Technocraft Ventures IPO: टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स का आईपीओ 7 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने इस इश्यू के लिए ₹200 से ₹212 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ₹252 करोड़ के इस आईपीओ में निवेशक 11 अगस्त 2026 तक बोली लगा सकते हैं। कंपनी के शेयर BSE और NSE दोनों पर लिस्ट होंगे।
आईपीओ में ₹202 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि बाकी ₹50 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे। यानी OFS से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी।
Technocraft Ventures IPO: कितना करना होगा निवेश?
टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स आईपीओ में एक लॉट में 70 शेयर हैं। अपर प्राइस बैंड यानी ₹212 प्रति शेयर के हिसाब से रिटेल निवेशक को कम से कम एक लॉट के लिए ₹14,840 लगाने होंगे।
| जानकारी | डिटेल |
|---|---|
| आईपीओ खुलने की तारीख | 7 अगस्त 2026 |
| आईपीओ बंद होने की तारीख | 11 अगस्त 2026 |
| प्राइस बैंड | ₹200-₹212 |
| लॉट साइज | 70 शेयर |
| न्यूनतम निवेश | ₹14,840 |
| इश्यू साइज | ₹252 करोड़ |
| फ्रेश इश्यू | ₹202 करोड़ |
| OFS | ₹50 करोड़ |
| अलॉटमेंट की संभावित तारीख | 12 अगस्त 2026 |
| लिस्टिंग की संभावित तारीख | 14 अगस्त 2026 |
| लिस्टिंग | NSE और BSE |
किस निवेशक के लिए कितने शेयर रिजर्व?
आईपीओ में शेयरों का एक हिस्सा अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों के लिए रिजर्व किया गया है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 50 फीसदी, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए 15 फीसदी और रिटेल निवेशकों के लिए 35 फीसदी हिस्सा रखा गया है।
इस तरह रिटेल निवेशकों के लिए इश्यू में पर्याप्त हिस्सा उपलब्ध है। हालांकि, वास्तविक अलॉटमेंट आईपीओ की मांग और सब्सक्रिप्शन पर निर्भर करेगा।
क्या कारोबार करती है Technocraft Ventures?
टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स की शुरुआत 1998 में हुई थी और इसका मुख्यालय दिल्ली-एनसीआर में है। कंपनी पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) से जुड़े काम करती है।
कंपनी के प्रोजेक्ट राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हैं। इसका कारोबार मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़ा है:
- वाटर सप्लाई स्कीम
- सीवरेज नेटवर्क
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
- पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन
- रोड इंफ्रास्ट्रक्चर
कंपनी की ऑर्डरबुक में सिवरेज और वेस्टवाटर प्रोजेक्ट्स की करीब 91 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी को अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा सरकारी विभागों और नगर निकायों से मिलता है। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रायोजित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में कितनी ग्रोथ?
Technocraft Ventures के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी ने हाल के वर्षों में अच्छी ग्रोथ दर्ज की है। FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब ₹345 करोड़ रहा। इसमें सालाना आधार पर 23.40 फीसदी की ग्रोथ हुई।
FY26 में कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) ₹43.31 करोड़ रहा और PAT मार्जिन 12.56 फीसदी था। वहीं, कंपनी की ऑर्डरबुक करीब ₹1,236 करोड़ की थी।
ऑर्डरबुक का आकार कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भविष्य में मिलने वाले संभावित कारोबार का संकेत देता है। हालांकि, ऑर्डरबुक को वास्तविक रेवेन्यू और मुनाफे में बदलने की क्षमता कंपनी के execution और प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर निर्भर करेगी।
आईपीओ से मिलने वाले पैसे का क्या होगा?
फ्रेश इश्यू से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। EPC और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में वर्किंग कैपिटल की जरूरत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि प्रोजेक्ट पूरा होने और पेमेंट मिलने के बीच समय लग सकता है।
OFS के तहत बेचे जाने वाले शेयरों से मिलने वाली रकम कंपनी के बजाय मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगी।
वैल्यूएशन कैसी है?
₹212 के अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का इश्यू के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹840 करोड़ रहने का अनुमान है।
इस कीमत पर शेयर का FY26 की कमाई के मुकाबले P/E करीब 19.4 गुना है, जबकि P/B रेशियो करीब 2.3 गुना है। उपलब्ध तुलना के मुताबिक प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का औसत P/E करीब 23 गुना बताया गया है।
इस लिहाज से टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स का वैल्यूएशन अपने कुछ प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कम दिखाई देता है। हालांकि, सिर्फ P/E कम होना किसी आईपीओ को सस्ता साबित नहीं करता। निवेशकों को कंपनी की ऑर्डरबुक, सरकारी प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता, कैश फ्लो और भविष्य की कमाई की संभावनाओं को भी देखना चाहिए।
Grey Market Premium क्या संकेत दे रहा है?
आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों पर करीब ₹13 का प्रीमियम बताया जा रहा है। 6 अगस्त को यह प्रीमियम करीब ₹10 था।
₹212 के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले ₹13 का GMP करीब 6 फीसदी का संभावित प्रीमियम संकेत देता है। हालांकि, GMP आधिकारिक या गारंटीड लिस्टिंग प्राइस नहीं होता। यह अनऑफिशियल मार्केट का संकेत है और लिस्टिंग तक इसमें बड़ा बदलाव हो सकता है।
इसलिए केवल GMP देखकर आईपीओ में निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा।
ब्रोकरेज की क्या राय है?
ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने आईपीओ में निवेश की सलाह दी है। उसके मुताबिक कंपनी की ऑर्डरबुक डायवर्सिफाइड है और कंपनी नए क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। ब्रोकरेज ने कंपनी की इंटीग्रेटेड EPC क्षमता को भी सकारात्मक पक्ष माना है।
इसके अलावा सुशील फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी आईपीओ में निवेश की सलाह दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी का वैल्यूएशन प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तुलना में आकर्षक नजर आता है।
Technocraft Ventures IPO में निवेश करें या नहीं?
टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स आईपीओ के पक्ष में कुछ मजबूत बातें नजर आती हैं। कंपनी की ऑर्डरबुक उसके FY26 रेवेन्यू से काफी बड़ी है, कारोबार में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है और कंपनी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम करती है। साथ ही, इश्यू का वैल्यूएशन कुछ प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कम दिखाई देता है।
लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी हैं। कंपनी का कारोबार सरकारी विभागों और नगर निकायों से मिलने वाले प्रोजेक्ट्स पर काफी निर्भर है। EPC कारोबार में प्रोजेक्ट में देरी, पेमेंट साइकिल, वर्किंग कैपिटल और execution से जुड़े जोखिम बने रहते हैं। इसके अलावा ऑर्डरबुक का बड़ा हिस्सा सिवरेज और वेस्टवाटर प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है, जिससे कारोबार में एक क्षेत्र पर अपेक्षाकृत अधिक निर्भरता दिखाई देती है।
कुल मिलाकर, मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन, ऑर्डरबुक और वैल्यूएशन को देखते हुए Technocraft Ventures IPO निवेशकों के लिए दिलचस्प नजर आता है। हालांकि, यह फैसला निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो के हिसाब से होना चाहिए। आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी का DRHP/RHP, वित्तीय आंकड़े और जोखिम कारक जरूर पढ़ें तथा जरूरत पड़ने पर अपने वित्तीय सलाहकार की राय लें।


