34 वर्षीय MBA ग्रेजुएट ने Reddit पर अपनी नौकरी और करियर को लेकर परेशानी साझा की है। टियर-3 कॉलेज से MBA करने के बाद नौकरी की, लेकिन कमर की तकलीफ के कारण उसे जॉब छोड़नी पड़ी। अब नौकरी की तलाश के बीच आसपास के पान वाले, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और दूसरे छोटे कारोबारियों की अच्छी कमाई देखकर उसके मन में सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ डिग्री और नौकरी ही आर्थिक सफलता का रास्ता है।
नई दिल्ली: पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी और बेहतर कमाई की उम्मीद ज्यादातर युवाओं के करियर प्लान का हिस्सा होती है। लेकिन हर किसी के लिए यह रास्ता एक जैसा नहीं होता। कई बार डिग्री होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो जाता है, जबकि कम पढ़े-लिखे लोग अपने छोटे कारोबार से अच्छी कमाई करते नजर आते हैं। ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे 34 वर्षीय MBA ग्रेजुएट ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा की है।
उसके मुताबिक, टियर-3 कॉलेज से MBA करने के बाद उसने नौकरी की थी, लेकिन कमर की समस्या के चलते उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। अब वह दोबारा रोजगार पाने की कोशिश कर रहा है। लगातार आवेदन और इंटरव्यू के बावजूद उसे मनमाफिक नौकरी नहीं मिल रही। BPO और कस्टमर सपोर्ट जैसी नौकरियों में भी उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वह अब नॉन-वॉइस जॉब की तलाश कर रहा है।
पान की दुकान पर मिली 1 करोड़ की कार की जानकारी
Reddit पर साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक, एक दिन वह अपने आसपास की पान की दुकान पर गया। बातचीत के दौरान उसे दुकानदार के बारे में ऐसी जानकारी मिली, जिसने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया।
उसके मुताबिक, पान दुकानदार ने करीब 1 करोड़ रुपये की कार और दुकान खरीदी है। इसके अलावा वह अपने घर का रेनोवेशन भी करा रहा है। MBA ग्रेजुएट के लिए यह बात इसलिए चौंकाने वाली थी क्योंकि वह खुद अपनी डिग्री के बावजूद नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा है।
हालांकि, उसने यह भी साफ किया कि पान की दुकान चलाना किसी आसान नौकरी जैसा नहीं है। उसके अनुसार, दुकानदार को देर रात करीब 2 बजे सिगरेट नहीं देने पर चाकू से हमला तक झेलना पड़ा था। यानी कारोबार से कमाई के साथ जोखिम और मुश्किलें भी जुड़ी हुई हैं।
प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन को भी सफल होते देखा
पोस्ट लिखने वाले शख्स ने बताया कि उसने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जिन्होंने छोटी शुरुआत से अपना कारोबार खड़ा किया। इनमें प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पान दुकानदार, कियोस्क संचालक और जूस बेचने वाले लोग शामिल हैं।
उसके मुताबिक, इनमें से कुछ लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं और उन्होंने संपत्ति भी बनाई है। कुछ ने अपने परिवार और रिश्तेदारों को भी कारोबार से जोड़ लिया है। उसे इन कारोबारियों की एक बात खास तौर पर प्रभावित करती है—वे अपने काम के हिसाब से लगातार खुद को अपडेट करते रहते हैं और ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार करने पर ध्यान देते हैं।
यही अनुभव उसके लिए करियर को देखने का नजरिया बदलने वाला साबित हो रहा है।
कम पढ़ाई के बावजूद महंगे मोबाइल बेच रहा युवक
पोस्ट में एक ऐसे स्थानीय युवक का भी जिक्र है, जिसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की है। इसके बावजूद वह महंगे मोबाइल फोन बेचता है और ग्राहकों को बाजार से कम कीमत पर फोन उपलब्ध कराने की कोशिश करता है।
उसका कारोबार अच्छा चल रहा है। इसे देखकर 34 वर्षीय MBA ग्रेजुएट के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल डिग्री हासिल कर लेना आर्थिक सफलता की गारंटी है।
दरअसल, नौकरी और कारोबार की तुलना करते समय सिर्फ कमाई देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। कारोबार में पूंजी, जोखिम, काम के घंटे, ग्राहक, नुकसान की संभावना और आय में उतार-चढ़ाव जैसे कई पहलू होते हैं। वहीं नौकरी में आय अपेक्षाकृत स्थिर हो सकती है, लेकिन प्रमोशन, वेतन वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा जैसी चुनौतियां अलग होती हैं।
खुद का बिजनेस शुरू करने का भी विचार
34 वर्षीय शख्स ने पोस्ट में बताया कि अगर उसकी कमर की समस्या नहीं होती, तो शायद वह अब तक अपना छोटा कारोबार शुरू कर चुका होता।
