भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र के बाद निफ्टी की क्लोजिंग को लेकर कई निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। दिन के अंतिम मिनटों में निफ्टी में आई तेज़ बढ़त और कैश व फ्यूचर्स मार्केट के बीच असामान्य अंतर को देखते हुए सोशल मीडिया पर तकनीकी गड़बड़ी की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रेडिंग सिस्टम में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी नहीं हुई थी।
एक्सचेंज के मुताबिक, निफ्टी का अंतिम स्तर पूरी तरह वैध और आधिकारिक क्लोजिंग वैल्यू थी, जो नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session – CAS) के तहत तय हुई। यह नया सिस्टम 3 अगस्त से लागू किया गया है और इसका उद्देश्य फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग कीमत तय करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
हाईलाइट्स
- NSE ने ट्रेडिंग में तकनीकी गड़बड़ी की खबरों को खारिज किया।
- नया Closing Auction Session (CAS) बना निफ्टी की अंतिम क्लोजिंग का आधार।
- कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच प्रीमियम से निवेशकों में बना भ्रम।
- कई ब्रोकरेज हाउस ने फिलहाल 3 बजे तक ट्रेड स्क्वायर-ऑफ करने की सलाह दी।
- एक्सचेंज ने कहा कि यह नए सिस्टम का सामान्य प्रभाव है।
क्यों मचा था भ्रम?
सोमवार को बाजार बंद होने से ठीक पहले निफ्टी के अंतिम क्लोजिंग स्तर में तेज़ बदलाव देखने को मिला। कई निवेशकों को लगा कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या एक्सचेंज में कोई तकनीकी समस्या आ गई है।
लेकिन NSE ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से नहीं, बल्कि नए Closing Auction Session (CAS) के तहत तय हुई आधिकारिक क्लोजिंग कीमत के कारण हुआ।
एक्सचेंज ने कहा कि अब क्लोजिंग कीमत का निर्धारण ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, इसलिए अंतिम कुछ मिनटों में कीमतों में बदलाव सामान्य है।
क्या है नया Closing Auction Session (CAS)?
NSE ने 3 अगस्त से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू किया है। इस प्रणाली में बाजार बंद होने के समय खरीद और बिक्री के ऑर्डर एक विशेष ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए मैच किए जाते हैं।
ऑक्शन के दौरान जिस कीमत पर सबसे अधिक ऑर्डर मैच होते हैं, वही उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग कीमत मानी जाती है। इसी आधार पर निफ्टी और अन्य इंडेक्स का अंतिम क्लोजिंग स्तर भी निर्धारित होता है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य F&O सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग कीमत को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
अलग-अलग एक्सचेंजों पर क्लोजिंग कीमत क्यों हो सकती है अलग?
नए सिस्टम में प्रत्येक एक्सचेंज की क्लोजिंग ऑक्शन बुक अलग होती है। इसका मतलब है कि किसी शेयर की क्लोजिंग कीमत NSE और दूसरे एक्सचेंज पर अलग-अलग हो सकती है।
चूंकि इंडेक्स की गणना संबंधित एक्सचेंज की क्लोजिंग कीमतों के आधार पर होती है, इसलिए अलग-अलग एक्सचेंजों पर इंडेक्स वैल्यू में भी मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।
कैश मार्केट में प्रीमियम ने बढ़ाया कन्फ्यूजन
सोमवार को बाजार में एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जहां दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट की कीमतें फ्यूचर्स मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड करती दिखाई दीं।
सामान्य परिस्थितियों में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमत स्पॉट या कैश मार्केट से अधिक होती है, क्योंकि उनमें कॉस्ट ऑफ कैरी शामिल रहती है। लेकिन इस बार इसके उलट स्थिति बनने से कई ट्रेडर्स भ्रमित हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नए CAS सिस्टम के शुरुआती चरण का प्रभाव है और समय के साथ बाजार इसमें पूरी तरह एडजस्ट हो जाएगा।
ब्रोकरेज फर्मों ने क्या सलाह दी?
नए सिस्टम के पहले कारोबारी दिन के बाद कई ब्रोकरेज कंपनियों ने अपने रिटेल ग्राहकों को सलाह जारी की।
ब्रोकर्स ने सुझाव दिया कि जब तक बाजार पूरी तरह नई प्रक्रिया के अनुरूप स्थिर नहीं हो जाता, तब तक निवेशक अपनी इंट्राडे पोजीशन दोपहर 3:00 बजे से पहले या अधिकतम 3:05 बजे तक स्क्वायर-ऑफ कर लें।
इसका उद्देश्य अंतिम ऑक्शन के दौरान संभावित कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचना है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस बदलाव का कोई बड़ा प्रभाव नहीं माना जा रहा है। हालांकि, इंट्राडे ट्रेडर्स और F&O सेगमेंट में सक्रिय निवेशकों को अब क्लोजिंग ऑक्शन के प्रभाव को समझकर अपनी ट्रेडिंग रणनीति बनानी होगी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कुछ दिनों तक कैश और फ्यूचर्स के बीच कीमतों में असामान्य अंतर दिखाई दे सकता है, लेकिन धीरे-धीरे बाजार नई प्रणाली के अनुरूप सामान्य हो जाएगा।
निष्कर्ष
NSE ने साफ कर दिया है कि सोमवार की ट्रेडिंग में किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई थी। निफ्टी की अंतिम क्लोजिंग पूरी तरह नए Closing Auction Session (CAS) के नियमों के अनुसार तय हुई। शुरुआती दिनों में इस नई प्रणाली के कारण कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच अंतर और कुछ भ्रम देखने को मिल सकता है, लेकिन एक्सचेंज और ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि बाजार जल्द ही इस व्यवस्था के साथ सहज हो जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


