Copper Price Prediction: कॉपर की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। सोमवार, 10 अगस्त को एमसीएक्स पर कॉपर फ्यूचर्स की कीमत 1,380 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। ग्लोबल सप्लाई में कमी, चीन की मजबूत औद्योगिक मांग और इलेक्ट्रिफिकेशन से बढ़ती जरूरत के कारण कॉपर को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर क्या कॉपर खरीदना सही रहेगा? एक्सपर्ट ने इसके लिए अहम लेवल और टारगेट बताए हैं।
कॉपर की कीमत दो महीने के हाई पर
सोमवार को घरेलू कमोडिटी मार्केट में कॉपर की कीमतों में अच्छी तेजी रही। एमसीएक्स पर अगस्त कॉपर फ्यूचर्स कारोबार के दौरान 1,380 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक कॉपर करीब 1,373 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन के कारोबार में इसका निचला स्तर 1,365.75 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
कॉपर की मौजूदा कीमत को अगर दो महीने पहले के स्तर से तुलना करें तो तस्वीर और साफ होती है। 5 जून को कॉपर करीब 1,392 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर था। इसके बाद कीमतों में कमजोरी आई और यह गिरकर करीब 1,252 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। अब वहां से कॉपर ने जोरदार रिकवरी की है।
यानी निचले स्तर से कॉपर में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है और कीमत फिर से 1,370-1,380 रुपये के जोन में पहुंच गई है। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा तेजी आगे भी जारी रह सकती है या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
कॉपर में तेजी की बड़ी वजह क्या है?
कॉपर को दुनियाभर में इंडस्ट्री और इकोनॉमी की गतिविधियों का अहम संकेतक माना जाता है। इसकी मांग बढ़ने पर अक्सर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में मजबूती का संकेत मिलता है। मौजूदा समय में कॉपर की कीमतों को कई फैक्टर एक साथ सपोर्ट कर रहे हैं।
1. ग्लोबल सप्लाई में कमी
कॉपर मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। माइनिंग और रिफाइनिंग से जुड़ी चुनौतियों के बीच उपलब्ध सप्लाई पर दबाव है। दूसरी ओर, कई सेक्टरों में कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है।
जब किसी कमोडिटी की मांग मजबूत हो और उसके मुकाबले सप्लाई सीमित हो, तो कीमतों पर स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर दबाव बनता है। कॉपर में भी फिलहाल यही स्थिति दिखाई दे रही है।
2. चीन से मजबूत औद्योगिक मांग
चीन दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उपभोक्ताओं में शामिल है। वहां मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल गतिविधियों से कॉपर की मांग पर सीधा असर पड़ता है।
चीन की औद्योगिक मांग में मजबूती कॉपर के लिए पॉजिटिव संकेत मानी जा रही है। यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
3. AI और डेटा सेंटर से बढ़ी मांग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डेटा सेंटर इंडस्ट्री के तेजी से विस्तार ने कॉपर की मांग को एक नया सपोर्ट दिया है।
डेटा सेंटर में बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है और इसके लिए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जरूरी है। पावर ट्रांसमिशन, केबलिंग और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
इसलिए AI और डेटा सेंटर में निवेश बढ़ने का अप्रत्यक्ष फायदा कॉपर की मांग को मिल रहा है।
4. EV और इलेक्ट्रिफिकेशन
इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV में पारंपरिक वाहनों की तुलना में ज्यादा कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर ग्रिड के विस्तार में भी कॉपर की महत्वपूर्ण भूमिका है।
दुनियाभर में इलेक्ट्रिफिकेशन बढ़ने के साथ कॉपर की लॉन्ग टर्म डिमांड को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
5. रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ग्रिड
सोलर और विंड एनर्जी जैसी रिन्यूएबल परियोजनाओं के विस्तार के साथ ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी मजबूत करने की जरूरत पड़ती है।
इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर में कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड एक्सपेंशन भी कॉपर की कीमतों के लिए लॉन्ग टर्म सपोर्टिंग फैक्टर हैं।
US टैरिफ का भी असर
कॉपर की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण फैक्टर अमेरिका की टैरिफ नीति है। टैरिफ से ग्लोबल ट्रेड फ्लो और सप्लाई चेन में बदलाव की संभावना रहती है।
ऐसे माहौल में कॉपर की कीमतों में समय-समय पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता कीमतों को निचले स्तरों पर टिकने से रोकने वाले फैक्टर्स में से एक हो सकती है।
ग्लोबल इन्वेंट्री में कमी भी सपोर्टिव
कॉपर की ग्लोबल इन्वेंट्री में कमी भी कीमतों के लिए सकारात्मक संकेत है। जब उपलब्ध स्टॉक घटता है और दूसरी तरफ मांग बनी रहती है तो बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
यही स्थिति कीमतों में तेजी को सपोर्ट कर सकती है। हालांकि, इन्वेंट्री, चीन की मांग, माइन सप्लाई और ग्लोबल आर्थिक गतिविधियों में बदलाव पर आगे भी नजर रखना जरूरी होगा।
रुपये की चाल का MCX कॉपर पर असर
भारत में कॉपर की कीमत सिर्फ इंटरनेशनल कॉपर प्राइस से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल का भी एमसीएक्स पर असर पड़ता है।
अगर रुपया कमजोर होता है तो डॉलर में कीमत वाले कमोडिटी के घरेलू दाम पर ऊपर की ओर दबाव आ सकता है। इसलिए भारतीय निवेशकों के लिए कॉपर का विश्लेषण करते समय अंतरराष्ट्रीय कीमत के साथ रुपये की चाल को भी देखना जरूरी है।
कॉपर का अगला टारगेट क्या है?
