Fake IAS Officer Arrested in Bihar: बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी बताता था और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के अंडरकवर एजेंट के तौर पर काम करने का दावा करता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के पास से एक Tesla कार, विदेशी शराब, महंगी गाड़ियां, कई मोबाइल फोन, क्रेडिट और डेबिट कार्ड समेत कई आपत्तिजनक और कीमती सामान बरामद किए गए हैं। पुलिस अब उसकी कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति और उसके स्रोत की जांच कर रही है।
खगड़िया में पकड़ा गया फर्जी IAS अधिकारी
बिहार के खगड़िया जिले में फर्जी IAS के पास 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी और टेस्ला कार मिली है।
ड्राइवरलेस टेस्ला कार पूरे भारत में अब तक 250 लोगो के पास है।
इसको लेने के लिए सरकारी परमिशन भी जरूरी है। pic.twitter.com/D3Wb2uwQdT
— Harsh Vardhan (@imharshvdhan) August 9, 2026 पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीष गुप्ता के रूप में हुई है। वह खगड़िया जिले के गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर का रहने वाला बताया गया है। खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (SP) भानु प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस को आरोपी की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसके ठिकाने पर छापेमारी की गई।
पुलिस ने रविवार, 9 अगस्त को मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर खुद को वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बताकर लोगों और विभिन्न स्थानों पर प्रभाव जमाता था। पुलिस को शक है कि सरकारी अधिकारी होने का दावा उसकी कथित गतिविधियों का अहम हिस्सा था।
खुद को NSA अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताया
पूछताछ के दौरान मनीष गुप्ता ने कथित तौर पर खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अधीन काम करने वाला एक गुप्त या अंडरकवर एजेंट बताया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने दावे के समर्थन में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) का एक कार्ड भी दिखाया।
इसके अलावा उसने खुद को IAS अधिकारी साबित करने के लिए एक पहचान पत्र भी पेश किया। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में उसके IAS अधिकारी होने और NSA से जुड़े होने के दावे फर्जी पाए गए।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने इन पहचान पत्रों और कथित सरकारी संपर्कों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया था। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं इनका इस्तेमाल लोगों या संस्थानों को प्रभावित करने अथवा धोखा देने के लिए तो नहीं किया गया।
घर से Tesla कार और विदेशी शराब बरामद
पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से कई महंगी और महत्वपूर्ण चीजें बरामद होने का दावा किया गया है। इनमें 31 लीटर से अधिक विदेशी शराब और बड़ी मात्रा में बीयर शामिल है।
इसके अलावा पुलिस ने एक Tesla कार भी बरामद की है। पुलिस के मुताबिक, इस कार पर कथित तौर पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगा हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि यह Tesla कार कुछ विशेष सुविधाओं से लैस थी और इस तरह की कार भारत में अभी भी अपेक्षाकृत दुर्लभ मानी जाती है।
Tesla के अलावा पुलिस ने एक Tata Safari भी बरामद की है। तलाशी के दौरान पांच iPhone, 20 क्रेडिट कार्ड, आठ डेबिट कार्ड, चार चेकबुक और अन्य दस्तावेज एवं सामान भी मिलने की बात सामने आई है।
बारहसिंगा के सींग भी मिले
पुलिस के अनुसार, आरोपी के घर से बारहसिंगा के दो सींग भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने कहा है कि वन्यजीवों से संबंधित ऐसी वस्तुओं को रखना कानून के तहत दंडनीय हो सकता है।
इस बरामदगी के बाद जांच का दायरा सिर्फ कथित फर्जी पहचान और धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि ये सींग आरोपी के पास कैसे पहुंचे और इनके संबंध में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कोई अलग कार्रवाई बनती है या नहीं।
100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का दावा
इस मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात आरोपी की कथित संपत्ति को लेकर सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मनीष गुप्ता के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने की जानकारी मिली है। हालांकि, संपत्ति के वास्तविक मूल्य और उसके स्वामित्व की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संपत्ति आरोपी ने किस तरह हासिल की। जांच में जमीन, मकान, बैंक खातों, वाहनों और दूसरी चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
संपत्ति के स्रोत की होगी जांच
खगड़िया के SP भानु प्रताप सिंह के अनुसार, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अपनी कथित संपत्तियां किन स्रोतों से हासिल कीं। शुरुआती स्तर पर पुलिस को आशंका है कि इनमें से कुछ संपत्तियां कथित धोखाधड़ी, छल या भ्रष्टाचार से जुड़ी हो सकती हैं।
इस जांच में बिहार पुलिस की Economic Offences Unit (EOU) समेत अन्य एजेंसियों की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियों के दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और आरोपी के पास से बरामद अन्य सामान की जांच की जाएगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या मनीष गुप्ता ने फर्जी IAS अधिकारी या किसी केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी से जुड़े व्यक्ति के तौर पर अपनी कथित पहचान का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति, कारोबारी या संस्था से आर्थिक लाभ हासिल किया था।
फर्जी सरकारी पहचान के इस्तेमाल की जांच
पुलिस के सामने अब एक बड़ा सवाल यह भी है कि आरोपी के पास IAS अधिकारी और केंद्रीय सरकारी संस्था से जुड़े कार्ड कैसे पहुंचे। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की सत्यता और उन्हें तैयार करने या हासिल करने के तरीके की भी जांच कर सकती हैं।
अगर जांच में यह साबित होता है कि आरोपी ने जानबूझकर सरकारी अधिकारी की फर्जी पहचान बनाकर किसी व्यक्ति या संस्था को धोखा दिया, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में अतिरिक्त कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस आरोपी के घर से बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच कर रही है। इनसे उसके कथित संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और गतिविधियों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।
कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
फिलहाल मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कई पहलुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है। इसमें उसका कथित IAS कनेक्शन, NSA अजीत डोभाल से संबंध होने का दावा, केंद्रीय सतर्कता आयोग से जुड़ा कार्ड, महंगी गाड़ियां, विदेशी शराब, कथित 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और वन्यजीव से जुड़े सामान की बरामदगी शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपी ने कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कितने समय से किया और इससे कितने लोग या संस्थाएं प्रभावित हुईं।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसकी संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। मामले में आगे की जांच के आधार पर और भी खुलासे होने की संभावना है।


