Meta CEO Mark Zuckerberg AI Statement: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नौकरी जाने का डर लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने दावा किया है कि AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। हालांकि, यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसी साल मेटा ने करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की और कंपनी की रणनीति का फोकस तेजी से AI पर शिफ्ट कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या AI वास्तव में नौकरियां बचाएगा या आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप को पूरी तरह बदल देगा?
AI से नौकरी नहीं जाएगी? क्या बोले जुकरबर्ग
मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि AI को केवल नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक के रूप में देखना सही नहीं है। उनके मुताबिक AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम तैयार करने के लिए बड़ी संख्या में नई नौकरियां पैदा हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि मेटा दुनिया भर में 32 डेटा सेंटर का निर्माण या संचालन कर रहा है और वर्ष 2027 तक अपनी कंप्यूटिंग क्षमता चार गुना बढ़ाने की तैयारी में है। इस विस्तार के लिए कंस्ट्रक्शन वर्कर, इलेक्ट्रिशियन, कूलिंग इंजीनियर, नेटवर्क स्पेशलिस्ट और डेटा सेंटर ऑपरेशन से जुड़े विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
फिर 8,000 कर्मचारियों की छंटनी क्यों हुई?
यही वह सवाल है जिसने जुकरबर्ग के बयान पर बहस छेड़ दी है। AI में भारी निवेश के बीच मेटा ने इस साल करीब 8,000 कर्मचारियों, यानी कुल वर्कफोर्स के लगभग 10 फीसदी, की छंटनी की।
विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी ने अपने संसाधनों को पारंपरिक बिजनेस यूनिट्स से हटाकर AI और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित करने के लिए यह कदम उठाया। यानी नई नौकरियां तो बन रही हैं, लेकिन उनकी प्रकृति पहले से बिल्कुल अलग है।
कर्मचारियों के लिए आसान नहीं रहा AI ट्रांजिशन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छंटनी की प्रक्रिया कर्मचारियों के लिए काफी कठिन रही। बताया गया कि 20 मई की सुबह ईमेल के जरिए कर्मचारियों को नौकरी समाप्त होने की सूचना दी गई।
इसके अलावा कई कर्मचारियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कॉर्पोरेट लैपटॉप पर उनकी गतिविधियों, जैसे कीस्ट्रोक और स्क्रीन एक्टिविटी, की निगरानी की जा रही थी। वहीं हजारों कर्मचारियों को AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर भी किया गया।
AI पर भारी निवेश, निवेशकों की बढ़ी चिंता
मेटा आने वाले वर्षों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 130 से 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की योजना पर काम कर रही है। इस बड़े निवेश का असर कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी दिखाई दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का फ्री कैश फ्लो घटकर 784 मिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले कुछ वर्षों के सबसे निचले स्तरों में शामिल है। इसी वजह से निवेशक यह जानना चाहते हैं कि AI पर किए जा रहे इस भारी खर्च का वास्तविक लाभ कंपनी को कब मिलेगा।
AI रोजगार खत्म करेगा या नए अवसर देगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI पूरी तरह नौकरियां खत्म नहीं करेगा, लेकिन यह रोजगार के स्वरूप को जरूर बदल देगा।
- दोहराए जाने वाले और रूटीन कार्यों में ऑटोमेशन बढ़ सकता है।
- AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर मैनेजमेंट जैसी स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
- कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुसार खुद को अपस्किल और रिस्किल करना होगा।
- कंपनियां पारंपरिक भूमिकाओं की बजाय AI आधारित कार्यों पर अधिक निवेश कर सकती हैं।
क्या जुकरबर्ग का दावा पूरी तरह सही है?
जुकरबर्ग का यह कहना कि AI नए रोजगार पैदा करेगा, काफी हद तक सही माना जा सकता है। लेकिन यह भी सच है कि AI के कारण बनने वाली नई नौकरियां अक्सर उन्हीं कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं होतीं, जिनकी पारंपरिक भूमिकाएं समाप्त हो जाती हैं। इसलिए AI का प्रभाव केवल “नौकरी जाएगी या नहीं” तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी बदलती तकनीक के साथ कितनी तेजी से खुद को तैयार कर पाते हैं।
निष्कर्ष
AI के दौर में रोजगार पूरी तरह खत्म होने की बजाय बदल रहे हैं। मेटा जैसी कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर नई संभावनाएं बना रही हैं, लेकिन साथ ही पारंपरिक पदों में कटौती भी कर रही हैं। ऐसे में जुकरबर्ग का दावा आंशिक रूप से सही कहा जा सकता है—AI अवसर भी देगा और चुनौतियां भी। भविष्य में वही पेशेवर आगे रहेंगे जो नई तकनीकों के साथ खुद को लगातार अपडेट करते रहेंगे।


