Tata Sons Chairman N Chandrasekaran Resignation: टाटा समूह के लिए 12 अगस्त 2026 का दिन बेहद अहम रहा। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया कि वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। उन्होंने टाटा संस बोर्ड को इसकी जानकारी देते हुए उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की अपील की है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में करीब 40 साल का प्रोफेशनल करियर बिताया है। उन्होंने अपने पत्र में इस सफर को याद करते हुए टाटा समूह में काम करने को अपने लिए बेहद सम्मान और संतोष का विषय बताया। लेकिन उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर फरवरी 2026 में बोर्ड में सहमति नहीं बन सकी। एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने के बाद प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
आखिर हुआ क्या था?

एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। उनके पत्र के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी। टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमिटी और बोर्ड ने भी इस सिफारिश को रिकॉर्ड किया था।
इसके बाद 24 फरवरी 2026 को उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने का प्रस्ताव टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया। लेकिन प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी। चंद्रशेखरन ने अपने पत्र में बताया कि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया और इसी वजह से उन्होंने उस समय फैसला टालना उचित समझा।
दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक को अब करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में चंद्रशेखरन ने खुद ही अगला कार्यकाल लेने से पीछे हटने का फैसला किया।
चंद्रशेखरन ने अपने पत्र में क्या लिखा?
एन चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने टाटा समूह में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा और वह इसके लिए आभारी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बड़े सम्मान और जिम्मेदारी की बात रही है।
उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि ट्रस्टों की ओर से उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को बढ़ाने की सिफारिश की गई थी और बोर्ड के सामने भी यह प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण निर्णय टाल दिया गया।
‘अब दोबारा नियुक्ति नहीं चाहता’
छह महीने तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने अब अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने टाटा संस बोर्ड को बताया कि वह अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे।
उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकार के बारे में जल्द निर्णय लेने को भी कहा है, ताकि फरवरी 2027 में उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नेतृत्व का सुचारु तरीके से हस्तांतरण हो सके।
यह कदम अचानक पद छोड़ने जैसा नहीं है। चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे और उसके बाद नए चेयरमैन को जिम्मेदारी सौंपेंगे।
टाटा समूह के लिए क्यों बड़ा बदलाव है?
चंद्रशेखरन ने ऐसे समय में टाटा समूह की कमान संभाली थी जब समूह को कई बड़े रणनीतिक फैसलों की जरूरत थी। वह 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने और इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में लंबे समय तक नेतृत्व की भूमिका निभा चुके थे।
उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और नए कारोबारों में बड़े निवेश किए। एयर इंडिया का टाटा समूह में वापस आना और उसे दोबारा खड़ा करने की कोशिश भी इसी दौर की प्रमुख घटनाओं में रही।
अब उनके जाने से सबसे बड़ा सवाल उत्तराधिकारी को लेकर है। टाटा संस एक विशाल कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी है और इसके फैसलों का असर TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power, Tata Consumer Products और समूह की अन्य कंपनियों पर पड़ता है।
सिर्फ चेयरमैन बदलने का मामला नहीं
चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चुनाव ऐसे समय में होगा जब टाटा समूह के सामने कई रणनीतिक मुद्दे हैं। इनमें टाटा संस की भविष्य की संरचना, समूह के नए कारोबारों में निवेश, एयर इंडिया का प्रदर्शन और अन्य बड़े कारोबारी फैसले शामिल हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेदों की भी चर्चा रही है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है।
हालांकि, चंद्रशेखरन के अपने पत्र में किसी व्यक्ति या समूह को उनके फैसले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। उन्होंने मुख्य रूप से बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बनने और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता की जरूरत को अपने फैसले की वजह बताया है।
40 साल का टाटा सफर अब आखिरी पड़ाव पर
एन चंद्रशेखरन का टाटा समूह से जुड़ाव सिर्फ चेयरमैन के तौर पर नहीं रहा है। उन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा इसी समूह में बिताया। TCS में नेतृत्व करते हुए उन्होंने कंपनी को वैश्विक आईटी कारोबार में मजबूत स्थिति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में 2017 में टाटा संस की कमान संभाली।
इसलिए उनका यह फैसला सिर्फ एक पद छोड़ने की खबर नहीं है, बल्कि टाटा समूह में एक लंबे नेतृत्व अध्याय के अंत की शुरुआत है।
सबसे खास बात यह है कि चंद्रशेखरन ने तत्काल पद छोड़ने के बजाय 20 फरवरी 2027 तक अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने का फैसला किया है। इससे बोर्ड को नए नेतृत्व की तलाश और जिम्मेदारी के हस्तांतरण के लिए समय मिलेगा।
अब आगे क्या होगा?
अब टाटा संस बोर्ड के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी नए चेयरमैन के चयन की होगी। चंद्रशेखरन ने खुद बोर्ड से उत्तराधिकार प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है।
उनका यह फैसला टाटा समूह के निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार की चिंता मुख्य रूप से नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर है।
फिलहाल चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे। इसके बाद टाटा समूह की कमान किसके हाथ में जाएगी, यह आने वाले महीनों में सबसे बड़ा कॉरपोरेट सवाल रहने वाला है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों और एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे संबंधी बयान पर आधारित है। टाटा समूह के भीतर किसी व्यक्ति की भूमिका या मतभेद के संबंध में जहां आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, वहां उसे रिपोर्ट के तौर पर ही प्रस्तुत किया गया है।