कभी वह वड़ा पाव या रेमन का कियोस्क खोलने के बारे में सोचता है, तो कभी मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का विचार उसके मन में आता है। उसका मानना है कि अगर ग्राहकों को बाजार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तुलना में बेहतर कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जाए, तो कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
हालांकि, यह सिर्फ एक विचार है और वह फिलहाल नौकरी की तलाश को भी जारी रखे हुए है।
नॉन-वॉइस जॉब की तलाश में जुटा MBA ग्रेजुएट
फिलहाल उसकी प्राथमिकता ऐसी नौकरी तलाशना है जिसमें ज्यादा बोलने की जरूरत न हो। उसने BPO और कस्टमर सपोर्ट की नौकरियों के लिए भी प्रयास किया, लेकिन उसके मुताबिक इंटरव्यू के दौरान उसकी भारी आवाज को लेकर भी आपत्ति जताई गई।
ऐसे में वह अपनी टाइपिंग स्पीड सुधारने की कोशिश कर रहा है, ताकि नॉन-वॉइस प्रोफाइल में नौकरी पाने के अवसर बढ़ सकें। यह स्थिति बताती है कि नौकरी के लिए सिर्फ शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं होती। कई प्रोफाइल में कम्युनिकेशन, टेक्निकल स्किल, टाइपिंग, Excel और दूसरे व्यावहारिक कौशल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Business Analyst इंटरव्यू में Excel ने रोका रास्ता
उसने Business Analyst की नौकरी के लिए भी इंटरव्यू दिया था। वहां उससे Excel के फॉर्मूला से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका वह जवाब नहीं दे पाया।
यह अनुभव उसके लिए एक और झटका था। MBA की डिग्री होने के बावजूद जब किसी नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक स्किल में कमी सामने आती है, तो उम्मीदवार को अपनी तैयारी पर दोबारा काम करना पड़ सकता है।
पोस्ट के मुताबिक, वह अब रोज कुछ नया सीखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन नौकरी की तलाश, स्किल सीखने और निजी जिंदगी की परेशानियों के बीच वह खुद को काफी थका हुआ और उलझा हुआ महसूस कर रहा है।
डिग्री बनाम कमाई का सवाल क्यों उठा?
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बड़ी डिग्री और कॉर्पोरेट नौकरी ही सफलता का पैमाना है?
असल में, इसका कोई एक जवाब नहीं है। किसी छोटे कारोबारी की अच्छी कमाई देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर छोटा कारोबार नौकरी से ज्यादा पैसा देता है। इसी तरह MBA करने का मतलब भी यह नहीं है कि व्यक्ति को तुरंत ऊंची सैलरी वाली नौकरी मिल जाएगी।
कारोबार में सफल होने के लिए ग्राहक समझना, कीमत तय करना, सप्लाई संभालना, जोखिम उठाना और लगातार काम करना जरूरी है। दूसरी तरफ, कॉर्पोरेट करियर में भी सही स्किल, अनुभव, नेटवर्क और समय के साथ खुद को अपडेट करना अहम होता है।
इस 34 वर्षीय शख्स की परेशानी शायद इसी अंतर को दिखाती है—डिग्री एक अवसर दे सकती है, लेकिन सफलता की गारंटी नहीं। नौकरी हो या कारोबार, लंबे समय में कमाई और स्थिरता कई अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
निजी जिंदगी को लेकर भी बढ़ी चिंता
Reddit पोस्ट में इस शख्स ने करियर के अलावा अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चिंता जाहिर की। उसने बताया कि वह अभी शादीशुदा नहीं है और उसकी कोई खास फाइनेंशियल प्लानिंग भी नहीं है।
पैरों में दर्द और जल्दी थक जाने जैसी परेशानियों के कारण उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। इसके अलावा, बड़े भाई के साथ होने वाले विवाद और उनके तानों से भी वह परेशान रहता है।
नौकरी की अनिश्चितता, स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां, आर्थिक योजना की कमी और परिवार के तनाव ने उसकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
कहानी का सबक सिर्फ MBA को लेकर नहीं है
इस पोस्ट को केवल इस नजरिए से देखना सही नहीं होगा कि MBA बेकार है या पान की दुकान MBA से बेहतर है। असल कहानी इससे कहीं ज्यादा व्यापक है।
करियर में सफलता केवल डिग्री, कॉलेज या नौकरी के नाम से तय नहीं होती। किसी व्यक्ति के लिए नौकरी बेहतर विकल्प हो सकती है, जबकि किसी दूसरे के लिए कारोबार। वहीं कुछ लोगों को दोनों के बीच रास्ता चुनना पड़ सकता है।
34 वर्षीय MBA ग्रेजुएट की कहानी यह जरूर दिखाती है कि बदलते नौकरी बाजार में डिग्री के साथ व्यावहारिक स्किल और लगातार सीखते रहने की क्षमता भी बेहद जरूरी है। साथ ही, छोटे कारोबारियों की सफलता यह बताती है कि कमाई के पारंपरिक रास्तों के अलावा भी अवसर मौजूद हैं—हालांकि हर कारोबार में जोखिम और मेहनत दोनों होते हैं।
फिलहाल यह शख्स नौकरी के साथ अपनी स्किल सुधारने की कोशिश कर रहा है और भविष्य में खुद का कारोबार शुरू करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। उसकी कहानी सोशल मीडिया पर इस बड़े सवाल को सामने रखती है कि आखिर आज के दौर में करियर की सफलता को सिर्फ डिग्री और नौकरी से मापना कितना सही है।


