NEET-UG Exam Reforms: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा को मौजूदा सिंगल-स्टेज (एक चरण) प्रणाली की बजाय JEE की तर्ज पर दो-चरणीय (2-Stage Format) बनाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो हर साल लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की तैयारी और परीक्षा प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे (Affidavit) में बताया कि संबंधित मंत्रालय और एजेंसियां इस बात का अध्ययन कर रही हैं कि NEET-UG परीक्षा एक ही चरण में आयोजित की जाए या JEE Main और JEE Advanced की तरह दो चरणों में।
यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार की मांग की गई है।
सरकार ने कहा कि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पेपर लीक रोकने के लिए बड़े सुधारों की तैयारी
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं—
- परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना।
- डिजिटल निगरानी (Surveillance) बढ़ाना।
- आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग।
- परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना।
- संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना।
सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा मजबूत करना और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम करना है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाई लेवल टास्क फोर्स
सरकार ने बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया था।
इस टास्क फोर्स का उद्देश्य है—
- परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाना।
- तकनीक आधारित सुधारों की सिफारिश करना।
- पेपर लीक रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना।
- NTA की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना।
यह टास्क फोर्स छात्रों के विरोध प्रदर्शन और परीक्षा विवादों के बाद गठित की गई थी।
पेपर लीक पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि परीक्षा में धांधली और पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए नए कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं।
इसके तहत—
- पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान।
- दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई।
- मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना।
- संगठित परीक्षा अपराधों पर विशेष निगरानी।
सरकार का कहना है कि इन कदमों से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
दो-चरणीय NEET-UG परीक्षा कैसी हो सकती है?
हालांकि सरकार ने अभी नया प्रारूप तय नहीं किया है, लेकिन यदि JEE मॉडल अपनाया जाता है तो संभावित व्यवस्था कुछ इस प्रकार हो सकती है—
- पहले चरण में सभी अभ्यर्थी परीक्षा देंगे।
- पहले चरण के प्रदर्शन के आधार पर चयनित उम्मीदवार दूसरे चरण में शामिल होंगे।
- अंतिम मेरिट दोनों चरणों या दूसरे चरण के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की जा सकती है।
- इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक प्रतिस्पर्धी और व्यवस्थित हो सकती है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है और अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि दो-चरणीय परीक्षा प्रणाली लागू होती है, तो इसका असर हर साल NEET-UG देने वाले लाखों छात्रों पर पड़ेगा।
संभावित प्रभाव—
- तैयारी की रणनीति बदलनी होगी।
- परीक्षा का कैलेंडर अलग हो सकता है।
- छात्रों को दो चरणों के अनुसार अध्ययन करना होगा।
- मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और केंद्र सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। अंतिम फैसला आने के बाद ही नए परीक्षा प्रारूप को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


