NPS Investment: अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं, तो आपके रिटायरमेंट कॉर्पस की ग्रोथ काफी हद तक आपके चुने हुए पेंशन फंड मैनेजर (PFM) के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। हालांकि, कई निवेशक थोड़ी सी खराब परफॉर्मेंस देखकर जल्दबाजी में फंड मैनेजर बदल देते हैं, जो लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि NPS में पेंशन फंड मैनेजर कब बदलना चाहिए? आइए जानते हैं वे 5 अहम बातें, जिन पर ध्यान देकर सही फैसला लिया जा सकता है।
NPS में पेंशन फंड मैनेजर की क्या होती है भूमिका?
NPS में आपका निवेश सीधे आपके बैंक खाते में नहीं रहता, बल्कि इसे आपके चुने गए पेंशन फंड मैनेजर द्वारा अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है।
फंड मैनेजर का उद्देश्य आपके जोखिम प्रोफाइल के अनुसार बेहतर रिटर्न दिलाना होता है, ताकि रिटायरमेंट के समय एक मजबूत कॉर्पस तैयार हो सके।
1. लगातार 3-5 साल खराब प्रदर्शन करे तभी बदलाव पर विचार करें
किसी भी पेंशन फंड मैनेजर का मूल्यांकन केवल कुछ महीनों या एक साल के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करना चाहिए।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई फंड मैनेजर लगातार 3 से 5 वर्षों तक अपने बेंचमार्क और अन्य NPS फंड्स से कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तभी उसे बदलने पर विचार करना उचित होता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि एक फंड पिछले चार वर्षों में औसतन 11% वार्षिक रिटर्न दे रहा है, जबकि दूसरा समान जोखिम पर केवल 8% रिटर्न दे रहा है, तो बेहतर विकल्प चुनना समझदारी हो सकती है।
2. हर साल फंड मैनेजर बदलना क्यों नुकसानदायक हो सकता है?
शेयर बाजार में तेजी और गिरावट का दौर लगातार चलता रहता है। ऐसे में हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड के पीछे भागना सही रणनीति नहीं है।
यदि आप बार-बार फंड बदलते हैं, तो संभव है कि आप हमेशा अच्छे प्रदर्शन के बाद उसमें प्रवेश करें और भविष्य की संभावित ग्रोथ से चूक जाएं। इससे कंपाउंडिंग का फायदा भी कम हो सकता है, जो लंबी अवधि के निवेश का सबसे बड़ा लाभ माना जाता है।
3. सिर्फ रिटर्न नहीं, जोखिम का भी करें मूल्यांकन
अच्छा निवेश केवल ज्यादा रिटर्न देने वाला नहीं होता, बल्कि जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन भी जरूरी होता है।
फंड चुनते समय इन बातों पर जरूर ध्यान दें:
- बाजार गिरने पर फंड ने नुकसान कितना सीमित रखा।
- पोर्टफोलियो कितना संतुलित और विविधीकृत है।
- फंड मैनेजर की निवेश रणनीति कितनी अनुशासित है।
- लंबे समय का प्रदर्शन कितना स्थिर रहा है।
अगर कोई फंड 12% रिटर्न देने के लिए बहुत अधिक जोखिम उठा रहा है और दूसरा 11% रिटर्न कम जोखिम में दे रहा है, तो रिटायरमेंट निवेश के लिए दूसरा विकल्प अधिक उपयुक्त माना जा सकता है।
4. NPS में उपलब्ध पेंशन फंड मैनेजर
वर्तमान में NPS के तहत निवेशकों के लिए कई पेंशन फंड मैनेजर उपलब्ध हैं:
- SBI Pension Funds
- LIC Pension Fund
- UTI Pension Fund
- HDFC Pension Fund Management
- ICICI Prudential Pension Fund Management
- Kotak Mahindra Pension Fund
- Aditya Birla Sun Life Pension Fund Management
- Tata Pension Fund Management
- Axis Pension Fund Management
- DSP Pension Fund Managers
निवेशक अपनी सुविधा और प्रदर्शन के आधार पर इनमें से किसी भी फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं।
5. Active Choice और Auto Choice में क्या अंतर है?
Active Choice
यदि आपने Active Choice चुना है, तो यह तय करना आपकी जिम्मेदारी होती है कि आपका पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और सरकारी बॉन्ड में कितने प्रतिशत निवेश होगा।
इस विकल्प में समय-समय पर एसेट एलोकेशन और फंड मैनेजर दोनों की समीक्षा करना जरूरी होता है।
Auto Choice
Auto Choice में आपकी उम्र के अनुसार सिस्टम खुद ही एसेट एलोकेशन बदलता रहता है। इसलिए इसमें मुख्य रूप से यह देखना जरूरी होता है कि आपका पेंशन फंड मैनेजर लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं।
NPS निवेशकों को ये गलतियां नहीं करनी चाहिए
- केवल पिछले एक साल के रिटर्न के आधार पर फंड न चुनें।
- हर साल या बार-बार पेंशन फंड मैनेजर न बदलें।
- इक्विटी और डेट फंड के रिटर्न की सीधी तुलना न करें।
- अधिक रिटर्न के लालच में जोखिम को नजरअंदाज न करें।
- बाजार में गिरावट आते ही घबराकर फंड मैनेजर न बदलें।
NPS में अकाउंट कैसे खोलें?
18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है। इसमें नौकरीपेशा कर्मचारी, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और NRI भी शामिल हैं।
आप NPS अकाउंट निम्न माध्यमों से खोल सकते हैं:
- किसी अधिकृत बैंक के Point of Presence (PoP) पर
- पोस्ट ऑफिस के माध्यम से
- ऑनलाइन eNPS पोर्टल के जरिए
अकाउंट खुलने के बाद आपको PRAN (Permanent Retirement Account Number) मिलता है, जिसके जरिए आप नियमित निवेश और अपने पेंशन खाते का प्रबंधन कर सकते हैं।
निष्कर्ष
NPS एक 20-30 वर्षों का दीर्घकालिक निवेश है। इसलिए अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखकर पेंशन फंड मैनेजर बदलना सही रणनीति नहीं होती। यदि कोई फंड मैनेजर लगातार कई वर्षों तक अपने बेंचमार्क और प्रतिस्पर्धियों से कमजोर प्रदर्शन करता है, तभी बदलाव पर विचार करें। धैर्य, नियमित समीक्षा और सही एसेट एलोकेशन ही बेहतर रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की कुंजी है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश, टैक्स, बीमा या वित्तीय निर्णय लेने से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। NewsJagran किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा में निवेश की सलाह नहीं देता।


