Inflation News: बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.5% रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक खाने का तेल, चावल, दाल और प्याज जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 17% तक बढ़ चुके हैं।
HighLights
- जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.5% रहने का अनुमान।
- खाने का तेल, चावल, दाल और प्याज की कीमतों में तेजी की आशंका।
- पिछले एक महीने में चीनी के दामों में करीब 17% की बढ़ोतरी।
- मौसम और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां महंगाई को प्रभावित कर रही हैं।
नई दिल्ली: फिर बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
देश में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लग सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की ताजा रिपोर्ट ने आने वाले समय में कीमतों के बढ़ने की संभावना जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर करीब 4.5% रहने का अनुमान है।
महंगाई बढ़ने का सबसे ज्यादा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है, क्योंकि खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतों में बदलाव सीधे घर की रसोई को प्रभावित करता है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव, मौसम की अनिश्चितता और सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियों के कारण कई वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
रसोई का बजट बिगाड़ सकती हैं जरूरी चीजें
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खाने का तेल, चावल, दाल और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों में तेजी का असर देखने को मिल सकता है।
खाद्य महंगाई आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता होती है, क्योंकि इसका असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ता है। अगर दाल, तेल और सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवारों को अपने बजट में बदलाव करना पड़ता है।
हालांकि राहत की बात यह है कि इस समय बाजार में कई मौसमी सब्जियों की आवक बेहतर बनी हुई है। बारिश के कारण टमाटर समेत कुछ सब्जियों की कीमतों में नरमी देखने को मिली है।
प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने का अनुमान
प्याज देश की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुओं में से एक है और इसकी कीमतों में बदलाव का असर आम उपभोक्ताओं पर तुरंत दिखाई देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल प्याज, आलू और टमाटर (TOP) की सप्लाई में कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है।
मौसम की स्थिति, उत्पादन और मंडियों में आवक आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
कोर महंगाई में मिल सकती है राहत
रिपोर्ट में बताया गया है कि कोर महंगाई दर जुलाई में करीब 4% से 4.1% के बीच रह सकती है। कोर महंगाई में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी आने से पर्सनल केयर और कुछ अन्य क्षेत्रों में महंगाई दबाव कम होने की उम्मीद है।
हालांकि रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि अगर उत्पादन लागत यानी इनपुट कॉस्ट बढ़ती है तो आने वाले समय में महंगाई दोबारा ऊपर जा सकती है।
चीनी के दामों में बड़ी तेजी
रसोई में इस्तेमाल होने वाली एक और महत्वपूर्ण वस्तु चीनी की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 17% की वृद्धि हुई है। देश में चीनी की औसत कीमतें करीब ₹3,960 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹4,620 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर मिठाई, पेय पदार्थ और खाद्य उद्योग पर भी पड़ सकता है, जिससे कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
महंगाई पर सरकार और RBI की नजर
महंगाई दर को नियंत्रित रखना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती होती है। अगर खाद्य महंगाई लगातार बढ़ती है तो इसका असर ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों की नजर मानसून, कृषि उत्पादन, वैश्विक बाजार और सप्लाई स्थिति पर बनी हुई है। आने वाले महीनों में इन्हीं कारकों से तय होगा कि महंगाई का दबाव कितना बढ़ता है।


