Nifty vs Sensex Today: शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों को एक असामान्य तस्वीर देखने को मिली। जहां निफ्टी 50 आधे फीसदी से अधिक टूट गया, वहीं सेंसेक्स हरे निशान में कारोबार करता नजर आया। आमतौर पर दोनों प्रमुख इक्विटी इंडेक्स एक जैसी दिशा में चलते हैं और इनके बीच उतार-चढ़ाव का अंतर बहुत कम होता है। लेकिन इस बार दोनों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दिया। इसकी मुख्य वजह एनएसई (NSE) द्वारा 3 अगस्त से लागू किया गया नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियम है, जिसने निफ्टी के क्लोजिंग स्तर को प्रभावित किया।
शुरुआती कारोबार में कैसा रहा बाजार?
मंगलवार सुबह करीब 09:23 बजे बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार रही—
- Sensex: 192.71 अंक (0.25%) की बढ़त के साथ 78,831.74
- Nifty 50: 150.60 अंक (0.61%) की गिरावट के साथ 24,623.70
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स एक समय 504.12 अंक चढ़कर 79,143.15 तक पहुंच गया। दूसरी ओर निफ्टी 184.45 अंक टूटकर 24,589.85 के स्तर तक फिसल गया।
यही वजह रही कि निवेशकों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर दोनों प्रमुख इंडेक्स की चाल इतनी अलग क्यों है।
आखिर क्यों टूटा निफ्टी और हरे निशान में रहा सेंसेक्स?
इस असामान्य अंतर की सबसे बड़ी वजह एनएसई का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session – CAS) है।
3 अगस्त से एनएसई ने इक्विटी डेरिवेटिव्स से जुड़े शेयरों के लिए ट्रेडिंग प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद 03:15 बजे से 03:35 बजे तक 20 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन आयोजित किया जाता है।
इस दौरान निवेशक—
- मार्केट ऑर्डर दे सकते हैं।
- लिमिट ऑर्डर लगा सकते हैं।
- इन्हीं ऑर्डर्स के आधार पर संबंधित शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय होता है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर निफ्टी 50 पर देखने को मिला क्योंकि इसमें शामिल कई शेयर एफएंडओ (F&O) सेगमेंट का हिस्सा हैं।
पिछले कारोबारी दिन क्या हुआ था?
सोमवार को बाजार बंद होने से ठीक पहले क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान निफ्टी में तेज उछाल देखने को मिला।
- कारोबार के अंतिम दो मिनट में निफ्टी करीब 201 अंक उछल गया।
- इसके बाद निफ्टी 24,774.30 पर बंद हुआ।
- वहीं सेंसेक्स 544.39 अंक (0.70%) की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ।
चूंकि निफ्टी का क्लोजिंग स्तर क्लोजिंग ऑक्शन की वजह से काफी ऊपर चला गया था, इसलिए मंगलवार को बाजार खुलने पर तुलना उसी ऊंचे बेस से हुई। इसी कारण निफ्टी में बड़ी गिरावट दिखाई दी, जबकि सेंसेक्स अपेक्षाकृत मजबूत नजर आया।
क्या है नया Closing Auction Session (CAS)?
सेबी के नए फ्रेमवर्क के तहत अब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट वाले कैश मार्केट शेयरों के लिए क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया बदल गई है।
नई व्यवस्था की प्रमुख बातें:
- नियमित ट्रेडिंग 03:15 बजे समाप्त होगी।
- इसके बाद 03:15 PM से 03:35 PM तक क्लोजिंग ऑक्शन चलेगा।
- इसी दौरान मिले ऑर्डर्स के आधार पर अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय होगा।
- यह नियम फिलहाल एफएंडओ से जुड़े शेयरों पर लागू है।
पहले कैसे तय होता था क्लोजिंग प्राइस?
इस बदलाव से पहले सभी शेयरों का क्लोजिंग प्राइस VWAP (Volume Weighted Average Price) के आधार पर तय किया जाता था।
VWAP में बाजार बंद होने से पहले निर्धारित अवधि के दौरान हुए सभी ट्रेड्स का वॉल्यूम के हिसाब से औसत मूल्य लिया जाता था। अब एफएंडओ शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन की प्रक्रिया लागू होने से क्लोजिंग प्राइस अधिक पारदर्शी तरीके से तय किया जाएगा।
सेबी ने नया नियम क्यों लागू किया?
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और मजबूत बनाना है।
इस नई व्यवस्था से—
- प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी।
- क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर की संभावना कम होगी।
- डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी और सेटलमेंट अधिक सटीक तरीके से हो सकेगी।
- संस्थागत और खुदरा निवेशकों दोनों के लिए निष्पक्ष बाजार व्यवस्था मजबूत होगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
आने वाले दिनों में बाजार बंद होने के समय निफ्टी और एफएंडओ शेयरों में आखिरी मिनटों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए केवल शुरुआती गिरावट या तेजी देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय निवेशकों को यह समझना होगा कि नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम इंडेक्स के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


