US New Tariffs Row: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) का मुद्दा केवल एक बहाना बनाकर बड़े पैमाने पर टैरिफ फिर से लागू किए हैं, जबकि इसी तरह के शुल्क को लेकर प्रशासन को इस वर्ष अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका मिल चुका है।
भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ का विरोध
डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99.4 प्रतिशत हिस्सा रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं।
अमेरिका ने पिछले महीने इन देशों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक का नया टैरिफ लागू किया। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन देशों ने बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
भारत को मिली आंशिक राहत
भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने अंतिम रूप से 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत के लिए 12.5 प्रतिशत टैरिफ प्रस्तावित था।
भारत को यह राहत इसलिए मिली क्योंकि 14 जून को भारत सरकार ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन करते हुए बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।
25 राज्यों ने अदालत में क्या दलील दी?
3 अगस्त को दायर याचिका में राज्यों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301) का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
याचिका के अनुसार—
- व्हाइट हाउस बंधुआ मजदूरी की चिंताओं का उपयोग केवल बहाने के रूप में कर रहा है।
- प्रशासन पहले भी व्यापक टैरिफ लगाने की कोशिश कर चुका है, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
- सेक्शन 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
- नए शुल्क उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेंगे।
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने क्या कहा?
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हार के बावजूद ट्रंप प्रशासन एक नए रास्ते से फिर वही टैरिफ लागू करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को संविधान के तहत अपनी इच्छा से किसी भी देश पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। प्रशासन चाहे इसे किसी भी आधार पर सही ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून स्पष्ट है।
सुप्रीम कोर्ट से पहले भी मिला था झटका
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाए थे।
प्रशासन का तर्क था कि अमेरिका का लगातार बढ़ता व्यापार घाटा राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति है और इसी आधार पर टैरिफ लगाए गए।
हालांकि, फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को इतने व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। अदालत के फैसले के बाद प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क वापस करने पड़े।
इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लागू किया, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो गई।
अब सेक्शन 301 के तहत लगाए गए नए शुल्क
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने Trade Act 1974 की Section 301 का सहारा लिया और नए टैरिफ लागू कर दिए।
प्रशासन का कहना है कि कई देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहे हैं। इसलिए अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ये शुल्क आवश्यक हैं।
व्हाइट हाउस ने टैरिफ का किया बचाव
ट्रंप प्रशासन ने राज्यों की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि ये टैरिफ पूरी तरह कानूनी हैं।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन विदेशी नीतियों और व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ कर रहा है जो अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों पर बोझ डालती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई देश बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाता, तो उसका सीधा नुकसान अमेरिकी व्यापार और घरेलू उद्योग को होता है। ऐसे मामलों में Section 301 एक प्रभावी कानूनी हथियार है।
किन राज्यों ने किया विरोध?
मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 राज्यों में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं, जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर होने के बावजूद वे भी इस कानूनी चुनौती का हिस्सा बने हैं।
राज्यों का कहना है कि नए टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ेंगे और घरेलू कारोबार की लागत भी बढ़ेगी।
ट्रंप का आर्थिक तर्क
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऊंचे आयात शुल्क को अपनी आर्थिक नीति का प्रमुख हिस्सा बताते रहे हैं। उनका कहना है कि—
- अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
- घरेलू उद्योगों और श्रमिकों की सुरक्षा होगी।
- विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।
- व्यापार वार्ताओं में अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है और अमेरिकी कंपनियों के लिए आयातित कच्चा माल महंगा हो जाएगा।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत पर टैरिफ घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि यह कानूनी विवाद लंबा चलता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ने की आशंका बनी रहेगी, जबकि दोनों देशों के बीच भविष्य की व्यापार वार्ताओं पर भी इस मामले की नजर रहेगी।
निष्कर्ष
भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए अमेरिकी टैरिफ अब केवल व्यापारिक नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय बन चुके हैं। 25 अमेरिकी राज्यों द्वारा ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर मुकदमे से यह स्पष्ट है कि अमेरिका के भीतर भी इस नीति को लेकर गहरे मतभेद हैं। अब सभी की नजर अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट के फैसले पर रहेगी, जो तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ रणनीति कानून के दायरे में है या नहीं।


