China-US Trade War: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी प्रस्ताव के बीच चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई अमेरिकी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। साथ ही ड्रोन और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्यात नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है।
HighLights
- अमेरिका के 100% टैरिफ प्रस्ताव के जवाब में चीन ने उठाया बड़ा कदम।
- चीन ने 6 अमेरिकी संस्थाओं को प्रतिबंध सूची में शामिल किया।
- ड्रोन, उनके पुर्जों और तकनीक के निर्यात पर कड़ी निगरानी शुरू।
- शिनजियांग मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव।
नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच चल रहा आर्थिक संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के बाद चीन ने सख्त रुख अपनाया है। चीन ने कई अमेरिकी कंपनियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की घोषणा की है।
अमेरिका में पेश किए गए नए बिल के तहत उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। चीन और भारत उन प्रमुख देशों में शामिल हैं, जिन पर इस प्रस्ताव का असर पड़ सकता है। हालांकि अभी यह बिल कानून नहीं बना है, लेकिन इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए चीन ने पहले ही जवाबी कदम उठाना शुरू कर दिया है।
चीन ने 6 अमेरिकी संस्थाओं पर लगाए प्रतिबंध
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि उसने 6 अमेरिकी संस्थाओं को प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। इन कंपनियों के साथ चीनी कंपनियों और नागरिकों के व्यापारिक सहयोग पर रोक लगाई गई है।
चीनी अधिकारियों का कहना है कि इन अमेरिकी संस्थाओं ने शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने में मदद की थी। चीन ने इसे अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों के खिलाफ कार्रवाई बताया है।
इससे पहले अमेरिका ने उइगर फोर्स्ड लेबर प्रिवेंशन एक्ट (UFLPA) के तहत 43 चीनी कंपनियों को अपनी एंटिटी लिस्ट में जोड़ा था। यह अब तक का इस सूची का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है। इसके बाद ब्लैकलिस्ट की गई चीनी कंपनियों की संख्या बढ़कर 187 हो गई है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इन कंपनियों के उत्पादों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लग जाती है। इन कंपनियों का कारोबार कपास, खाद्य उत्पादों, दवाइयों, धातुओं और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैला हुआ है।
चीन लगातार शिनजियांग में जबरन मजदूरी के आरोपों को खारिज करता रहा है और इसे अमेरिका द्वारा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताता है।
ड्रोन सप्लाई चेन पर चीन ने कसा शिकंजा
चीन ने ड्रोन और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्यात को लेकर भी नए नियम लागू किए हैं। अब अमेरिका भेजे जाने वाले ड्रोन, उनके प्रमुख हिस्सों और संबंधित तकनीक की हर खेप की अलग-अलग जांच की जाएगी।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गैर-प्रसार (Non-Proliferation) प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
ड्रोन उद्योग में चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया में बड़ी संख्या में ड्रोन और उनके कंपोनेंट चीन से सप्लाई किए जाते हैं। ऐसे में निर्यात नियंत्रण बढ़ने से वैश्विक ड्रोन सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी कंपनी पर भी कार्रवाई
चीन ने अमेरिकी कंपनी कम्प्लायंस टेस्टिंग LLC को भी जवाबी कार्रवाई वाली सूची में शामिल किया है। चीनी मंत्रालय के मुताबिक इस कंपनी ने अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) को ऐसे कदम उठाने में सहयोग किया, जिनसे चीन के सुरक्षा और विकास हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
चीन ने कहा कि ऐसी गतिविधियां उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं और इनके जवाब में कार्रवाई जरूरी है।
चीन ने शुरू की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच
इसके अलावा चीन ने विदेशों में बने सॉफ्टवेयर वाले प्रिंटिंग और कॉपी मशीनों से जुड़े ऑफिस उपकरणों की जांच शुरू कर दी है।
चीनी सरकार का कहना है कि इन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले विदेशी सॉफ्टवेयर से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस जांच का असर अमेरिकी टेक कंपनियों पर पड़ सकता है, क्योंकि प्रिंटिंग और ऑफिस इक्विपमेंट सॉफ्टवेयर बाजार में कई अमेरिकी कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है।
अमेरिका-चीन तनाव का वैश्विक असर
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी पड़ सकता है।
ड्रोन, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और दुर्लभ खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देश लगातार अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
अगर अमेरिका का 100% टैरिफ प्रस्ताव आगे बढ़ता है और चीन की जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में व्यापारिक अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
चीन-अमेरिका विवाद के बड़े मुद्दे
- रूस से तेल खरीद को लेकर टैरिफ विवाद
- शिनजियांग और मानवाधिकार मुद्दा
- टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्धा
- ड्रोन और रक्षा उपकरणों की सप्लाई
- वैश्विक सप्लाई चेन पर नियंत्रण
निष्कर्ष
100% टैरिफ की संभावित कार्रवाई से पहले चीन का यह कदम अमेरिका के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। दोनों आर्थिक महाशक्तियों के बीच बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। खासकर ड्रोन और हाई-टेक उपकरणों की सप्लाई पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।


