Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार कभी ग्रीन जोन में गया तो कभी लाल निशान में फिसला। एक ओर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कमजोर पड़ने, प्राइवेट बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी तथा विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को संभालने का काम किया।
इस खींचतान के बीच Sensex और Nifty 50 मामूली बढ़त के साथ फ्लैट बंद हुए। व्यापक बाजार में भी मिला-जुला रुख रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की तेजी रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट के साथ बंद हुआ।
पिछले कारोबारी सत्र में कैसी रही थी चाल?
इससे पहले शुक्रवार, 7 अगस्त को सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58% गिरकर 78,499.17 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27% की गिरावट रही और यह 24,570.65 के स्तर पर बंद हुआ था।
आज बाजार ने पिछले सत्र की गिरावट के बाद संभलने की कोशिश की, लेकिन कई नकारात्मक संकेतों के चलते बड़ी तेजी कायम नहीं रह सकी।
Sensex और Nifty का आज का क्लोजिंग स्तर
सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06% की मामूली बढ़त के साथ 78,542.44 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 13.15 अंक यानी 0.05% चढ़कर 24,583.80 पर बंद हुआ।
इंट्रा-डे कारोबार में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा। सेंसेक्स दिन में 177.81 अंक चढ़कर 78,676.98 तक पहुंचा, लेकिन बाद में 378.06 अंक गिरकर 78,298.92 तक फिसल गया। इसी तरह निफ्टी 50 भी शुरुआती तेजी में 50.30 अंक बढ़कर 24,620.95 तक पहुंचा, लेकिन बाद में 109.85 अंक गिरकर 24,511.10 के स्तर तक आ गया।
इससे साफ है कि बाजार में तेजी और गिरावट के बीच निवेशकों के बीच काफी असमंजस बना रहा।
Share Market Fall: इन वजहों से बाजार पर बना दबाव
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बाजार के लिए प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई मांगें रखे जाने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
इन मांगों में अरबों डॉलर के अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना जैसी बातें शामिल हैं। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों को लेकर सतर्क हो जाते हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ईरान से जुड़ी खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क Brent Crude 1% से अधिक चढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल को भारतीय इक्विटी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।
India VIX में उतार-चढ़ाव
मार्केट में अस्थिरता का संकेत देने वाला India VIX आज 4.41% गिरकर 12.33 पर बंद हुआ। हालांकि कारोबार के दौरान VIX में उतार-चढ़ाव निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता रहा।
India VIX को आमतौर पर अगले करीब 30 दिनों के दौरान बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का संकेतक माना जाता है। VIX में बढ़ोतरी आमतौर पर ज्यादा अनिश्चितता और वोलैटिलिटी का संकेत देती है, जबकि गिरावट अपेक्षाकृत कम अस्थिरता की ओर इशारा करती है।
सरकारी बैंकों के शेयरों में दबाव
आज PSU Bank सेक्टर बाजार के लिए प्रमुख कमजोरी का कारण रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
सरकारी बैंकों में बिकवाली का दबाव इतना मजबूत रहा कि इससे बाजार की कुल तेजी सीमित हो गई। बैंकिंग शेयरों का इंडेक्स में बड़ा वजन होने के कारण इस सेक्टर की कमजोरी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई देता है।
Share Market Rise: इन सेक्टर्स ने संभाला बाजार
प्राइवेट बैंक शेयरों में खरीदारी
जहां सरकारी बैंकों के शेयरों में दबाव रहा, वहीं प्राइवेट बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की तेजी रही।
निवेशकों की ओर से निजी क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने PSU Bank में आई गिरावट के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया। यही वजह रही कि बेंचमार्क इंडेक्स बड़ी गिरावट से बचने में सफल रहे।
मेटल शेयरों में भी तेजी
मेटल सेक्टर भी आज बाजार के मजबूत हिस्सों में शामिल रहा। Nifty Metal इंडेक्स में 1% से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार की धारणा को मजबूत करने में मदद की। प्राइवेट बैंक और मेटल शेयरों में मजबूती ने PSU Bank और अन्य कमजोर सेक्टर्स से आने वाले दबाव को काफी हद तक संतुलित किया।
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें
अमेरिका से आई कमजोर जॉब रिपोर्ट ने भी बाजार को राहत दी। जुलाई की रोजगार रिपोर्ट उम्मीद से कमजोर रहने के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कमजोर हुई।
ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद से अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। इसका सकारात्मक असर दुनिया के दूसरे बाजारों की धारणा पर भी पड़ा और भारतीय बाजार को इससे कुछ सपोर्ट मिला।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। शुक्रवार, 7 अगस्त को FIIs ने लगातार दो दिनों की नेट बिकवाली के बाद ₹480.24 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट को सपोर्ट मिलता है। हालांकि बाजार की दिशा तय करने में आने वाले दिनों में FII फ्लो के साथ-साथ वैश्विक बाजार, कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
आगे बाजार के लिए क्या अहम रहेगा?
सोमवार के कारोबार से संकेत मिलता है कि फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में तेजी और गिरावट के बीच मुकाबला बराबरी का है। एक तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और PSU Bank में कमजोरी जैसे जोखिम हैं, जबकि दूसरी तरफ अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर नरम उम्मीदें, प्राइवेट बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी तथा विदेशी निवेशकों का सपोर्ट बाजार को संभाल रहा है।
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर खास तौर पर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक बाजारों के रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन संकेतकों में बड़ा बदलाव बाजार की अगली दिशा को प्रभावित कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran किसी भी निवेशक को किसी विशेष शेयर या निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


