भारतीय शेयर बाजार में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के मुकाबले मजबूत मोर्चा संभाला। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, डीआईआई ने पूरे वित्त वर्ष में भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया। इसके मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने करीब ₹1.8 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की इस मजबूत खरीदारी ने विदेशी पूंजी के बाहर निकलने से बाजार पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।
Highlights
- DII ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब ₹8.5 लाख करोड़ निवेश किया।
- FPI ने करीब ₹1.8 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
- NSE पर लिस्टेड सिक्योरिटीज में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी 17% पहुंची।
- FPI की हिस्सेदारी घटकर 15.8% रह गई।
- म्यूचुअल फंड ने करीब ₹6.4 लाख करोड़ का योगदान दिया।
- देश में डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 22.5 करोड़ हो गई।
विदेशी बिकवाली के सामने घरेलू निवेशकों का मजबूत सहारा
भारतीय शेयर बाजार लंबे समय से विदेशी निवेशकों के निवेश और निकासी से प्रभावित होता रहा है। जब FPI बड़ी मात्रा में पैसा निकालते हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने इस प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
SEBI की रिपोर्ट के अनुसार, डीआईआई ने पूरे वित्त वर्ष के दौरान लगभग ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया। वहीं, FPI करीब ₹1.8 लाख करोड़ के शुद्ध विक्रेता रहे।
इस आंकड़े से यह साफ होता है कि भारतीय बाजार में अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भरता नहीं रह गई है। घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास मौजूद बड़ी पूंजी बाजार में गिरावट के दौरान एक महत्वपूर्ण सपोर्ट सिस्टम के तौर पर काम कर रही है।
NSE पर घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी
घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का असर शेयर बाजार में उनकी ओनरशिप पर भी दिखाई दिया। NSE पर लिस्टेड सिक्योरिटीज में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 17% हो गई।
इसके विपरीत, FPI की हिस्सेदारी घटकर 15.8% रह गई, जो करीब 15 महीने का निचला स्तर है।
यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि इसका मतलब है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से अधिक हो गई है।
म्यूचुअल फंड ने निभाई बड़ी भूमिका
डीआईआई की खरीदारी में म्यूचुअल फंड की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। वित्त वर्ष 2025-26 में म्यूचुअल फंड ने करीब ₹6.4 लाख करोड़ का निवेश किया।
म्यूचुअल फंड में लगातार बढ़ते SIP निवेश ने इस पूंजी प्रवाह को मजबूत आधार दिया है। देश में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और लोगों के बीच शेयर बाजार तथा म्यूचुअल फंड को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी घरेलू पूंजी के प्रवाह को बढ़ाया है।
SIP के जरिए हर महीने आने वाला पैसा बाजार में अपेक्षाकृत नियमित पूंजी उपलब्ध कराता है। ऐसे में जब विदेशी निवेशक अचानक बिकवाली करते हैं, तो घरेलू फंडों के पास बाजार में निवेश बनाए रखने या खरीदारी बढ़ाने की क्षमता रहती है।
डीमैट खातों की संख्या 22.5 करोड़ पहुंची
भारतीय पूंजी बाजार में बढ़ती घरेलू भागीदारी का एक और बड़ा संकेत डीमैट खातों की संख्या में हुई वृद्धि है। SEBI की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष के दौरान देश में डीमैट खातों की संख्या बढ़कर करीब 22.5 करोड़ हो गई।
डिजिटल ऑनबोर्डिंग, मोबाइल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश प्रक्रिया के आसान होने से छोटे शहरों और नए निवेशकों की बाजार तक पहुंच बढ़ी है। इससे रिटेल निवेशकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है।
हालांकि, डीमैट खातों की संख्या और सक्रिय निवेशकों की संख्या एक जैसी नहीं होती। फिर भी, यह आंकड़ा बताता है कि भारत में वित्तीय बाजारों तक आम लोगों की पहुंच पहले के मुकाबले काफी व्यापक हुई है।
कंपनियों ने जुटाई रिकॉर्ड ₹2.35 लाख करोड़ की पूंजी
