नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब बैंकिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहक सेवा से लेकर लोन अप्रूवल, फ्रॉड डिटेक्शन, रिस्क असेसमेंट और डेटा एनालिसिस तक कई कामों में AI और मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को AI के इस्तेमाल को लेकर एक अहम संदेश दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि बैंक AI या किसी एल्गोरिदम की गलती का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
मुंबई में आयोजित सालाना Fibac कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RBI गवर्नर ने बैंकों से कहा कि AI मॉडल तैयार करते और उनका इस्तेमाल करते समय इंसानी निगरानी यानी human oversight को सिस्टम का जरूरी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि तकनीक बैंकिंग फैसलों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन अंतिम जवाबदेही इंसानों और खास तौर पर बैंक की ही रहेगी।
AI के फैसले की जिम्मेदारी बैंक की होगी
बैंकिंग सेक्टर में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर किसी AI मॉडल से गलत फैसला हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? RBI गवर्नर के संदेश से यह स्पष्ट है कि बैंक केवल यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि फैसला किसी एल्गोरिदम या AI मॉडल ने लिया था।
मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि किसी बैंकिंग फैसले की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की ही होगी। यानी अगर AI आधारित सिस्टम ने किसी ग्राहक के साथ गलत व्यवहार किया, गलत जोखिम आकलन किया या किसी फैसले में गंभीर गलती की, तो बैंक यह तर्क नहीं दे सकता कि गलती मशीन ने की थी।
यह संदेश बैंकिंग संस्थानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI मॉडल अक्सर बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके कुछ ही सेकंड में निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। लेकिन डेटा की गुणवत्ता, मॉडल की डिजाइन, उसमें इस्तेमाल किए गए मानदंड और उसके आउटपुट की निगरानी की जिम्मेदारी बैंक की ही रहती है।
‘मॉडल ने फैसला लिया’ वाली दलील स्वीकार नहीं होगी
RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग संस्थानों के लिए यह कहना स्वीकार्य नहीं होगा कि किसी फैसले के पीछे AI मॉडल था, इसलिए बैंक उसकी जिम्मेदारी नहीं ले सकता।
मल्होत्रा के संदेश का मूल अर्थ यही है कि AI बैंक के लिए जिम्मेदारी का विकल्प नहीं, बल्कि एक तकनीकी साधन है। बैंक चाहे जिस तकनीक का इस्तेमाल करे, ग्राहक और रेगुलेटर के सामने जवाबदेही उसकी ही रहेगी।
इसका सीधा असर उन प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है जहां AI के आधार पर ग्राहकों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी सिस्टम का इस्तेमाल ग्राहक की प्रोफाइल समझने, जोखिम का आकलन करने या किसी सेवा से जुड़ा निर्णय लेने में किया जा रहा है, तो बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम के कामकाज की पर्याप्त निगरानी हो।
इंसानी समझ का विकल्प नहीं है AI
RBI गवर्नर ने बैंकों को AI से दूरी बनाने की सलाह नहीं दी है। इसके उलट उन्होंने इसे जिम्मेदारी के साथ अपनाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि AI को इंसानी समझ और निर्णय क्षमता के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
इसका मतलब यह है कि बैंक AI की मदद से डेटा को तेजी से समझ सकते हैं, संभावित जोखिमों की पहचान कर सकते हैं और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे सकते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण फैसलों में इंसानी विशेषज्ञता की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होनी चाहिए।
बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां लिए गए फैसलों का सीधा असर ग्राहकों के पैसे, क्रेडिट हिस्ट्री, लोन, निवेश और दूसरी वित्तीय सेवाओं पर पड़ सकता है।
AI को खतरे के बजाय क्षमता के तौर पर देखें
RBI का रुख केवल चेतावनी तक सीमित नहीं है। गवर्नर ने AI को ऐसी क्षमता के रूप में देखने की बात कही जिसका जिम्मेदारी से फायदा उठाया जाना चाहिए। यानी बैंकों को केवल संभावित जोखिमों के कारण AI को रोककर रखने के बजाय इसके फायदे समझने और सुरक्षित तरीके से अपनाने पर ध्यान देना चाहिए।
बैंकिंग उद्योग में AI के कई संभावित फायदे हैं। बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण, संदिग्ध लेनदेन की पहचान, ग्राहक व्यवहार को समझना, फ्रॉड के पैटर्न पकड़ना और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को तेज करना इसके कुछ प्रमुख इस्तेमाल हैं।
लेकिन इन फायदों के साथ जोखिम भी जुड़े हैं। अगर मॉडल गलत या अधूरे डेटा पर प्रशिक्षित है, तो उसका आउटपुट भी गलत हो सकता है। इसी वजह से AI सिस्टम की नियमित जांच, निगरानी और मानवीय समीक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है।
AI पर बढ़ती निर्भरता से क्या खतरा है?