कॉपर की आगे की चाल को लेकर सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर अमित सुरेश जैन ने अहम टेक्निकल लेवल बताए हैं।
उनके मुताबिक, अगस्त एमसीएक्स कॉपर फ्यूचर्स फिलहाल 1,370 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है। हालांकि, मौजूदा स्तरों से बाजार में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, 1,340 रुपये का स्तर कॉपर के लिए अहम सपोर्ट है। जब तक कॉपर इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक इसमें करीब 1,410 रुपये तक जाने की संभावना बनी रह सकती है।
वहीं, ऊपर की तरफ शुरुआती टारगेट 1,380 रुपये और उसके बाद 1,400 रुपये का स्तर हो सकता है।
कॉपर के अहम टेक्निकल लेवल
| लेवल | एक्सपर्ट की राय |
|---|---|
| ₹1,340 | अहम सपोर्ट/स्टॉप-लॉस लेवल |
| ₹1,350–₹1,352 | खरीदारी के लिए संभावित जोन |
| ₹1,380 | पहला टारगेट |
| ₹1,400 | दूसरा टारगेट |
| ₹1,410 | अधिकतम संभावित अपसाइड |
₹1,340 टूटने पर क्या होगा?
कॉपर की तेजी के लिए 1,340 रुपये का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर कीमत इस लेवल के ऊपर बनी रहती है तो तेजी की संभावना बरकरार रह सकती है।
लेकिन अगर कॉपर 1,340 रुपये के नीचे टिकता है, तो मौजूदा तेजी का ट्रेंड कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कीमत करीब 1,300 रुपये की तरफ फिसल सकती है।
इसलिए ऊंचे स्तरों पर सिर्फ तेजी देखकर खरीदारी करने के बजाय सपोर्ट और स्टॉप-लॉस का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या अभी कॉपर खरीदना चाहिए?
अमित सुरेश जैन के मुताबिक, मौजूदा स्तरों पर कॉपर में आक्रामक तरीके से खरीदारी करना उचित नहीं है क्योंकि यहां रिस्क-रिवॉर्ड बहुत आकर्षक नहीं दिख रहा है।
हालांकि, अगर कीमत 1,350-1,352 रुपये के आसपास आती है तो 1,340 रुपये के नीचे सख्त स्टॉप-लॉस के साथ लॉन्ग पोजीशन पर विचार किया जा सकता है।
इस स्थिति में 1,380 रुपये और 1,400 रुपये के टारगेट रखे जा सकते हैं। वहीं, अगर 1,340 रुपये का सपोर्ट टूट जाता है तो लॉन्ग पोजीशन से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
अभी कॉपर में रणनीति क्या होनी चाहिए?
मौजूदा स्थिति को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है।
पहला, अगर कॉपर 1,340 रुपये के ऊपर बना रहता है तो तेजी का ट्रेंड कायम रह सकता है और कीमत 1,380 से 1,400 रुपये की तरफ बढ़ सकती है। इसके बाद 1,410 रुपये का स्तर अगला बड़ा लक्ष्य हो सकता है।
दूसरा, अगर कीमत 1,350-1,352 रुपये के आसपास आती है तो एक्सपर्ट ने सीमित जोखिम के साथ खरीदारी पर विचार करने की बात कही है। इसके लिए 1,340 रुपये के नीचे सख्त स्टॉप-लॉस जरूरी है।
तीसरा, अगर 1,340 रुपये का सपोर्ट टूट जाता है तो तेजी का सेटअप कमजोर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
निष्कर्ष: तेजी मजबूत, लेकिन ऊंचे स्तर पर सावधानी जरूरी
कॉपर की कीमतों में हालिया तेजी के पीछे ग्लोबल सप्लाई की कमी, चीन की औद्योगिक मांग, AI और डेटा सेंटर, EV, इलेक्ट्रिफिकेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ग्रिड में बढ़ता निवेश जैसे कई कारण हैं। इसके अलावा ग्लोबल इन्वेंट्री और रुपये की चाल भी एमसीएक्स कॉपर को प्रभावित कर रही है।
हालांकि, कॉपर पहले ही निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी कर चुका है। ऐसे में मौजूदा स्तरों पर बिना रणनीति के आक्रामक खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, 1,340 रुपये का स्तर सबसे अहम है। इसके ऊपर बने रहने पर 1,380, 1,400 और फिर 1,410 रुपये तक की तेजी संभव है। वहीं 1,340 रुपये टूटने पर 1,300 रुपये की तरफ गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है।
नोट: यह खबर एक्सपर्ट की राय और बाजार के तकनीकी स्तरों पर आधारित है। कमोडिटी में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