SEBI की वार्षिक रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों की ओर से पूंजी बाजार के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कॉरपोरेट इंडिया ने पब्लिक इक्विटी ऑफरिंग के जरिए रिकॉर्ड ₹2.35 लाख करोड़ जुटाए।
इसमें IPO, FPO और राइट्स इश्यू जैसे माध्यम शामिल हैं। कंपनियों के लिए यह पूंजी जुटाने का महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है।
बाजार में मजबूत घरेलू निवेश आधार होने से कंपनियों को नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाने में भी मदद मिलती है। यही कारण है कि भारतीय IPO बाजार में पिछले कुछ समय से काफी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
SME कंपनियों ने भी जुटाई बड़ी रकम
छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए SME प्लेटफॉर्म भी पूंजी जुटाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 257 कंपनियों ने SME प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया और करीब ₹11,587 करोड़ जुटाए।
यह आंकड़ा दिखाता है कि पूंजी बाजार का विस्तार केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। छोटी कंपनियां भी शेयर बाजार के जरिए अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटा रही हैं।
राइट्स इश्यू से फंड जुटाने में 134% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियों द्वारा जुटाई गई पूंजी में भी तेज वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में राइट्स इश्यू के जरिए करीब ₹46,168 करोड़ जुटाए गए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 134.2% अधिक है।
इसके अलावा, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए जुटाया गया फंड 76.3% बढ़कर ₹1.48 लाख करोड़ हो गया।
शेयर बायबैक में भी जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली। कंपनियों द्वारा किए गए शेयर बायबैक का मूल्य 143.6% बढ़कर ₹19,238 करोड़ हो गया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियां पूंजी जुटाने और शेयरधारकों को पूंजी लौटाने के लिए बाजार के अलग-अलग विकल्पों का इस्तेमाल कर रही हैं।
डेट मार्केट में भी बढ़ी गतिविधि
SEBI की रिपोर्ट में इक्विटी मार्केट के साथ-साथ डेट मार्केट में भी मजबूती का उल्लेख किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में पब्लिक डेट इश्यू के जरिए कंपनियों द्वारा जुटाई गई राशि में 39.2% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब ₹11,343 करोड़ पहुंच गई।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां केवल शेयर बाजार के जरिए इक्विटी पूंजी जुटाने पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि डेट मार्केट का भी इस्तेमाल अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कर रही हैं।
क्या बदल रहा है भारतीय शेयर बाजार?
SEBI के इन आंकड़ों का सबसे बड़ा संकेत यह है कि भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों के बड़े निवेश या निकासी का बाजार पर काफी असर पड़ता था। लेकिन अब म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास बड़ी मात्रा में पूंजी उपलब्ध है।
इसका फायदा यह है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दौरान बाजार को घरेलू पूंजी से सहारा मिल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि FPI की गतिविधियां पूरी तरह अप्रासंगिक हो गई हैं। विदेशी निवेश अभी भी बाजार की दिशा, लिक्विडिटी और वैल्यूएशन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।
घरेलू बचत बनी बाजार की ताकत
SEBI के मुताबिक, घरेलू भागीदारी में बढ़ोतरी, रिटेल निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी और पूंजी जुटाने के अलग-अलग विकल्पों ने भारतीय कैपिटल मार्केट को ज्यादा व्यापक और मजबूत बनाया है।
₹8.5 लाख करोड़ का DII निवेश और इसके मुकाबले ₹1.8 लाख करोड़ की FPI बिकवाली यह बताती है कि भारतीय बाजार में घरेलू पूंजी अब एक महत्वपूर्ण स्थिरता प्रदान करने वाली ताकत बन चुकी है।
म्यूचुअल फंड में बढ़ते SIP, करोड़ों डीमैट खाते और कंपनियों द्वारा शेयर बाजार से रिकॉर्ड पूंजी जुटाना इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। आने वाले वर्षों में यदि घरेलू बचत और बाजार में निवेश की यह रफ्तार बनी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में कम हो सकता है।


