक फोन या टीवी देखता है और सुबह पर्याप्त नींद नहीं ले पाता, तो अगले दिन पढ़ाई के दौरान उसका ध्यान कम लग सकता है। इसलिए उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद और नियमित सोने-जागने का समय बनाए रखना जरूरी है।
इसी तरह बच्चे के भोजन में विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाने चाहिए। दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत भी विकसित करें। इन सभी चीजों का उद्देश्य बच्चे को पढ़ाई के लिए अधिक समय तक बैठाना नहीं, बल्कि उसके लिए ऐसी स्वस्थ दिनचर्या बनाना है जिसमें पढ़ाई और आराम के बीच संतुलन बना रहे।
बच्चे को बार-बार डांटने के बजाय समझें उसकी परेशानी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर बार बच्चे का ध्यान भटकने पर उसे आलसी या लापरवाह कहना सही तरीका नहीं है। कई बार बच्चा किसी विषय को समझ नहीं पा रहा होता, थका हुआ होता है या उसे काम बहुत कठिन लग रहा होता है। ऐसी स्थिति में डांटने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि समस्या कहां आ रही है।
माता-पिता बच्चे से पूछ सकते हैं कि उसे कौन-सा विषय कठिन लगता है या पढ़ाई के दौरान किस चीज से उसका ध्यान सबसे ज्यादा भटकता है। इसके बाद धीरे-धीरे उसकी दिनचर्या में छोटे बदलाव किए जा सकते हैं।
बच्चों में फोकस बढ़ाना है तो रखें निरंतरता
बच्चे की याददाश्त और एकाग्रता को मजबूत करने के लिए कोई जादुई तरीका नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, ब्रेन गेम्स, बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटना, छोटे-छोटे ब्रेक लेना और शांत स्टडी स्पेस जैसी आदतें समय के साथ बच्चे को बेहतर अध्ययन दिनचर्या बनाने में मदद कर सकती हैं।
सबसे जरूरी है कि माता-पिता बच्चे से उसकी उम्र और क्षमता के अनुसार अपेक्षाएं रखें। हर बच्चा अलग गति से सीखता है। इसलिए तुलना और दबाव के बजाय नियमित अभ्यास, प्रोत्साहन और सहयोग पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। अगर ध्यान से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है और बच्चे की पढ़ाई या रोजमर्रा की गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ रहा है, तो शिक्षक या योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।


