सोने की कीमत में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस सप्ताह सोने की कीमत में करीब 7 फीसदी की तेजी आई है, जो पिछले करीब आठ महीनों में इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त बताई जा रही है। वहीं, पिछले एक महीने में सोना करीब 10 फीसदी महंगा हो चुका है।
सोने में इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर बुलियन मार्केट की ओर खींच दिया है। अमेरिका से कमजोर रोजगार आंकड़े आने, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी डॉलर पर दबाव के बीच बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख नहीं अपनाएगा। ब्याज दरों को लेकर नरम उम्मीदों से सोने को सपोर्ट मिला है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने पकड़ी रफ्तार
शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 2.3 फीसदी बढ़कर 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। कारोबार के दौरान फ्यूचर्स गोल्ड 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर के ऊपर भी चला गया। यह 5 जून के बाद सोने का सबसे ऊंचा स्तर रहा।
इससे पहले कारोबारी सत्र में भी सोने में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली थी। इस तरह लगातार मजबूत प्रदर्शन के कारण सोने ने जनवरी के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक छलांग दर्ज की।
हालांकि, मौजूदा तेजी को समझने के लिए जनवरी का रिकॉर्ड स्तर भी महत्वपूर्ण है। जनवरी के अंतिम दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,500 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद इसमें बड़ी गिरावट आई और कीमत काफी नीचे चली गई। अब एक बार फिर निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से सोने में तेजी लौटती दिखाई दे रही है।
आखिर क्यों चढ़ रहा है सोना?
सोने की कीमत में मौजूदा तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत हैं।
अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार को लेकर कमजोर आंकड़े सामने आए। रिपोर्ट में 23,000 नौकरियों की कमी बताई गई, जबकि बाजार को पेरोल में करीब 85,000 की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
कमजोर रोजगार आंकड़ों का सीधा असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर पड़ सकता है। अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत बने रहते हैं तो फेड के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की संभावना कम हो सकती है।
यह स्थिति सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
दरअसल, सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशकों के लिए बॉन्ड और दूसरी ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं। इसके उलट जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है तो सोने की मांग मजबूत हो सकती है।
कमजोर डॉलर ने भी दिया सोने को सपोर्ट
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी सोने की कीमत के लिए सकारात्मक रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है और इसकी मांग बढ़ सकती है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई के दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हो सकती है। इससे फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों पर नरम रुख अपनाने की गुंजाइश बढ़ती है।
यही वजह है कि इस समय कमजोर रोजगार आंकड़े, नरम डॉलर और तेल की कीमतों में गिरावट तीनों फैक्टर सोने के पक्ष में जाते दिखाई दे रहे हैं।
भारत में भी लगातार चौथे दिन बढ़ा सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर भारतीय सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिला। राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत लगातार चौथे दिन बढ़ी।
शुक्रवार को सोना 200 रुपये बढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले गुरुवार को इसका भाव 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के अलावा रुपये की चाल, आयात लागत और स्थानीय मांग जैसे कई फैक्टर प्रभावित करते हैं। इस समय वैश्विक स्तर पर सोने में तेजी और डॉलर में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
MCX पर भी सोने में तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी सोने की कीमत में तेजी रही। शुक्रवार को 5 अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 165 रुपये की बढ़त के साथ 1,51,985 रुपये पर बंद हुआ।
इससे संकेत मिलता है कि घरेलू वायदा बाजार में भी निवेशकों का रुझान सोने की ओर मजबूत बना हुआ है।
हालांकि, MCX और सर्राफा बाजार की कीमतों में अंतर होना सामान्य है। वायदा कीमतें एक्सचेंज पर कारोबार, डिलीवरी महीने और बाजार की अपेक्षाओं से प्रभावित होती हैं, जबकि खुदरा बाजार में टैक्स, मेकिंग चार्ज और स्थानीय मांग जैसे अतिरिक्त फैक्टर भी कीमत को प्रभावित करते हैं।
24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का भाव
घरेलू बाजार में खुदरा कीमतों में भी तेजी दिखाई दे रही है। गुडरिटर्न्स के मुताबिक, 24 कैरेट सोना करीब 1,52,350 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,39,650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने का भाव करीब 1,14,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
यहां यह समझना जरूरी है कि वेबसाइटों और अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ने के कारण ग्राहक को वास्तविक भुगतान बाजार में बताए गए बेस गोल्ड रेट से ज्यादा करना पड़ सकता है।
क्या सोना फिर बना सकता है नया रिकॉर्ड?
सोने में हालिया तेजी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कीमत एक बार फिर अपने रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की राय इस समय सोने के लिए लंबी अवधि में सकारात्मक दिखाई देती है, लेकिन रास्ते में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड और अरबपति हेज फंड मैनेजर जॉन पॉलसन जैसे निवेशकों का मानना है कि हालिया गिरावट ने लंबी अवधि के निवेशकों को सोना जमा करने का अवसर दिया है।
इस नजरिए के मुताबिक, सोने में मौजूदा तेजी केवल छोटी अवधि की रिकवरी नहीं हो सकती बल्कि यह एक बड़े बुल रन की शुरुआत का हिस्सा भी हो सकती है।
सेंट्रल बैंक खरीदारी से भी मिल रहा सपोर्ट
सोने के लिए सबसे महत्वपूर्ण लंबी अवधि के सपोर्ट में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
इसका कारण यह है कि सोने को किसी एक देश की मुद्रा या सरकार के क्रेडिट पर निर्भर नहीं माना जाता। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व को डायवर्सिफाई करने के लिए सोने का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यदि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत बनी रहती है और निवेशकों की मांग भी बढ़ती है तो इससे सोने की कीमत को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल सकता है।
आगे सोने की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले दिनों में सोने की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, अमेरिकी डॉलर, रोजगार और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत बढ़ते हैं और फेड के नरम रुख की उम्मीद मजबूत होती है तो सोने को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा डॉलर में लगातार कमजोरी भी बुलियन की कीमत को ऊपर ले जा सकती है।
दूसरी तरफ अगर अमेरिकी महंगाई अपेक्षा से ज्यादा रहती है, डॉलर मजबूत होता है या फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है तो सोने में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
इसलिए मौजूदा तेजी के बावजूद निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सोना भी लगातार एक ही दिशा में नहीं चलता। रिकॉर्ड स्तरों के आसपास तेज उतार-चढ़ाव और करेक्शन दोनों देखने को मिल सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
सोने में करीब एक महीने में 10 फीसदी की तेजी के बाद निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में पूरी रकम निवेश न करें। सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने और आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा देने वाली परिसंपत्ति के तौर पर उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसकी कीमत में भी काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश करना चाहता है तो एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना जोखिम को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। वहीं, ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST और खरीद-बिक्री के बीच के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, सोने में इस सप्ताह आई करीब 7 फीसदी की तेजी ने बुलियन मार्केट में नई जान डाल दी है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़े, डॉलर में नरमी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और फेड की ब्याज दरों को लेकर नरम उम्मीदों ने सोने को मजबूत सपोर्ट दिया है।
भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है और सोना 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। आगे इसकी चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड के फैसलों के साथ-साथ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक जोखिमों पर निर्भर करेगी।
ऐसे में सोने में लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत दिखाई देती है, लेकिन हालिया तेज उछाल के बाद निवेशकों को जोखिम, निवेश अवधि और खरीदारी के स्तर को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।


