SC/ST Atrocity Compensation: केंद्र सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में कानून को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मिलने वाले मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा राज्यों में इस कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए स्पेशल पुलिस स्टेशन और विशेष अदालतों की व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में हुई वृद्धि को आधार बनाकर मुआवजे की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर अत्याचार पीड़ितों को मिलने वाली न्यूनतम और अधिकतम सहायता राशि दोनों में महत्वपूर्ण इजाफा हो सकता है।
अभी कितना मिलता है मुआवजा?
मौजूदा व्यवस्था में अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर SC/ST अत्याचार के पीड़ितों को 85,000 रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाता है। अलग-अलग अपराधों के लिए मुआवजे की राशि अलग निर्धारित है।
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक न्यूनतम मुआवजा बढ़ाकर करीब 1 लाख रुपये और अधिकतम मुआवजा लगभग 12 लाख रुपये किया जा सकता है। यानी मौजूदा अधिकतम सीमा की तुलना में पीड़ितों को मिलने वाली सहायता राशि में काफी बढ़ोतरी होगी।
इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए Expenditure Finance Committee (EFC) के पास भेजा गया है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो करीब एक दशक के बाद इस मुआवजा व्यवस्था में बड़ा संशोधन होगा। इससे पहले वर्ष 2016 में मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी की गई थी।
12 लाख रुपये तक कैसे पहुंच सकता है मुआवजा?
प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि गंभीर अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को वर्तमान व्यवस्था की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिल सके। हालांकि, मुआवजे की वास्तविक राशि अपराध की श्रेणी, उसकी गंभीरता और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
इसका मतलब यह नहीं है कि SC/ST एक्ट के हर मामले में 12 लाख रुपये की राशि मिलेगी। 12 लाख रुपये प्रस्तावित अधिकतम सीमा है, जबकि अन्य मामलों में निर्धारित श्रेणी के अनुसार अलग-अलग राशि दी जाएगी।
स्पेशल पुलिस स्टेशन बनाने की तैयारी
सरकार केवल मुआवजा बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। SC/ST समुदाय के खिलाफ अत्याचार के मामलों की शिकायत, जांच और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्पेशल पुलिस स्टेशन स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए राज्यों को केंद्र की ओर से 5 लाख रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है। हालांकि, पुलिस स्टेशन स्थापित होने के बाद उसके नियमित और बार-बार होने वाले खर्च की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।
इस योजना का उद्देश्य ऐसे मामलों में पुलिस की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना और पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने तथा कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
तीन दशक बाद भी सिर्फ 7 राज्यों/UT में स्पेशल पुलिस स्टेशन
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act में स्पेशल पुलिस स्टेशन की व्यवस्था का प्रावधान होने के बावजूद देश के बहुत कम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस तरह के थाने मौजूद हैं।
संसद में दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी में कुल 181 स्पेशल पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं।
इनमें मध्य प्रदेश में 51, बिहार में 40, कर्नाटक में 33, छत्तीसगढ़ में 27, झारखंड में 24, केरल में 3 और पुडुचेरी में 3 ऐसे पुलिस स्टेशन बताए गए हैं।
यूपी और राजस्थान की स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?
स्पेशल पुलिस स्टेशन की कमी को लेकर चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में SC और ST समुदायों के खिलाफ अत्याचार के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते हैं। इसके बावजूद इन राज्यों में ऐसे मामलों के लिए अलग स्पेशल पुलिस स्टेशन नहीं होने का मुद्दा सामने आया है।
संसदीय स्थायी समिति ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। समिति का कहना है कि अत्याचार की घटना होने पर पीड़ित सबसे पहले पुलिस के पास सुरक्षा और शिकायत के लिए पहुंचता है। ऐसे में विशेष रूप से प्रशिक्षित और इन मामलों पर केंद्रित पुलिस व्यवस्था होने से कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
सरकार राज्यों को देगी आर्थिक मदद
सरकार की योजना में राज्यों को वित्तीय सहायता देकर आवश्यक संस्थागत ढांचा विकसित करने पर जोर दिया गया है। स्पेशल पुलिस स्टेशन के लिए प्रस्तावित 5 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता इसी दिशा में एक कदम है।
हालांकि, केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं होगा। राज्यों को इन पुलिस स्टेशनों के संचालन, कर्मचारियों, जांच व्यवस्था और अन्य नियमित खर्चों की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।
स्पेशल कोर्ट को भी किया जाएगा मजबूत
SC/ST अत्याचार के मामलों में केवल एफआईआर और पुलिस जांच ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि मामलों की समय पर सुनवाई और पीड़ितों को न्याय मिलना भी जरूरी है। इसी वजह से सरकार कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विशेष अदालतों और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी विचार कर रही है।
इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी को कम करना और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
संसदीय समिति ने क्या चिंता जताई?
संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि SC/ST अत्याचार निवारण कानून लागू हुए तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बहुत कम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
समिति ने राज्यों से कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी संस्थागत व्यवस्था तैयार करने की अपील की है। समिति के अनुसार, पीड़ित के लिए पुलिस स्टेशन न्याय की प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु होता है। इसलिए यहां पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध होना जरूरी है।
10 साल बाद बदल सकती है मुआवजा व्यवस्था
अगर केंद्र सरकार का प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो यह मुआवजा व्यवस्था में करीब 10 साल बाद होने वाला बड़ा बदलाव होगा। 2016 में किए गए पिछले संशोधन के बाद महंगाई और उपभोक्ता कीमतों में काफी बदलाव आया है। इसी को देखते हुए सरकार ने CPI के आधार पर मुआवजे की रकम को संशोधित करने का प्रस्ताव रखा है।
फिलहाल प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए 12 लाख रुपये की अधिकतम मुआवजा राशि अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। EFC और इसके बाद आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही नई राशि लागू की जा सकेगी।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
प्रस्ताव लागू होने पर SC/ST अत्याचार के पीड़ितों के लिए तीन प्रमुख बदलाव देखने को मिल सकते हैं—पहला, गंभीर मामलों में आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा बढ़ेगी; दूसरा, राज्यों में स्पेशल पुलिस स्टेशन की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्रीय मदद मिलेगी; और तीसरा, मामलों की सुनवाई और कानूनी कार्रवाई के लिए विशेष संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
हालांकि, इन बदलावों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकारें प्रस्तावित ढांचे को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करती हैं।
महत्वपूर्ण बात: 12 लाख रुपये तक का मुआवजा फिलहाल सरकार का प्रस्ताव है, अंतिम स्वीकृत राशि नहीं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई मुआवजा सीमा आधिकारिक रूप से लागू होगी।


