Success Story of Ashish Pandey and Sumit Kumar: सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार बड़ा सपना पूरा करने के लिए नौकरी के साथ बिजनेस शुरू करना पड़ता है, दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है और मुश्किल हालात में भी हार नहीं माननी पड़ती। आशीष पांडे और सुमित कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने नोएडा में रात की शिफ्ट में नौकरी करते हुए अपने बिजनेस की नींव रखी और महज 10 लाख रुपये की बचत से BuyBuyCart (BBC) की शुरुआत की। आज उनका कारोबार करीब 62 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
दोनों ने साल 2021 में BuyBuy Technologies Private Limited की शुरुआत की थी। उनका मकसद देश के पारंपरिक किराना स्टोर्स को आधुनिक बनाना और उन्हें डिजिटल सिस्टम से जोड़ना था। आज BuyBuyCart के नेटवर्क से करीब 300 किराना स्टोर जुड़े हुए हैं और कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इस संख्या को 1,000 से ज्यादा स्टोर्स तक पहुंचाना है।
नौकरी के साथ शुरू किया बिजनेस
आशीष पांडे और सुमित कुमार ने साल 2021 में दिल्ली-एनसीआर में एक अमेरिकी पेरोल प्रोसेस से जुड़ी कंपनी में नाइट शिफ्ट में नौकरी की। उस समय देश में क्विक कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन किराना डिलीवरी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। लोगों को कुछ ही मिनटों में घर बैठे सामान मिलने लगा था।
इस बदलाव का असर स्थानीय किराना दुकानों पर भी दिखाई देने लगा। कई पारंपरिक दुकानदारों को लग रहा था कि ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के सामने उनका कारोबार टिकना मुश्किल होगा।
लेकिन आशीष और सुमित ने इस समस्या को एक अवसर के रूप में देखा। उनका मानना था कि स्थानीय किराना दुकानों की सबसे बड़ी ताकत ग्राहकों का भरोसा और स्थानीय कनेक्शन है। अगर इन दुकानों को तकनीक, बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट, डिजिटल बिलिंग और आधुनिक स्टोर सिस्टम से जोड़ा जाए तो वे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को टक्कर दे सकती हैं।
यहीं से BuyBuyCart का आइडिया सामने आया।
दिन में बिजनेस, रात में नौकरी
बिजनेस शुरू करने के बाद दोनों की जिंदगी काफी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। दिन के समय वे किराना दुकानदारों से मिलते, उनके लिए सामान की व्यवस्था करते, डिलीवरी संभालते और सप्लायर्स से बातचीत करते थे।
इसके बाद रात में उन्हें अपनी नौकरी करनी पड़ती थी।
यानी एक तरफ नौकरी से मिलने वाली नियमित आय थी, तो दूसरी तरफ उसी कमाई और अपनी बचत को बिजनेस में लगाया जा रहा था। दोनों ने अपने बिजनेस को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने के लिए करीब 10 लाख रुपये की निजी बचत लगाई।
शुरुआत में कंपनी के पास न बड़ी टीम थी और न ही बड़े स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर। कई ऐसे काम थे जिन्हें दोनों खुद ही संभालते थे।
सामान लोड करने से लेकर डिलीवरी तक खुद संभाला
किसी भी नए बिजनेस की तरह BuyBuyCart के शुरुआती दिनों में भी कई तरह की परेशानियां सामने आईं। दोनों को सामान की खरीदारी, लोडिंग-अनलोडिंग, बिलिंग और डिलीवरी तक का काम खुद करना पड़ता था।
इस दौरान उनके सामने एक बेहद मुश्किल स्थिति तब आई, जब पूर्वोत्तर भारत जा रहा सामान से भरा उनका एक ट्रक करीब एक सप्ताह तक गायब रहा।
बाद में उन्हें पता चला कि ड्राइवर ने सामान रास्ते में उतार दिया था और अवैध शराब की तस्करी में शामिल हो गया था। इस घटना से कारोबार को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ ही कानूनी और सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियां भी सामने आईं।
हालांकि, दोनों ने इस घटना के बाद बिजनेस बंद करने के बजाय अपनी सप्लाई चेन को और मजबूत करने पर ध्यान दिया। इसी तरह की मुश्किलों ने उन्हें बिजनेस के संचालन और जोखिमों को बेहतर तरीके से समझने में मदद की।
BuyBuyCart का बिजनेस मॉडल क्या है?