RBI गवर्नर ने एक और महत्वपूर्ण चिंता सामने रखी। जैसे-जैसे बैंकों में AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे इंसानी सूझ-बूझ और जवाबदेही कम होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
अगर कर्मचारी हर निर्णय के लिए AI मॉडल के आउटपुट पर निर्भर रहने लगें, तो धीरे-धीरे उनकी स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसके अलावा, किसी मॉडल के आउटपुट को बिना जांचे स्वीकार करना भी जोखिम पैदा कर सकता है।
मान लीजिए किसी AI सिस्टम ने किसी ग्राहक को अधिक जोखिम वाला बताया। बैंक अगर बिना किसी अतिरिक्त मानवीय जांच के उसी आधार पर फैसला ले लेता है और बाद में पता चलता है कि मॉडल का आकलन गलत था, तो केवल एल्गोरिदम को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा।
यही वजह है कि AI आधारित सिस्टम के साथ human oversight को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैंकिंग में AI इस्तेमाल करने के लिए क्या बदल सकता है?
RBI गवर्नर के इस संदेश के बाद बैंकों के लिए AI से जुड़े अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं की समीक्षा करना महत्वपूर्ण हो सकता है। खास तौर पर उन मामलों में जहां AI का आउटपुट सीधे ग्राहक से जुड़े फैसले को प्रभावित करता है।
बैंकों को यह समझना होगा कि AI मॉडल किस डेटा पर काम कर रहा है, उसके फैसलों की निगरानी कैसे की जा रही है और किसी गलत आउटपुट की स्थिति में उसे सुधारने की प्रक्रिया क्या है।
इसके अलावा, बैंक कर्मचारियों को भी AI सिस्टम के आउटपुट को समझने और उसकी सीमाओं को पहचानने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण की जरूरत होगी। केवल तकनीक खरीद लेना या किसी बाहरी वेंडर का AI मॉडल इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
वेंडर की गलती बताकर भी नहीं बच सकेंगे बैंक
AI सिस्टम विकसित करने या उपलब्ध कराने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियां बैंकिंग संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कई बैंक अपने AI मॉडल खुद विकसित करने के बजाय बाहरी टेक्नोलॉजी वेंडर्स की सेवाओं का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
लेकिन RBI गवर्नर के संदेश का एक अहम पहलू यह है कि बैंक अपनी जिम्मेदारी किसी वेंडर या तकनीकी सिस्टम पर पूरी तरह ट्रांसफर नहीं कर सकते। अगर बैंक किसी बाहरी कंपनी का AI समाधान इस्तेमाल करता है, तब भी ग्राहक के सामने बैंक की जिम्मेदारी बनी रहेगी।
इसका मतलब है कि बैंकिंग संस्थानों को AI वेंडर्स का चयन करते समय भी पर्याप्त सावधानी बरतनी होगी। उन्हें यह देखना होगा कि मॉडल कैसे काम करता है, उसके जोखिम क्या हैं और उसकी निगरानी के लिए कौन से नियंत्रण मौजूद हैं।
ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है RBI का यह संदेश?
RBI की यह बात सीधे बैंक ग्राहकों के हित से जुड़ी है। ग्राहक जब किसी बैंक की सेवा इस्तेमाल करता है तो उसके लिए यह जानना जरूरी है कि किसी तकनीकी सिस्टम के गलत फैसले की स्थिति में बैंक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
AI आधारित बैंकिंग के विस्तार के साथ ग्राहकों को तेज और अधिक सुविधाजनक सेवाएं मिल सकती हैं। लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।
अगर किसी ग्राहक के मामले में AI आधारित सिस्टम कोई ऐसा निर्णय लेता है जिससे उसे नुकसान होता है, तो बैंक को केवल यह बताकर मामला खत्म नहीं करना चाहिए कि निर्णय स्वचालित सिस्टम ने लिया था। बैंक को अपने सिस्टम, प्रक्रिया और निर्णय की जिम्मेदारी समझनी होगी।
RBI का संदेश साफ: AI अपनाएं, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का संदेश AI के खिलाफ नहीं है। बल्कि इसमें AI को बैंकिंग सेक्टर में जिम्मेदारी के साथ अपनाने की बात कही गई है। बैंक तकनीक का इस्तेमाल अपनी सेवाओं को तेज, सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ मानवीय निगरानी और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी होगा।
आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर में AI का इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यह सवाल और महत्वपूर्ण होगा कि तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और उसके फैसलों की निगरानी कौन कर रहा है।
RBI के रुख से एक बात स्पष्ट है—बैंक के सिस्टम में AI हो सकता है, लेकिन जवाबदेही AI की नहीं, बैंक की होगी। इसलिए भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था में तकनीक और इंसानी समझ के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा। ‘AI ने गलती की’ कहकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश को रेगुलेटर स्वीकार नहीं करेगा।


