Amazon Warehouse News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमेजन रिटेल इंडिया के भिवंडी स्थित वेयरहाउस के खिलाफ महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एजेंसी को संतुलित और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की सलाह दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नियमों को सख्ती से लागू करने के चक्कर में एफडीए “मच्छर को तलवार से मारने” जैसा कदम उठा रहा है।
अमेजन के वेयरहाउस पर FDA की कार्रवाई से मामला पहुंचा हाई कोर्ट
यह मामला अमेजन रिटेल इंडिया की याचिका के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। कंपनी के भिवंडी स्थित वेयरहाउस के खिलाफ एफडीए ने कार्रवाई की थी। एजेंसी का आरोप था कि ऐसे खाद्य उत्पाद, जिनकी एक्सपायरी हो चुकी थी और जिन्हें नष्ट किया जाना था, उन्हें दोबारा बाजार में भेजे जाने की प्रक्रिया में रखा जा रहा था।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ के सामने हुई। कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के एफडीए के प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही कार्रवाई के तरीके और उसकी गंभीरता पर सवाल उठाए।
अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को पूरी तरह बंद करना हर मामले में उचित और अनुपातिक कार्रवाई मानी जा सकती है। कोर्ट का कहना था कि नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई मामले की वास्तविक गंभीरता और संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए होनी चाहिए।
‘मच्छर को तलवार से मारने’ वाली टिप्पणी क्यों हुई?
सुनवाई के दौरान अदालत ने एफडीए की कार्रवाई के तरीके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नीति को सख्ती से लागू करने के प्रयास में एजेंसी “मच्छर को तलवार से मारने” की कोशिश कर रही है।
कोर्ट की इस टिप्पणी का मूल संदेश यह था कि नियामक एजेंसियों को नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जरूर करनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई इतनी कठोर नहीं होनी चाहिए कि वह मामले की प्रकृति से असंगत लगे। किसी कारोबारी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून में निर्धारित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
अदालत ने एफडीए को अधिक व्यवस्थित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। यानी जहां नियमों के उल्लंघन पर सख्ती जरूरी हो, वहीं कार्रवाई की प्रक्रिया भी कानून के अनुरूप होनी चाहिए।
24 जून को हुआ था वेयरहाउस का निरीक्षण
अमेजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि एफडीए के अधिकारियों ने 24 जून को भिवंडी स्थित वेयरहाउस का निरीक्षण किया था। कंपनी के पक्ष के अनुसार, निरीक्षण के अगले ही दिन वेयरहाउस का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
अमेजन ने अदालत में यह भी दावा किया कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले उसे कोई ‘सुधार नोटिस’ जारी नहीं किया गया था। कंपनी ने इस कार्रवाई के खिलाफ अपील भी दायर की।
मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर ही अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़ा हुआ। कंपनी का कहना था कि उसकी अपील पर प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इसी दौरान एफडीए ने आगे बढ़कर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई कर दी।
अपील के दौरान लाइसेंस रद्द करने पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अमेजन के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी ने लाइसेंस निलंबित किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी। इसके बाद 1 जुलाई को एफडीए ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और बाद में वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया।
इसी बिंदु पर हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब मामला अपील की प्रक्रिया में था, तब लाइसेंस रद्द करने का आदेश किस आधार पर जारी किया गया।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अपील की अवधि में इस तरह की कार्रवाई करने से पहले संबंधित कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया को ध्यान में रखना आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि नियामक संस्था को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के कार्यकाल के बाद बढ़ी सक्रियता
महाराष्ट्र में एफडीए की हालिया कार्रवाई भी चर्चा का विषय रही है। मई में आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे के एफडीए कमिश्नर का पद संभालने के बाद विभाग ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्रियता बढ़ाई है।
इसके तहत कई खाद्य प्रतिष्ठानों और मशहूर रेस्टोरेंट्स में निरीक्षण और छापेमारी की खबरें सामने आई हैं। विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।
हालांकि, अमेजन वेयरहाउस मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि नियामक सख्ती के साथ-साथ कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया और अनुपातिकता भी महत्वपूर्ण है। किसी संस्था के खिलाफ कार्रवाई करते समय केवल उल्लंघन देखना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उसके लिए कौन-सी कानूनी कार्रवाई उचित है।
FDA को हलफनामा दाखिल करने का समय
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र एफडीए की ओर से सरकारी वकील नेहा भिड़े ने अदालत से अपना पक्ष रखने के लिए हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की है।
अगली सुनवाई में एफडीए की ओर से अपनी कार्रवाई का कानूनी आधार और घटनाक्रम स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। वहीं, अमेजन की याचिका में उठाए गए लाइसेंस निलंबन और उसके बाद लाइसेंस रद्द करने से जुड़े सवाल भी अदालत के सामने बने रहेंगे।
क्या है पूरे मामले का सार?
अमेजन के भिवंडी वेयरहाउस के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई का आधार एक्सपायरी हो चुके खाद्य उत्पादों से जुड़ा कथित उल्लंघन है। एफडीए ने निरीक्षण के बाद लाइसेंस निलंबित किया और बाद में उसे रद्द कर दिया। अमेजन ने इस कार्रवाई को चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने फिलहाल यह नहीं कहा है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अदालत की आपत्ति मुख्य रूप से कार्रवाई के तरीके, उसकी अनुपातिकता और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सामने आई है। इसी वजह से कोर्ट ने एफडीए को सख्ती के साथ-साथ प्रक्रिया का भी पालन करने की सलाह दी और अपनी टिप्पणी में “मच्छर को तलवार से मारने” का उदाहरण दिया।


