LIC OFS: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस OFS के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो सोमवार के बंद भाव ₹424.35 की तुलना में करीब 11% कम है। यह ऑफर 4 अगस्त से खुलेगा और पहले दिन संस्थागत निवेशक बोली लगा सकेंगे, जबकि रिटेल निवेशकों को अगले दिन मौका मिलेगा। सरकार का यह कदम डिसइन्वेस्टमेंट प्रोग्राम और न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का पालन करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार LIC में क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
केंद्र सरकार ने सोमवार (3 अगस्त) को घोषणा की कि वह Life Insurance Corporation of India (LIC) में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेगी। यह बिक्री सरकार के डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से कम करना और बाजार में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाना है।
सरकार फिलहाल LIC में 96.5% हिस्सेदारी रखती है। OFS पूरा होने के बाद यह घटकर करीब 90% रह जाएगी।
₹382 का फ्लोर प्राइस, बाजार भाव से 11% कम
OFS के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है।
- फ्लोर प्राइस: ₹382 प्रति शेयर
- सोमवार का बंद भाव: ₹424.35
- डिस्काउंट: करीब 11%
आमतौर पर OFS में फ्लोर प्राइस बाजार मूल्य से कम रखा जाता है ताकि निवेशकों की भागीदारी बढ़ सके और ऑफर को बेहतर प्रतिक्रिया मिले।
कब खुलेगा LIC का OFS?
सरकार ने OFS के लिए अलग-अलग निवेशकों के लिए अलग तिथियां तय की हैं।
| निवेशक | तारीख |
|---|---|
| गैर-रिटेल (Institutional Investors) | 4 अगस्त 2026 |
| रिटेल निवेशक | 5 अगस्त 2026 |
इस दौरान LIC ने जानकारी दी है कि कंपनी की ट्रेडिंग विंडो 8 अगस्त 2026 तक बंद रहेगी।
पहले 2.5% हिस्सेदारी बिकेगी, फिर रहेगा ग्रीनशू ऑप्शन
डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के अनुसार OFS दो चरणों में होगा।
- पहले चरण में 2.5% हिस्सेदारी बेची जाएगी।
- यदि निवेशकों की मांग ज्यादा रहती है तो 4% का ग्रीनशू ऑप्शन भी लागू किया जाएगा।
- इस तरह कुल 6.5% हिस्सेदारी तक बेची जा सकती है।
ग्रीनशू ऑप्शन का मतलब है कि यदि OFS को अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है तो सरकार पहले से तय अतिरिक्त शेयर भी बेच सकती है।
सरकार का क्या है लक्ष्य?
DIPAM के सचिव अरुणिश चावला के मुताबिक इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए सरकार Minimum Public Shareholding (MPS) का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल करना चाहती है।
इससे LIC में आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ेगी और कंपनी का फ्री-फ्लोट भी मजबूत होगा, जिससे शेयर में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है।
SEBI ने मई 2027 तक दिया था समय
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने LIC को मई 2027 तक सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 90% करने की अनुमति दी थी।
SEBI के Minimum Public Shareholding (MPS) नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में पर्याप्त सार्वजनिक हिस्सेदारी होना जरूरी है। इसी नियम का पालन करने के लिए सरकार यह OFS ला रही है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह OFS?
LIC के OFS में बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर शेयर खरीदने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, किसी भी OFS में निवेश से पहले निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, भविष्य की संभावनाओं और बाजार की स्थिति का आकलन करना चाहिए।
कम फ्लोर प्राइस के कारण OFS में अच्छी मांग देखने को मिल सकती है, लेकिन अंतिम निवेश निर्णय जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
LIC OFS: मुख्य बातें
- सरकार LIC में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी।
- फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया।
- यह कीमत बाजार भाव से करीब 11% कम है।
- 4 अगस्त को गैर-रिटेल निवेशकों के लिए OFS खुलेगा।
- 5 अगस्त को रिटेल निवेशक आवेदन कर सकेंगे।
- OFS के बाद सरकार की हिस्सेदारी 96.5% से घटकर करीब 90% रह जाएगी।
- यह कदम SEBI के Minimum Public Shareholding (MPS) नियमों के अनुपालन के लिए उठाया गया है।
Disclaimer
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या योग्य एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


