PFC Share Price: सरकारी पावर फाइनेंस कंपनी Power Finance Corporation (PFC) के शेयरों में सोमवार, 10 अगस्त को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के जून 2026 तिमाही के नतीजे सामने आने के बाद शेयर शुरुआती कारोबार में 6 फीसदी से ज्यादा टूट गया। कमजोर लोन डिस्बर्समेंट, धीमी लोन ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में दबाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
हालांकि, कंपनी की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है और फॉरेक्स तथा प्रोविज़न से मिले लाभ की वजह से PFC का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) सालाना आधार पर बढ़ा है। नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म CLSA ने PFC के शेयर पर अपनी ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को ₹550 से घटाकर ₹500 कर दिया है।
शेयर में 6% से ज्यादा की गिरावट
सोमवार को PFC के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। दोपहर करीब 12:10 बजे कंपनी का शेयर 6.51 फीसदी गिरकर ₹392.55 पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर ने ₹414.65 का डे हाई और ₹389.60 का डे लो बनाया।
हालांकि, मौजूदा गिरावट के बावजूद PFC का शेयर इस साल अब तक करीब 10.50 फीसदी ऊपर है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि तिमाही नतीजों के बाद स्टॉक में आई कमजोरी अस्थायी है या कंपनी की कमाई और लोन ग्रोथ पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।
PFC के जून तिमाही नतीजे कैसे रहे?
जून 2026 तिमाही में PFC का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹5,233.5 करोड़ रही। यह पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 4.3 फीसदी और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.2 फीसदी कम है।
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर बढ़ा। यह पिछले साल के ₹4,831.3 करोड़ से 10.9 फीसदी बढ़ा। हालांकि, पिछली तिमाही के ₹6,382.4 करोड़ के मुकाबले ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 16.1 फीसदी की गिरावट रही।
दूसरी तरफ, कंपनी के प्रोविज़न में अच्छी कमी देखने को मिली। जून तिमाही में प्रोविज़न सालाना आधार पर 18.5 फीसदी और पिछली तिमाही की तुलना में 59.8 फीसदी कम रहे।
इन कारकों के चलते PFC का PAT ₹4,745.4 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 5.4 फीसदी और तिमाही आधार पर 25 फीसदी अधिक है।
NIM पर बना दबाव
PFC के तिमाही प्रदर्शन में सबसे बड़ी चिंता कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को लेकर रही। जून तिमाही में कंपनी का NIM 3.55 फीसदी रहा।
यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 38 बेसिस पॉइंट और मार्च तिमाही के मुकाबले 28 बेसिस पॉइंट कम है। लोन पर यील्ड में गिरावट का असर कंपनी के कोर मार्जिन पर पड़ा है।
क्रेडिट कॉस्ट इस दौरान नेगेटिव रही, हालांकि इससे मिलने वाला लाभ पिछली अवधियों की तुलना में कम रहा। यानी एसेट क्वालिटी मजबूत रहने के बावजूद ब्याज आय और मार्जिन में कमजोरी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
लोन बुक में 4% की ग्रोथ
जून तिमाही के अंत में PFC की लोन बुक/AUM करीब ₹5.7 लाख करोड़ रही। इसमें सालाना आधार पर 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, लेकिन मार्च तिमाही के मुकाबले यह 1.7 फीसदी कम रही।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती डिस्बर्समेंट में देखने को मिली। जून तिमाही में PFC का डिस्बर्समेंट करीब ₹20,200 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही से 44 फीसदी और पिछली तिमाही से 50 फीसदी कम है।
कंपनी की लोन ग्रोथ पर ज्यादा प्री-पेमेंट और पहली तिमाही में सामान्य तौर पर कम रहने वाले डिस्बर्समेंट का असर पड़ा है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में लोन ग्रोथ और डिस्बर्समेंट में सुधार देखने को मिल सकता है।
CLSA ने घटाया PFC का टारगेट प्राइस
PFC के नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म CLSA ने शेयर पर अपनी ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस को ₹550 से घटाकर ₹500 प्रति शेयर कर दिया है।
यह नया टारगेट मौजूदा स्तरों से करीब 19.3 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है।
CLSA के मुताबिक, PFC और REC दोनों के जून तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। दोनों कंपनियों की लोन ग्रोथ धीमी बनी हुई है। इसका एक कारण Revolving Bill Payment Facility (RBPF) स्कीम बुक में कमी और अन्य सेगमेंट में सीमित ग्रोथ है।
हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी माना कि RBPF बुक अब काफी छोटी हो चुकी है, जिससे आगे चलकर लोन ग्रोथ के लिए स्थिति बेहतर हो सकती है।
PFC-REC मर्जर पर भी नजर
PFC और REC Limited के प्रस्तावित मर्जर को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। कंपनी ने पहले इस मर्जर को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया था।
CLSA ने दोनों कंपनियों के लिए FY27 के PAT अनुमानों में करीब 2-3 फीसदी की कटौती की है। ब्रोकरेज के मुताबिक, लोन ग्रोथ में कमजोरी और लेंडिंग यील्ड में कमी के कारण कमाई के अनुमान पर असर पड़ा है।
CLSA ने REC पर भी ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन उसका टारगेट प्राइस ₹450 से घटाकर ₹420 प्रति शेयर कर दिया है।
PFC शेयर पर एनालिस्ट की राय क्या है?
