India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक हिस्से को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के कुछ अनसुलझे हिस्सों के सीमांकन को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि, भारत सरकार ने जमीन की अदला-बदली (Land Exchange) से जुड़ी खबरों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस खबर के सामने आने के बाद मणिपुर में कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
MEA ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े सवाल पर कहा कि सीमा के कुछ हिस्से अभी भी अनसुलझे हैं और उन्हें लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।
उन्होंने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनका समाधान अभी बाकी है और इन इलाकों को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, उन्होंने जमीन के किसी भी संभावित हस्तांतरण या अदला-बदली की पुष्टि नहीं की।
भारत सरकार का रुख रहा है कि म्यांमार के साथ कोई बड़ा सीमा विवाद नहीं है, बल्कि कुछ इलाकों में सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) का अंतिम निर्धारण बाकी है।
मीडिया रिपोर्ट में जमीन अदला-बदली का दावा
अमेरिकी मैगजीन The Diplomat की 17 जुलाई की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर के चंदेल जिले में बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान पर विचार कर रही है।
रिपोर्ट में 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया था कि सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
यह क्षेत्र करीब 2.8 किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है, जो मणिपुर के चंदेल जिले और म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की काबाव घाटी (Kabaw Valley) के पास स्थित है।
भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?
भारत और म्यांमार के बीच कुल 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा भारत के चार राज्यों—
- अरुणाचल प्रदेश
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिजोरम
से होकर गुजरती है।
यह इलाका ज्यादातर पहाड़ी और जंगलों वाला है। सीमा के दोनों ओर रहने वाले कई जनजातीय समुदायों के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत-म्यांमार सीमा के करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों के जरिए पूरा हो चुका है। वहीं लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अभी भी अनसुलझा है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- अरुणाचल प्रदेश का लोहित सेक्टर
- मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से
सीमा पर फेंसिंग क्यों करना चाहता है भारत?
भारत सरकार का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़ लगाने) का काम पूरा करना है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं—
- अवैध घुसपैठ रोकना
- उग्रवादी संगठनों की आवाजाही पर नियंत्रण
- सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों को रोकना
साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार बॉर्डर पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को खत्म करने की घोषणा की थी।
FMR व्यवस्था के तहत सीमा के पास रहने वाले जनजातीय समुदायों को बिना वीजा के 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी। यह व्यवस्था 2018 में शुरू की गई थी।
1967 के समझौते के बाद भी क्यों बाकी है सीमांकन?
भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान सीमा को वर्ष 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत निर्धारित किया गया था। इसके बावजूद कुछ इलाकों में सीमा स्तंभों की स्थिति को लेकर काम पूरा नहीं हो पाया।
भारत सरकार ने 2018 में संसद को जानकारी दी थी कि बाकी क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा। इसके तहत कुछ नए सीमा स्तंभ स्थापित करने की योजना भी बनाई गई थी।
मणिपुर के कुछ संवेदनशील क्षेत्र हैं—
- मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68)
- मोरेह सेक्टर (पिलर 75-79)
- चोरो खुन्नौ सेक्टर (पिलर 88-95)
मणिपुर में जमीन अदला-बदली की खबरों का विरोध
जमीन के संभावित आदान-प्रदान की खबरों के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने चिंता जताई है।
Coordinating Committee on Manipur Integrity (COCOMI) ने कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती हैं और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को देने का प्रयास किया जाता है तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
COCOMI का कहना है कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि राज्य की जनता की सहमति के बिना ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।
भारत-म्यांमार सीमा विवाद पर क्या है स्थिति?
फिलहाल स्थिति यह है कि—
- MEA ने सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
- जमीन अदला-बदली को लेकर सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
- मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
- विवादित क्षेत्र मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है।
- भारत सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए फेंसिंग पर काम कर रहा है।
- मणिपुर के संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय बदलाव का विरोध किया है।
निष्कर्ष
भारत-म्यांमार सीमा का मुद्दा फिलहाल बातचीत के स्तर पर है। सरकार का कहना है कि यह कोई बड़ा सीमा विवाद नहीं बल्कि कुछ हिस्सों के सीमांकन से जुड़ा मामला है। हालांकि, मणिपुर में जमीन से जुड़े किसी भी संभावित बदलाव को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि सीमा निर्धारण किस दिशा में आगे बढ़ता है।