BuyBuyCart का मॉडल पारंपरिक फ्रेंचाइजी मॉडल से थोड़ा अलग है। कंपनी FOFO यानी Franchise Owned, Franchise Operated मॉडल पर काम करती है।
इस मॉडल के तहत स्थानीय दुकानदार अपनी दुकान को BuyBuyCart के नेटवर्क से जोड़ते हैं। कंपनी उन्हें दुकान को आधुनिक रूप देने और कारोबार को व्यवस्थित करने में मदद करती है।
BuyBuyCart की ओर से दुकानों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें:
- डिजिटल बिलिंग सिस्टम
- मोबाइल ऐप और तकनीकी सपोर्ट
- स्टोर का आधुनिक लेआउट
- ब्रांडिंग सपोर्ट
- इन्वेंट्री मैनेजमेंट
- प्रोडक्ट और सप्लाई से जुड़ी सुविधाएं
खास बात यह है कि कंपनी दुकानदारों से फ्रेंचाइजी या रॉयल्टी फीस नहीं लेती।
इसका उद्देश्य सिर्फ एक नया ब्रांड बनाना नहीं, बल्कि पहले से मौजूद किराना दुकानों को आधुनिक रिटेल नेटवर्क का हिस्सा बनाना है।
90 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट और 1,000 से अधिक ब्रांड
BuyBuyCart का नेटवर्क अब काफी बड़ा हो चुका है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर 90,000 से ज्यादा प्रोडक्ट और 1,000 से अधिक ब्रांड शामिल हैं।
कंपनी सिर्फ बड़े ब्रांडों के प्रोडक्ट पर निर्भर नहीं है। वह स्थानीय उत्पादों को भी अपने नेटवर्क में जगह देती है। इसके साथ ही कंपनी अपने प्राइवेट लेबल को भी बढ़ाने पर काम कर रही है।
सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कंपनी ने गाजियाबाद में अपना वेयरहाउस भी तैयार किया है। इससे इन्वेंट्री को व्यवस्थित रखने और अलग-अलग राज्यों में सामान की सप्लाई को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
300 स्टोर से 1,000 स्टोर का लक्ष्य
साल 2021 में एक छोटे स्टोर से शुरू हुआ BuyBuyCart का सफर अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। कंपनी के नेटवर्क में पंजाब, बिहार, केरल, पूर्वोत्तर भारत और कश्मीर समेत अलग-अलग क्षेत्रों के स्टोर शामिल हैं।
वर्तमान में करीब 300 किराना स्टोर कंपनी के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। अब आशीष पांडे और सुमित कुमार की नजर 2030 पर है। कंपनी ने तब तक 1,000 से ज्यादा स्टोर्स का नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा है।
यह लक्ष्य सिर्फ स्टोर की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा स्थानीय दुकानदारों को टेक्नोलॉजी और संगठित रिटेल सिस्टम से जोड़ना है।
62 करोड़ रुपये तक पहुंचा कारोबार
जिस बिजनेस की शुरुआत दोनों संस्थापकों ने अपनी करीब 10 लाख रुपये की बचत से की थी, वह आज करीब 62 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है।
यह आंकड़ा बताता है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया बिजनेस भी सही बिजनेस मॉडल, मेहनत और लगातार विस्तार के साथ बड़ा आकार ले सकता है।
हालांकि, आशीष और सुमित के लिए सफलता का मतलब सिर्फ करोड़ों रुपये का टर्नओवर हासिल करना नहीं है। उनका फोकस उन छोटे दुकानदारों को मजबूत बनाने पर भी है, जो वर्षों से अपने स्थानीय ग्राहकों को सेवाएं दे रहे हैं।
किराना दुकानों को बनाना चाहते हैं आधुनिक
BuyBuyCart का पूरा मॉडल इस सोच पर आधारित है कि देश के छोटे किराना दुकानदारों को खत्म करने के बजाय उन्हें टेक्नोलॉजी के साथ मजबूत किया जाए।
ऑनलाइन रिटेल और क्विक कॉमर्स के दौर में स्थानीय दुकानदारों के पास सबसे बड़ा फायदा उनके ग्राहकों के साथ वर्षों से बना भरोसा है। BuyBuyCart इसी भरोसे को आधुनिक तकनीक और बेहतर रिटेल सिस्टम के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
आशीष पांडे और सुमित कुमार का सपना BuyBuyCart को किराना रिटेल की दुनिया का ‘Jio’ बनाना है। यानी ऐसा बड़ा नेटवर्क तैयार करना, जहां देश के छोटे दुकानदार भी डिजिटल और संगठित रिटेल के दौर में बड़े प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।
10 लाख की बचत से 62 करोड़ का सफर
आशीष पांडे और सुमित कुमार की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के साथ अपना बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं। दोनों ने नौकरी को तुरंत छोड़ने के बजाय उसे आर्थिक सहारे के रूप में इस्तेमाल किया और दिन के समय अपने बिजनेस पर काम किया।
10 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ BuyBuyCart आज करीब 62 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। इस सफर में जोखिम, आर्थिक नुकसान, लंबी मेहनत और सप्लाई चेन की मुश्किलें आईं, लेकिन दोनों संस्थापकों ने अपने आइडिया पर भरोसा बनाए रखा।
उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि बिजनेस का बड़ा आइडिया हमेशा किसी बिल्कुल नई चीज से नहीं आता। कई बार बाजार में पहले से मौजूद समस्या को अलग नजरिए से देखना और उसका बेहतर समाधान तैयार करना ही सबसे बड़ा बिजनेस अवसर बन जाता है।