मौजूदा जानकारी के मुताबिक PFC को कवर करने वाले सभी 15 एनालिस्ट ने शेयर पर Buy रेटिंग दी है। हालांकि, सिर्फ ब्रोकरेज रेटिंग के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है।
PFC के लिए सकारात्मक पक्षों में मजबूत एसेट क्वालिटी, बड़ा लोन बुक, सरकारी क्षेत्र से जुड़ा कारोबार और संभावित PFC-REC मर्जर शामिल हैं। दूसरी तरफ, कमजोर डिस्बर्समेंट, धीमी लोन ग्रोथ और NIM में गिरावट ऐसे जोखिम हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
PFC के शेयर में सोमवार की तेज गिरावट के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि अभी खरीदारी की जाए या इंतजार किया जाए?
तिमाही नतीजों को देखें तो कंपनी का PAT बढ़ा है और एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। लेकिन NII में गिरावट, डिस्बर्समेंट में तेज कमी और NIM पर दबाव यह संकेत देता है कि कंपनी के कोर ऑपरेशनल प्रदर्शन में कुछ चुनौतियां मौजूद हैं।
ऐसे में मौजूदा निवेशकों के लिए अगली कुछ तिमाहियों में लोन ग्रोथ, डिस्बर्समेंट, NIM और एसेट क्वालिटी महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे। वहीं नए निवेशकों को सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
CLSA का ₹500 का टारगेट और ‘Outperform’ रेटिंग शेयर में संभावित तेजी की ओर इशारा करती है, लेकिन टारगेट प्राइस किसी भी तरह से निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं है। बाजार की स्थिति, ब्याज दरें, पावर सेक्टर की क्रेडिट डिमांड और कंपनी के आगामी तिमाही नतीजे शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
PFC Share Price: मुख्य आंकड़े
| पैरामीटर | आंकड़ा |
|---|---|
| सोमवार का शेयर भाव | ₹392.55 |
| गिरावट | 6.51% |
| डे हाई | ₹414.65 |
| डे लो | ₹389.60 |
| जून तिमाही PAT | ₹4,745.4 करोड़ |
| NII | ₹5,233.5 करोड़ |
| NIM | 3.55% |
| लोन बुक/AUM | ₹5.7 लाख करोड़ |
| तिमाही डिस्बर्समेंट | ₹20,200 करोड़ |
| CLSA टारगेट | ₹500 |
| CLSA रेटिंग | Outperform |
निष्कर्ष
PFC के शेयर में 10 अगस्त की गिरावट मुख्य रूप से कमजोर डिस्बर्समेंट, धीमी लोन ग्रोथ और NIM में दबाव के कारण आई है। हालांकि, कंपनी का PAT सालाना आधार पर बढ़ा है और एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। CLSA ने टारगेट प्राइस घटाने के बावजूद शेयर पर ‘Outperform’ रेटिंग कायम रखी है।
इसलिए PFC में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए आगे मुनाफे की ग्रोथ के साथ-साथ मार्जिन और लोन ग्रोथ की दिशा सबसे महत्वपूर्ण होगी। नए निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले कंपनी के वैल्यूएशन, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य का आकलन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। इसमें शामिल ब्रोकरेज राय और टारगेट प्राइस संबंधित फर्म के अनुमान हैं और निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं देते। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।


