मुंबई की एक महिला को आयकर विभाग के साथ चली लंबी कानूनी लड़ाई में बड़ी राहत मिली है। महिला ने शेयर बेचकर ₹8.31 करोड़ का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाया था और इस रकम से अपने पति की प्रॉपर्टी खरीदी। इसके आधार पर उन्होंने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत ₹6.92 करोड़ की टैक्स छूट का दावा किया था।
आयकर विभाग ने पति-पत्नी के बीच हुए इस सौदे को टैक्स बचाने की योजना बताते हुए छूट देने से इनकार कर दिया था। लेकिन मुंबई स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल रिश्तेदार से संपत्ति खरीदने के आधार पर टैक्स छूट को खारिज नहीं किया जा सकता।
शेयर बेचकर कमाया ₹8.31 करोड़ का LTCG
मामला मुंबई की जुहू निवासी एक महिला मोटवानी से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2020-21 में उन्होंने कुछ अनलिस्टेड शेयर बेचे थे। इस बिक्री से उन्हें करीब ₹8.31 करोड़ का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन प्राप्त हुआ।
इसके बाद उन्होंने मुंबई के सांताक्रूज वेस्ट स्थित जुहू तारा रोड की एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए करीब ₹7.50 करोड़ का भुगतान किया।
यह प्रॉपर्टी उनके पति की सोल प्रोपराइटरशिप फर्म HP Trading के नाम पर थी। महिला ने इस संपत्ति को खरीदने के बाद इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत करीब ₹6.92 करोड़ की टैक्स छूट का दावा किया।
आयकर विभाग ने क्यों भेजा नोटिस?
आयकर विभाग को पति-पत्नी के बीच हुआ यह लेनदेन संदिग्ध लगा। विभाग का कहना था कि यह सौदा केवल टैक्स बचाने के उद्देश्य से किया गया है।
विभाग के अनुसार, इस लेनदेन से पति और पत्नी दोनों को टैक्स लाभ मिला।
- पत्नी ने धारा 54F के तहत बड़ी टैक्स छूट का दावा किया।
- पति को प्रॉपर्टी बेचने से करीब ₹4.85 करोड़ का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन हुआ।
- पति ने अपने करीब ₹3.56 करोड़ के बिजनेस लॉस को कैपिटल गेन के खिलाफ सेट ऑफ कर लिया।
आयकर अधिकारी (AO) ने इसे कलरेबल डिवाइस (Colourable Device) यानी टैक्स बचाने की योजना मानते हुए 30 दिसंबर 2022 को महिला की ₹6.92 करोड़ की 54F छूट को खारिज कर दिया।
इसके बाद CIT(A) ने भी विभाग के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद महिला ने ITAT मुंबई में अपील की।
ITAT ने महिला के पक्ष में दिया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान ITAT मुंबई ने आयकर विभाग की दलीलों को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आयकर कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी व्यक्ति को अपने पति, पत्नी या रिश्तेदार से संपत्ति खरीदने से रोकता हो।
ITAT ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं:
- संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी तरह वैध थी।
- स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किया गया था।
- बैंकिंग माध्यम से वास्तविक भुगतान हुआ था।
- पैसों के स्रोत को लेकर कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
- यह कोई फर्जी या कागजी लेनदेन नहीं था।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि केवल इसलिए किसी वैध टैक्स प्लानिंग को टैक्स चोरी नहीं माना जा सकता क्योंकि इससे करदाता को टैक्स लाभ मिला है।
भविष्य के बिजनेस लॉस की योजना बनाना संभव नहीं
आयकर विभाग ने पति के बिजनेस लॉस को भी मामले से जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन ITAT ने इसे स्वीकार नहीं किया।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रॉपर्टी का ट्रांसफर जून 2021 में हुआ था, जबकि पति को बिजनेस लॉस 31 मार्च 2022 को हुआ। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि प्रॉपर्टी खरीदते समय भविष्य में होने वाले नुकसान की योजना बनाकर यह सौदा किया गया था।
क्या है धारा 54F का नियम?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत अगर कोई व्यक्ति या HUF आवासीय मकान के अलावा किसी अन्य लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (जैसे शेयर, सोना आदि) को बेचता है और बिक्री से मिली रकम से नया रेजिडेंशियल मकान खरीदता या बनाता है, तो उसे कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिल सकती है।
इस छूट के लिए:
- नया मकान भारत में होना चाहिए।
- पुरानी संपत्ति बेचने के 2 साल के भीतर नया घर खरीदा जा सकता है।
- या 3 साल के भीतर नया घर बनाया जा सकता है।
- निवेश की गई राशि के आधार पर टैक्स छूट तय होती है।
टैक्सपेयर्स के लिए ITAT फैसले का महत्व
यह फैसला उन करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो कानूनी तरीके से टैक्स प्लानिंग करते हैं। ITAT ने स्पष्ट किया है कि रिश्तेदारों के बीच संपत्ति का लेनदेन अपने आप में अवैध नहीं है।
अगर लेनदेन वास्तविक है, दस्तावेज सही हैं और कानून में दी गई शर्तें पूरी होती हैं, तो केवल टैक्स बचत होने के आधार पर छूट को रोका नहीं जा सकता।


